






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 12 अक्टूबर 2020।
🗓आज का पञ्चाङ्ग🗓
* शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
* वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
* नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
* योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
* करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
🌻सोमवार,12 अक्टूबर 2020🌻
सूर्योदय: 🌄 06:39
सूर्यास्त: 🌅 18:07
चन्द्रोदय: 🌝 02:28
चन्द्रास्त: 🌜15:24
अयन 🌕 दक्षिणायने (दक्षिणगोलीय)
ऋतु: ❄️ शरद
शक सम्वत: 👉 1942
विक्रम सम्वत: 👉 2077
मास 👉 आश्विन (अधिक)
पक्ष 👉 कृष्ण
तिथि👉 दशमी 16:38 तक
नक्षत्र 👉 आश्लेषा 00:30 तक
योग 👉 साध्य 20:38 तक
करण 👉 विष्टि 16:38 तक
बव 03:43 तक
अभिजित मुहूर्त 👉 12:00-12:45
राहुकाल 👉 08:05-09:31
दिशाशूल 👉 पूर्व
सूर्य 🌟 कन्या
चंद्र 🌟 कर्क
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☄चौघड़िया विचार☄
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॥ दिन का चौघड़िया ॥
१ – अमृत =06:39-08:05
२ – काल =08:05-09:39
३ – शुभ =09:39-10:57
४ – रोग =10:57-12:23
५ – उद्वेग =12:23-01:39
६ – चर =01:39-03:15
७ – लाभ =03:15-04:41
८ – अमृत =04:41-18:07
॥रात्रि का चौघड़िया॥
१ – चर =18:07-07:41
२ – रोग =07:41-09:15
३ – काल =09:15-10:49
४ – लाभ =10:49-12:23
५ – उद्वेग =12:23-01:57
६ – शुभ =01:57-03:31
७ – अमृत =03:31-05:06
८ – चर =05:06-06:40
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शुभ यात्रा दिशा
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उत्तर-पूर्व (दर्पण देखकर अथवा खीर का सेवन कर यात्रा करें)
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तिथि विशेष
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भद्रावास मृत्युलोक में 16:38 तक आदि।
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उदय लग्न मुहूर्त
कन्या 04:25 से 06:43
तुला 06:43 से 09:04
वृश्चिक 09:04 से 11:23
धनु 11:23 से 13:27
मकर 13:27 से 15:08
कुम्भ 15:08 से 16:34
मीन 16:34 से 17:57
मेष 17:57 से 19:31
वृषभ 19:31 से 21:26
मिथुन 21:26 से 23:41
कर्क 23:41 से 02:02
सिंह 02:02 से 04:21
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• सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष में शान्ति मिलती है
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है ।
(पंडित विष्णुदत्त शास्त्री)



