






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 28 अक्टूबर 2024। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 28 – Oct – 2024
☀ Sri Dungargarh, India
☀ पंचांग
🔅 तिथि एकादशी 07:53 AM
🔅 नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी 03:24 PM
🔅 करण :
बालव 07:53 AM
कौलव 07:53 AM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग ब्रह्म 06:46 AM
🔅 वार सोमवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:42 AM
🔅 चन्द्रोदय +03:48 AM
🔅 चन्द्र राशि सिंह
🔅 चन्द्र वास पूर्व
🔅 सूर्यास्त 05:52 PM
🔅 चन्द्रास्त 03:43 PM
🔅 ऋतु हेमंत
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1946 क्रोधी
🔅 कलि सम्वत 5126
🔅 दिन काल 11:09 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2081
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 11:55:14 – 12:39:52
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 12:39 PM – 01:24 PM
🔅 कंटक 08:56 AM – 09:41 AM
🔅 यमघण्ट 11:55 AM – 12:39 PM
🔅 राहु काल 08:06 AM – 09:30 AM
🔅 कुलिक 02:53 PM – 03:38 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 10:25 AM – 11:10 AM
🔅 यमगण्ड 10:53 AM – 12:17 PM
🔅 गुलिक काल 01:41 PM – 03:04 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन
📜 चोघडिया 📜
🔅अमृत 06:42:49 – 08:06:30
🔅काल 08:06:30 – 09:30:11
🔅शुभ 09:30:11 – 10:53:52
🔅रोग 10:53:52 – 12:17:33
🔅उद्वेग 12:17:33 – 13:41:14
🔅चल 13:41:14 – 15:04:55
🔅लाभ 15:04:55 – 16:28:36
🔅अमृत 16:28:36 – 17:52:17
🔅चल 17:52:17 – 19:28:41
🔅रोग 19:28:41 – 21:05:05
🔅काल 21:05:05 – 22:41:29
🔅लाभ 22:41:29 – 24:17:53
🔅उद्वेग 24:17:53 – 25:54:17
🔅शुभ 25:54:17 – 27:30:41
🔅अमृत 27:30:41 – 29:07:05
🔅चल 29:07:05 – 30:43:29
❄️ लग्न तालिका ❄️
🔅 तुला चर
शुरू: 05:55 AM समाप्त: 08:14 AM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 08:14 AM समाप्त: 10:33 AM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 10:33 AM समाप्त: 12:37 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 12:37 PM समाप्त: 02:20 PM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 02:20 PM समाप्त: 03:49 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 03:49 PM समाप्त: 05:14 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 05:14 PM समाप्त: 06:50 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 06:50 PM समाप्त: 08:47 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 08:47 PM समाप्त: 11:02 PM
🔅 कर्क चर
शुरू: 11:02 PM समाप्त: अगले दिन 01:22 AM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: अगले दिन 01:22 AM समाप्त: अगले दिन 03:39 AM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 03:39 AM समाप्त: अगले दिन 05:55 AM
🌺।। आज का दिन मंगलमय हो।।🌺
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष का प्रभाव कम होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
☘️ रमा एकादशी व्रत ☘️
रमा एकादशी तिथि का प्रारंभ 27 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 23 मिनट से होगा जो 28 अक्टूबर को प्रात: 7 बजकर 50 मिनट पर तक रहेगी, चूँकि एकादशी और द्वादशी के संयोग में ब्रत रखना ज्यादा शुभ माना जाता है इसलिए रमा एकादशी का ब्रत आज 28 अक्टूबर को रखा जाएगा ।
शास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि भगवान श्री विष्णु जी को अति प्रिय है । एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु जी / श्री कृष्ण जी की आराधना की जाती है।
शास्त्रों के अनुसार एकादशी का ब्रत रखने वाला जातक भगवान विष्णु जी को बहुत प्रिय होता है ।
एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी के मन्त्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” अथवा ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।। का आशिक से अधिक जाप करना चाहिए ।
एकादशी के दिन जल में आँवले का चूर्ण या आँवले का रस डाल कर स्नान करने से समस्त पापो का नाश होता है।
एकादशी के दिन रात्रि में भगवान विष्णु के सामने नौ बत्तियों का दीपक जलाएं और एक दीपक ऐसा जलाएं जो रात भर जलता रहे।
एकादशी के दिन चावल और दूसरे का अन्न खाना मना है । एकादशी के दिन चावल खाने से रोग और पाप बढ़ते है, एकादशी के दिन दूसरे का अन्न खाने से समस्त पुण्यों का नाश हो जाता है ।
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026




