May 21, 2026
6-june

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 6 जून 2024। श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 06 – Jun – 2024
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि अमावस्या 06:09 PM
🔅 नक्षत्र रोहिणी 08:17 PM
🔅 करण :
चतुष्पाद 07:00 AM
नाग 07:00 AM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग धृति 10:08 PM
🔅 वार गुरूवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 05:36 AM
🔅 चन्द्रोदय चन्द्रोदय नहीं
🔅 चन्द्र राशि वृषभ
🔅 चन्द्र वास दक्षिण
🔅 सूर्यास्त 07:28 PM
🔅 चन्द्रास्त 07:37 PM
🔅 ऋतु ग्रीष्म

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1946 क्रोधी
🔅 कलि सम्वत 5126
🔅 दिन काल 01:51 PM
🔅 विक्रम सम्वत 2081
🔅 मास अमांत वैशाख
🔅 मास पूर्णिमांत ज्येष्ठ

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:05:01 – 13:00:28
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 10:14 AM – 11:09 AM
🔅 कंटक 03:46 PM – 04:42 PM
🔅 यमघण्ट 06:32 AM – 07:27 AM
🔅 राहु काल 02:16 PM – 04:00 PM
🔅 कुलिक 10:14 AM – 11:09 AM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 05:37 PM – 06:33 PM
🔅 यमगण्ड 05:36 AM – 07:20 AM
🔅 गुलिक काल 09:04 AM – 10:48 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल दक्षिण

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅शुभ 05:36:47 – 07:20:47
🔅रोग 07:20:47 – 09:04:46
🔅उद्वेग 09:04:46 – 10:48:45
🔅चल 10:48:45 – 12:32:44
🔅लाभ 12:32:44 – 14:16:44
🔅अमृत 14:16:44 – 16:00:43
🔅काल 16:00:43 – 17:44:42
🔅शुभ 17:44:42 – 19:28:41
🔅अमृत 19:28:41 – 20:44:42
🔅चल 20:44:42 – 22:00:42
🔅रोग 22:00:42 – 23:16:42
🔅काल 23:16:42 – 24:32:42
🔅लाभ 24:32:42 – 25:48:43
🔅उद्वेग 25:48:43 – 27:04:43
🔅शुभ 27:04:43 – 28:20:43
🔅अमृत 28:20:43 – 29:36:43

❄️लग्न तालिका❄️

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 04:19 AM समाप्त: 06:14 AM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 06:14 AM समाप्त: 08:29 AM

🔅 कर्क चर
शुरू: 08:29 AM समाप्त: 10:49 AM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 10:49 AM समाप्त: 01:07 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 01:07 PM समाप्त: 03:23 PM

🔅 तुला चर
शुरू: 03:23 PM समाप्त: 05:42 PM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 05:42 PM समाप्त: 08:01 PM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 08:01 PM समाप्त: 10:05 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 10:05 PM समाप्त: 11:48 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 11:48 PM समाप्त: अगले दिन 01:16 AM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 01:16 AM समाप्त: अगले दिन 02:42 AM

🔅 मेष चर
शुरू: अगले दिन 02:42 AM समाप्त: अगले दिन 04:19 AM

🌺।। आज का दिन मंगलमय हो ।।🌺

गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।

गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।

गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।

यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।
और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।

गुरुवार को विष्णु जी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ अत्यन्त फलदाई है।

आज 6 जून गुरुवार को ज्येष्ठ अमावस्या, शनि जयंती, वट सावित्री व्रत है । ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि भगवान का प्राकट्य दिवस मनाया जाता है, अर्थात इस दिन कर्मो के फल प्रदान करने वाले न्याय के देवता शनि देव का जन्मदिवस होता है ।

शनि जयंती के अवसर पर शनि मंदिर जाकर शनि देव की पूजा करें । उनको सरसों का तेल, काले तिल, काली उड़द, गुड़, काजल की डिबिया, शमी के पत्ते, नीले या काले कपड़े आदि चढ़ाएं, और शनि देव के मन्त्र ॐ शं शनिश्चराय नम: एवं शनि चालीसा का पाठ करें ।

शनि जयंती के दिन छाया दान करें, गरीबों और जरूरतमंदों को कपड़े, कंबल, लोहा, दवाई, सरसों का तेल, उड़द की दाल, आदि दान करें, इससे शनि देव की कृपा मिलती है ।

पीपल के पेड़ पर पितरों का वास माना गया है। अमावस्या के दिन सुबह के समय लोहे के बर्तन में, दूध, पानी, काले तिल, शहद एवं जौ मिला कर समस्त सामग्री पीपल की जड़ में अर्पित करके पीपल की 7 परिक्रमा करें, तथा इस दौरान “ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः” मंत्र का जाप भी लगातार करते रहें ।

इस उपाय को करने से पितृ प्रसन्न होते है, उनका आशीर्वाद मिलता है ।

शनि जयंती के दिन काले कुत्ते को सरसो के तेल से चुपड़ी रोटी खिलाने से कुंडली के ग्रहो के अशुभ प्रभाव दूर होते है ।

अमावस्या तिथि को पितरों के तर्पण, दान के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है । इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करके भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देकर अपने पितरों की शांति के लिए उनका तर्पण करते हैं ।

ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सुबह पितरों का तर्पण करें और पितरो के निमित ब्राह्मण को पूर्ण श्रद्धा के साथ भोजन कराएं । ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सांय काल घर के दक्षिण दिशा में पितरों के निमित एक दीपक जलाएं, इससे भी पितृ प्रसन्न होते है ।

अमावस्या के दिन घर पर खीर अवश्य बनायें फिर उसमें थोड़ी सी खीर दोने पर निकाल कर पित्रों के निमित पीपल पर रख आएं ।

हर अमावस्या को गहरे गड्ढे या कुएं में एक चम्मच दूध डालें इससे कार्यों में बाधाओं का निवारण होता है ।

इसके अतिरिक्त अमावस्या को आजीवन जौ दूध में धोकर बहाएं, आपका भाग्य सदैव आपका साथ देगा ।

अमावस्या पर तुलसी के पत्ते या बिल्व पत्र बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए। अमावस्या पर देवी-देवताओं को तुलसी के पत्ते और शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाने के लिए उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट सावित्री व्रत का व्रत रखा जाता है, वट सावित्री का व्रत आज 6 जून गुरुवार को पड़ रहा है । सुहा​गन महिलाएं अपने पति की दीर्घ आयु, सुखी दाम्पत्य जीवन सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं ।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026