






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 12 दिसंबर 2023, 🚩श्री गणेशाय नम:🚩शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 12 – Dec – 2023
☀ Sri Dungargarh, India
☀ पंचांग
🔅 तिथि अमावस्या +05:03 AM
🔅 नक्षत्र अनुराधा 11:56 AM
🔅 करण :
चतुष्पाद 05:49 PM
नाग 05:49 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग धृति 06:50 PM
🔅 वार मंगलवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 07:15 AM
🔅 चन्द्रोदय चन्द्रोदय नहीं
🔅 चन्द्र राशि वृश्चिक
🔅 सूर्यास्त 05:39 PM
🔅 चन्द्रास्त 04:55 PM
🔅 ऋतु हेमंत
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1945 शोभकृत
🔅 कलि सम्वत 5125
🔅 दिन काल 10:23 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2080
🔅 मास अमांत कार्तिक
🔅 मास पूर्णिमांत मार्गशीर्ष
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:06:38 – 12:48:13
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 09:20 AM – 10:01 AM
🔅 कंटक 07:57 AM – 08:38 AM
🔅 यमघण्ट 10:43 AM – 11:25 AM
🔅 राहु काल 03:03 PM – 04:21 PM
🔅 कुलिक 01:29 PM – 02:11 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 09:20 AM – 10:01 AM
🔅 यमगण्ड 09:51 AM – 11:09 AM
🔅 गुलिक काल 12:27 PM – 01:45 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुम्भ
📜 चोघडिया 📜
🔅रोग 07:15:38 – 08:33:35
🔅उद्वेग 08:33:35 – 09:51:32
🔅चल 09:51:32 – 11:09:29
🔅लाभ 11:09:29 – 12:27:26
🔅अमृत 12:27:26 – 13:45:22
🔅काल 13:45:22 – 15:03:19
🔅शुभ 15:03:19 – 16:21:16
🔅रोग 16:21:16 – 17:39:13
🔅काल 17:39:13 – 19:21:21
🔅लाभ 19:21:21 – 21:03:29
🔅उद्वेग 21:03:29 – 22:45:37
🔅शुभ 22:45:37 – 24:27:45
🔅अमृत 24:27:45 – 26:09:53
🔅चल 26:09:53 – 27:52:01
🔅रोग 27:52:01 – 29:34:09
🔅काल 29:34:09 – 31:16:17
❄️ लग्न तालिका ❄️
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 05:20 AM समाप्त: 07:45 AM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 07:45 AM समाप्त: 09:43 AM
🔅 मकर चर
शुरू: 09:43 AM समाप्त: 11:26 AM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 11:26 AM समाप्त: 12:54 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 12:54 PM समाप्त: 02:20 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 02:20 PM समाप्त: 03:56 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 03:56 PM समाप्त: 05:52 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 05:52 PM समाप्त: 08:07 PM
🔅 कर्क चर
शुरू: 08:07 PM समाप्त: 10:27 PM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 10:27 PM समाप्त: अगले दिन 00:44 AM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 00:44 AM समाप्त: अगले दिन 03:00 AM
🔅 तुला चर
शुरू: अगले दिन 03:00 AM समाप्त: अगले दिन 05:20 AM
🌺।। आज का दिन मंगलमय हो ।।🌺
दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
मंगलवार के व्रत से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।
मंगलवार को धरती पुत्र मंगलदेव की आराधना करने से जातक को मुक़दमे, राजद्वार में सफलता मिलती है, उत्तम भूमि, भवन का सुख मिलता है
⭐ दर्श अमावस्या⭐
अमावस्या तिथि को पितरों के तर्पण, दान के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है । इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करके भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देकर अपने पितरों की शांति के लिए उनका तर्पण करते हैं ।
आज पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए घर पर ब्राह्मण को भोजन कराएं एवं उसे यथा शक्ति दान – दक्षिणा प्रदान करें ।
अमावस्या के दिन घर पर खीर अवश्य बनायें फिर उसमें थोड़ी सी खीर दोने पर निकाल कर पित्रों के निमित पीपल पर रख आएं ।
हर अमावस्या को गहरे गड्ढे या कुएं में एक चम्मच दूध डालें इससे कार्यों में बाधाओं का निवारण होता है ।
इसके अतिरिक्त अमावस्या को आजीवन जौ दूध में धोकर बहाएं, आपका भाग्य सदैव आपका साथ देगा ।
अमावस्या पर तुलसी के पत्ते या बिल्व पत्र बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए। अमावस्या पर देवी-देवताओं को तुलसी के पत्ते और शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाने के लिए उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026



