May 20, 2026
000000000000000

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 21 दिसंबर 2024। कालूबास के नेहरू पार्क में आयोजित भागवत कथा में शनिवार को छठवें दिन शनिवार को स्वामी शिवेन्द्र स्वरूप महाराज ने “जाकि रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन्ह तैसी..” भजन सुनाते हुए कुब्जा उद्धार व उद्धव व गोपी संवाद का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने भगवान की प्राप्ति के लिए शुद्ध ह्रदय के महत्व बताया। महाराज ने रास लीला का वर्णन करते हुए रास को जीव का परमात्मा से मिलन बताया। भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए स्वामी जी ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणि के साथ संपन्न हुआ। उन्होंने रुक्मणि को स्वयं लक्ष्मी का अवतार बताते हुए धन को परमार्थ के कार्याें में लगाने की प्रेरणा दी। उन्होंने श्रीकृष्ण भगवान व रुक्मणि के अतिरिक्त अन्य विवाहों का भी वर्णन किया और अनेक अनेक उद्धारक कथाओं का वर्णन करते हुए भगवान को कृपा करने वाले व दयालु बताया। यहां रूक्मणि कृष्ण विवाह की सुंदर झांकी सजाई गई और श्रद्धालुओं ने लक्ष्मीनारायण के जयकारे लगाए। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए व कथा श्रवण का लाभ लिया।