May 21, 2026
23-nov

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 22 नवंबर 2024। 

🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 23 – Nov – 2024
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि अष्टमी 08:00 PM
🔅 नक्षत्र मघा 07:28 PM
🔅 करण कौलव 08:00 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग एन्द्र 11:40 AM
🔅 वार शनिवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 07:02 AM
🔅 चन्द्रोदय +00:51 AM
🔅 चन्द्र राशि सिंह
🔅 चन्द्र वास पूर्व
🔅 सूर्यास्त 05:38 PM
🔅 चन्द्रास्त 01:18 PM
🔅 ऋतु हेमंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1946 क्रोधी
🔅 कलि सम्वत 5126
🔅 दिन काल 10:36 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2081
🔅 मास अमांत कार्तिक
🔅 मास पूर्णिमांत मार्गशीर्ष

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 11:59:12 – 12:41:37
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 07:02 AM – 07:44 AM
🔅 कंटक 11:59 AM – 12:41 PM
🔅 यमघण्ट 02:48 PM – 03:31 PM
🔅 राहु काल 09:41 AM – 11:00 AM
🔅 कुलिक 07:44 AM – 08:27 AM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 01:24 PM – 02:06 PM
🔅 यमगण्ड 01:39 PM – 02:59 PM
🔅 गुलिक काल 07:02 AM – 08:21 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅काल 07:02:16 – 08:21:48
🔅शुभ 08:21:48 – 09:41:20
🔅रोग 09:41:20 – 11:00:52
🔅उद्वेग 11:00:52 – 12:20:24
🔅चल 12:20:24 – 13:39:56
🔅लाभ 13:39:56 – 14:59:28
🔅अमृत 14:59:28 – 16:19:00
🔅काल 16:19:00 – 17:38:32
🔅लाभ 17:38:32 – 19:19:06
🔅उद्वेग 19:19:06 – 20:59:40
🔅शुभ 20:59:40 – 22:40:14
🔅अमृत 22:40:14 – 24:20:48
🔅चल 24:20:48 – 26:01:22
🔅रोग 26:01:22 – 27:41:56
🔅काल 27:41:56 – 29:22:30
🔅लाभ 29:22:30 – 31:03:03

❄️ लग्न तालिका ❄️

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 06:32 AM समाप्त: 08:51 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 08:51 AM समाप्त: 10:55 AM

🔅 मकर चर
शुरू: 10:55 AM समाप्त: 12:38 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 12:38 PM समाप्त: 02:06 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 02:06 PM समाप्त: 03:32 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 03:32 PM समाप्त: 05:08 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 05:08 PM समाप्त: 07:04 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 07:04 PM समाप्त: 09:19 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 09:19 PM समाप्त: 11:39 PM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 11:39 PM समाप्त: अगले दिन 01:56 AM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 01:56 AM समाप्त: अगले दिन 04:12 AM

🔅 तुला चर
शुरू: अगले दिन 04:12 AM समाप्त: अगले दिन 06:32 AM

।। आज का दिन मंगलमय हो ।।

शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।

शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पढने और गायत्री मन्त्र की एक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।

शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।

💐 काल भैरवाष्टमी 💐

भैरव नाथ का अवतरण मार्गशीर्ष मास की कृष्णपक्ष अष्टमी को एक दिव्य ज्योतिर्लिंग से हुआ है, वह दिन भैरव अष्टमी / भैरव जयंती के रूप में मनाया जाता है। भैरव शिव के पांचवे रूद्र अवतार माने गए है ।

भैरव जयंती पर रात्रि का विशेष महत्त्व होता है
मान्यता है कि इसी दिन मध्याह्न के समय भैरव नाथ की भगवान शंकर के अंश से भैरव रूप में उत्पत्ति हुई थी।

माना जाता है कि भगवान शंकर ने इसी मार्गशीर्ष की अष्टमी को भैरव रूप में ब्रह्मा जी के अहंकार को नष्ट किया था, इसलिए इस दिन को भैरव अष्टमी व्रत के रूप में मनाते है। भैरव अष्टमी ‘काल’ का स्मरण कराती है, इसलिए मृत्यु के भय के दूर करने के लिए लोग इस दिन कालभैरव की उपासना करते हैं

कालान्तर में धीरे धीरे भैरव-उपासना की दो शाखाएं- बटुक भैरव तथा काल भैरव के रूप में प्रसिद्ध हुईं। जहां बटुक भैरव सौम्य स्वरूप में अपने भक्तों को अभय देने वाले हैं वहीं काल भैरव आपराधिक प्रवृत्तियों पर अंकुश करने वाले दंडनायक के रूप में जाने जाते है।

भैरव जयंती के दिन भगवान भैरो नाथ के मंत्रो का अधिक से अधिक जाप करें

‘ॐ कालभैरवाय नम:।’

भैरव अष्टमी, के दिन भैरव मंदिर में जाकर भैरव जी की मूर्ति के आगे तेल का दीपक प्रज्वलित करें। इसके बाद उन्हें गुलाब जामुन, इमरती, उड़द के बड़े या नमकीन भोग लगाएं। इस उपाय को करने से भैरव नाथ अपने भक्तो के सभी संकटो का तत्काल ही निवारण कर देते है।
स्वान अर्थात काला कुत्ता भैरव जी की सवारी है अत: इसदिन भैरव अष्टमी के दिन इसे प्रसन्न अवश्य ही करें।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026