May 21, 2026
8-sep

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 8 सितम्बर 2024।  श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का​ पंचांग 📜

☀ 08-Sep-2024
☀ Sri Dungargarh, India

☀ आज का पंचांग
🔅 तिथि पंचमी 08:00 PM
🔅 नक्षत्र स्वाति 03:31 PM
🔅 करण बव, बालव 06:52 AM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग एन्द्र 00:04 AM
🔅 वार रविवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:15 AM
🔅 चन्द्रोदय 10:37 AM
🔅 चन्द्र राशि तुला
🔅 चन्द्र वास पश्चिम
🔅 सूर्यास्त 06:46 PM
🔅 चन्द्रास्त 09:30 PM
🔅 ऋतु शरद
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1946 क्रोधी
🔅 काली सम्वत 5125
🔅 दिन काल 12:30:37
🔅 विक्रम सम्वत 2081
🔅 मास अमांत भाद्रपद
🔅 मास पूर्णिमांत भाद्रपद
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 12:06 PM 12:56 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 05:06 PM 05:56 PM
🔅 कंटक 10:26 AM 11:16 AM
🔅 यमघण्ट 01:46 PM 02:36 PM
🔅 राहु काल 05:12 PM 06:46 PM
🔅 कुलिक 05:06 PM 05:56 PM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 12:06 PM 12:56 PM
🔅 यमगण्ड 12:31 PM 02:05 PM
🔅 गुलिक काल 03:38 PM 05:12 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर

📜 चोघडिया 📜

🔅 उद्वेग 06:15 AM – 07:49 AM
🔅 चल 07:49 AM – 09:23 AM
🔅 लाभ 09:23 AM – 10:57 AM
🔅 अमृत 10:57 AM – 12:31 PM
🔅 काल 12:31 PM – 02:05 PM
🔅 शुभ 02:05 PM – 03:39 PM
🔅 रोग 03:39 PM – 05:13 PM
🔅 उद्वेग 05:13 PM – 06:47 PM
🔅 शुभ 06:47 PM – 08:13 PM
🔅 अमृत 08:13 PM – 09:39 PM
🔅 चल 09:39 PM – 11:05 PM
🔅 रोग 11:05 PM – 00:31 AM
🔅 काल 00:31 AM – 01:57 AM
🔅 लाभ 01:57 AM – 03:23 AM
🔅 उद्वेग 03:23 AM – 04:49 AM
🔅 शुभ 04:49 AM – 06:15 AM

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 04:39 AM समाप्त: 06:56 AM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 06:56 AM समाप्त: 09:12 AM

🔅 तुला चर
शुरू: 09:12 AM समाप्त: 11:31 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 11:31 AM समाप्त: 01:50 PM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 01:50 PM समाप्त: 03:55 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 03:55 PM समाप्त: 05:38 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 05:38 PM समाप्त: 07:06 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 07:06 PM समाप्त: 08:32 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 08:32 PM समाप्त: 10:08 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 10:08 PM समाप्त: 00:04 AM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 00:04 AM समाप्त: 02:19 AM

🔅 कर्क चर
शुरू: 02:19 AM समाप्त: 04:39 AM

🌺।। आज का दिन अत्यंत मंगलमय हो ।।🌺

दिन (वार) रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य देवे

इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।

रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है । अत: रविवार के दिन मंदिर में भैरव जी के दर्शन अवश्य करें ।

रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है

ऋषि पंचमी तिथि सप्तऋषियों की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित मानी जाती है। यह व्रत मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन व्रत करने से साधक को जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिल सकती है। ऐसे में व्रत के दिन ऋषि पंचमी की व्रत कथा का पाठ जरूर करें।

ऋषि पंचमी की कथा

ऋषि पंचमी की कथा के अनुसार, एक नगरी में एक कृषक और उसकी पत्नी रहती थी। एक बार उसकी पत्नी रजस्वला हो गई, लेकिन यह जानने के बावजूद वह अपने कार्यों में लगी रही। जिस कारण उसे दोष लग गया, चूंकि उसका पति भी इस दौरान उसके संपर्क में आ गया, तो वह भी इस दोष का शिकार हो गया, जिस कारण वह दोनों अगले जन्म में जानवर बन गए। पत्नी को कुतिया का जन्म मिला, तो वहीं पति बैल बन गया । इस दोनों का इसके अलावा कोई और दोष नहीं था, इसलिए इन्हें पूर्व जन्म की सारी बातें याद थीं। इस रूप में दोनों अपने पुत्र के घर रहने लगे। एक दिन पुत्र के यहां ब्राह्मण पधारे और उसकी पत्नी ने ब्राह्मणों के लिए भोजन पकाया। लेकिन इस दौरान खीर में एक छिपकली गिर गई, जिसे उसकी मां ने देख लिया।अपने पुत्र को ब्रह्म हत्या से बचाने के लिए उसने अपना मुख खीर में डाल दिया, लेकिन कुतिया की यह हरकत देखकर, पुत्रवधू को बहुत गुस्सा आया और उसने मारकर उसे घर से बाहर निकाल दिया। जब रात के समय वह यह सारी बात बैल के रूप में अपने पति को बता रही थी, तो उनकी सारी बातें उनके पुत्र ने सुन ली। तब उसने एक ऋषि के पास जाकर इसका उपाय पूछा।ऋषि ने पुत्र से कहा कि अपने माता-पिता को इस दोष से छुटकारा दिलाने के लिए तुम्हें और तुम्हारी पत्नी को ऋषि पंचमी का व्रत करना होगा। ऋषि के कहे अनुसार, पुत्र ने ऐसा ही किया, जिससे उन दोनों को पशु योनि से छुटकारा मिल गया। इसलिए महिलाओं के लिए ऋषि पंचमी का व्रत बहुत ही उत्तम माना जाता है।

☘️ संवत्सरी पर्व
☘️ झोरड़ा हरिराम जी मेला

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026