May 21, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 11 नवम्बर 2023। विधानसभा चुनाव- 2023 के लिए मतदान 25 नवम्बर को होना है एवं मतदान के लिए आज से 13 दिन शेष रहें है। ऐसे में श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स द्वारा प्रतिदिन विशेष कवरेज “सत्ता का संग्राम” टाइम्स के सभी पाठकों के लिए चुनाव की काऊंडाउन के साथ लगातार प्रस्तुत की जा रही है। प्रतिदिन शाम को एक अंदरखाने की खबर के साथ क्षेत्र की चुनावी चर्चा पाठकों के समक्ष रखी जा रही है। इसी क्रम में पढ़ें आज की विशेष टिप्पणी।
कितनी स्पीड पकड़ेगा नीले हाथी का सवार।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। नीले घोड़े रो असवार, ओ मेवाड़ी सरदार, महाराणा प्रताप के रणकौशल पर लिखा गया ये गीत तो काफी लोकप्रिय है और इसी गीत की तर्ज पर श्रीडूंगरगढ़ के चुनावी रण में भी नीले घोड़े के बजाए नीले हाथी की चर्चाएं जोर पकड़ रही है। यहां सभी का यही मानस है कि नीले हाथी का सवार कितनी स्पीड पकड़ेगा। चर्चाओं में यह भी है कि नीले हाथी की स्पीड को चुनावी रण कौशल में आगे बढ़ाने के लिए महावत के रूप में बहिनजी भी श्रीडूंगरगढ़ आएंगी। चुनाव में जातीय कट्टरता की निंदा भले ही सभी करते हो लेकिन सभी पार्टियां, हर प्रत्याशी की चुनावी नींव जातीय कट्टरता पर ही टिकी है। ऐसे में अगर नीले हाथी वाली बहिनजी का श्रीडूंगरगढ़ दौरा हो जाता है तो तीनों ही मुख्य दलों के बीच यह चुनाव निश्चित रूप से बेहद नजदीकी एवं कांटे के मुकाबले का होगा। नीले हाथी के कारण सीधा सीधा नुकसान तिरंगें एवं लाल झंडे को होता दिख रहा है। ऐसे में हर गांव, गुवाड़ में यही चर्चा है कि नीला हाथी कितनी स्पीड पकड़ेगा.?
सुबह का भूला, शाम को घर लौटा, बोला बडेरा रो मान राख्यो सर्मथन।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सुबह का भूला शाम को घर लौटे तो उसे भूला नहीं कहते। यह कहावत इन दिनों श्रीडूंगरगढ़ के राजनीतिक हल्कों में सुनने को मिल रही है। यहां राष्ट्रीय पार्टियों के प्रत्याशियों के सामने अपने नम्बर बढ़ाने के लिए ग्रामीण नेताओं द्वारा अपने-अपने गांवों में दूसरी पार्टियों के लोगों की अपने पक्ष में ज्वाईनिंग करवाई जा रही है। लेकिन इस अभियान में गांव तोलियासर के एक फौजी की ज्वाईनिंग खासी चर्चित हो गई। तोलियासर ब्लॉक से लाल झंडे पर पंचायत समिति सदस्य का चुनाव लड़ने वाले इस फौजी की मौजूदगी राष्ट्रवादी पार्टी के चुनावी कार्यालय में देखी गई एवं ज्वाईन करने की खबर को भी खूब प्रचारित किया गया। लेकिन ज्वाईनिंग के अगले ही दिन फौजी वापस लाल झंडे के खेमे में पहुंच गया एवं बिना बताए कार्यालय ले जाने व वहां बुजुर्गों का मान रखने के लिए विरोध नहीं करने की बात कही। फौजी ने माईक पर अपनी ज्वाईनिंग को नकारा तो यह भी सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो गया। अब हुआ चाहे जो भी लेकिन गांव के सरदार की तो बड़े नेताजी के सामने किरकिरी हो ही गई।
नोटा का शोर, खाएगा कितना जोर।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ की राजनीति में गत पांच सालों में कई युवा नेता खासे सक्रिय दिखे थे, कई संगठनों के माध्यम से तो कोई राजनीतिक पार्टियों के माध्यम से। टिकटों के लिए भी जोर लगाया लेकिन काम नहीं आया। अब ये युवा नेता तो अपने अपने हिसाब से वोट पोल करवा कर अपनी ताकत दिखाना चाहते है लेकिन इनके सर्मथक युवाओं में नोटा का शोर मच रहा है। शोर मचे भी क्यों नहीं, जब तीनों ही मुख्य प्रत्याशी रिटायरमेंट की उम्र को पार कर चुके है। अब यह नोटा का शोर कितना जोर खाएगा यह तो परिणाम ही बताएगा लेकिन यह शोर इन दिनों मुख्य प्रत्याशियों की नींद में खलल जरूर पैदा कर रहा है।