May 21, 2026
9-nov

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 9 नवंबर 2024। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 09 – Nov – 2024
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि अष्टमी 10:47 PM
🔅 नक्षत्र श्रवण 11:48 AM
🔅 करण :
विष्टि 11:27 AM
बव 11:27 AM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग वृद्धि +04:22 AM
🔅 वार शनिवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:51 AM
🔅 चन्द्रोदय 01:28 PM
🔅 चन्द्र राशि मकर
🔅 चन्द्र वास दक्षिण
🔅 सूर्यास्त 05:43 PM
🔅 चन्द्रास्त +00:32 AM
🔅 ऋतु हेमंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1946 क्रोधी
🔅 कलि सम्वत 5126
🔅 दिन काल 10:52 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2081
🔅 मास अमांत कार्तिक
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 11:55:56 – 12:39:27
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 06:51 AM – 07:34 AM
🔅 कंटक 11:55 AM – 12:39 PM
🔅 यमघण्ट 02:49 PM – 03:33 PM
🔅 राहु काल 09:34 AM – 10:56 AM
🔅 कुलिक 07:34 AM – 08:18 AM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 01:22 PM – 02:06 PM
🔅 यमगण्ड 01:39 PM – 03:00 PM
🔅 गुलिक काल 06:51 AM – 08:12 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅काल 06:51:24 – 08:12:59
🔅शुभ 08:12:59 – 09:34:33
🔅रोग 09:34:33 – 10:56:07
🔅उद्वेग 10:56:07 – 12:17:42
🔅चल 12:17:42 – 13:39:16
🔅लाभ 13:39:16 – 15:00:50
🔅अमृत 15:00:50 – 16:22:24
🔅काल 16:22:24 – 17:43:59
🔅लाभ 17:43:59 – 19:22:30
🔅उद्वेग 19:22:30 – 21:01:01
🔅शुभ 21:01:01 – 22:39:33
🔅अमृत 22:39:33 – 24:18:04
🔅चल 24:18:04 – 25:56:35
🔅रोग 25:56:35 – 27:35:07
🔅काल 27:35:07 – 29:13:38
🔅लाभ 29:13:38 – 30:52:09

❄️ लग्न तालिका ❄️

🔅 तुला चर
शुरू: 05:08 AM समाप्त: 07:27 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 07:27 AM समाप्त: 09:46 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 09:46 AM समाप्त: 11:50 AM

🔅 मकर चर
शुरू: 11:50 AM समाप्त: 01:33 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 01:33 PM समाप्त: 03:01 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 03:01 PM समाप्त: 04:27 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 04:27 PM समाप्त: 06:03 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 06:03 PM समाप्त: 07:59 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 07:59 PM समाप्त: 10:14 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 10:14 PM समाप्त: अगले दिन 00:34 AM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: अगले दिन 00:34 AM समाप्त: अगले दिन 02:52 AM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 02:52 AM समाप्त: अगले दिन 05:08 AM

🐂 गोपाष्टमी 🐂

कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है। यह त्योहार मथुरा, वृन्दावन तथा ब्रज के अन्य क्षेत्रों में विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

हिन्दु धर्म शास्त्रों के अनुसार, ब्रजवासियों को इन्द्र के प्रकोप से बचाने के लिये भगवान श्री कृष्ण जी ने गोवर्धन पूजा के दिन गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी ऊँगली पर उठा लिया था। लगातार सात दिनों तक वर्षा करने के पश्चात् इन्द्र देव ने गोपाष्टमी के दिन अपनी पराजय स्वीकार की थी

और 7 दिनों के बाद जिस दिन इंद्र देव ने अपनी पराजय स्वीकार की और श्री कृष्ण जी ने गोवर्धन पर्वत को वापस जमीन पर रख दिया था वह कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि थी उस दिन गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाता है ।

गोपाष्टमी पर गायों तथा उनके बछड़ों को सजाया जाता है तथा उनकी पूजा की जाती है, उन्हें अच्छे अच्छे पकवान / घी की रोटी खिलाई जाती है, फल अर्पण किए जाते है, हरा चारा, हरी सब्जी खिलाई जाती है ।

मान्यता है कि गोपाष्टमी के दिन गायों की पूजा, अर्चना करने, उन्हें भोजन कराने, फल, हरा चारा खिलाने से घोर से घोर संकट दूर होते है, कुंडली के अनिष्ट ग्रह शांत होते है, सोचे हुए कार्य पूरे होते है, शुभ समय आने लगता है, निश्चय ही समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है ।

गोपाष्टमी के दिन गायों की सेवा करने वाले व्यक्ति पर भगवान श्री कृष्ण जी की विशेष कृपा होती है ।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026