May 19, 2026
30-dec

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 30 दिसंबर 2024। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 30 – Dec – 2024
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि अमावस्या +03:58 AM
🔅 नक्षत्र मूल 11:58 PM
🔅 करण :
चतुष्पाद 04:05 PM
नाग 04:05 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग वृद्धि 08:31 PM
🔅 वार सोमवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 07:25 AM
🔅 चन्द्रोदय चन्द्रोदय नहीं
🔅 चन्द्र राशि धनु
🔅 चन्द्र वास पूर्व
🔅 सूर्यास्त 05:48 PM
🔅 चन्द्रास्त 05:04 PM
🔅 ऋतु शिशिर

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1946 क्रोधी
🔅 कलि सम्वत 5126
🔅 दिन काल 10:23 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2081
🔅 मास अमांत मार्गशीर्ष
🔅 मास पूर्णिमांत पौष

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:16:00 – 12:57:34
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 12:57 PM – 01:39 PM
🔅 कंटक 09:29 AM – 10:11 AM
🔅 यमघण्ट 12:16 PM – 12:57 PM
🔅 राहु काल 08:43 AM – 10:00 AM
🔅 कुलिक 03:02 PM – 03:43 PM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 10:52 AM – 11:34 AM
🔅 यमगण्ड 11:18 AM – 12:36 PM
🔅 गुलिक काल 01:54 PM – 03:12 PM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅अमृत 07:25:08 – 08:43:03
🔅काल 08:43:03 – 10:00:58
🔅शुभ 10:00:58 – 11:18:52
🔅रोग 11:18:52 – 12:36:47
🔅उद्वेग 12:36:47 – 13:54:42
🔅चल 13:54:42 – 15:12:36
🔅लाभ 15:12:36 – 16:30:31
🔅अमृत 16:30:31 – 17:48:26
🔅चल 17:48:26 – 19:30:33
🔅रोग 19:30:33 – 21:12:41
🔅काल 21:12:41 – 22:54:48
🔅लाभ 22:54:48 – 24:36:56
🔅उद्वेग 24:36:56 – 26:19:04
🔅शुभ 26:19:04 – 28:01:11
🔅अमृत 28:01:11 – 29:43:19
🔅चल 29:43:19 – 31:25:26

❄️ लग्न तालिका ❄️
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 06:25 AM समाप्त: 08:30 AM

🔅 मकर चर
शुरू: 08:30 AM समाप्त: 10:12 AM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 10:12 AM समाप्त: 11:40 AM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 11:40 AM समाप्त: 01:06 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 01:06 PM समाप्त: 02:42 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 02:42 PM समाप्त: 04:38 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 04:38 PM समाप्त: 06:53 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 06:53 PM समाप्त: 09:13 PM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 09:13 PM समाप्त: 11:31 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 11:31 PM समाप्त: अगले दिन 01:47 AM

🔅 तुला चर
शुरू: अगले दिन 01:47 AM समाप्त: अगले दिन 04:06 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: अगले दिन 04:06 AM समाप्त: अगले दिन 06:25

🌺।। आज का दिन मंगलमय हो।।🌺

सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष का प्रभाव कम होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।

जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।

सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाय नमस्तुभ्यम्’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।

🌼 सोमवती अमावस्या 🌼

आज वर्ष 2024 की अंतिम अमावस्या, पौष माह की अमावस्या अति पुण्यदायक सोमवती अमावस्या है ।
इस दिन प्रात: काल पीपल की सेवा करने, मीठा जल से सींचने, पीपल की परिक्रमा करने से सहस्र गोदान का पुण्य फल प्राप्त होता है।
हिन्दु धर्म शास्त्रों में इसे अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत की भी संज्ञा दी गयी है। अश्वत्थ यानि पीपल वृक्ष। इस दिन पीपल कि सेवा,पूजा, परिक्रमा का अति विशेष महत्व है।
इस दिन विवाहित स्त्रियों द्वारा पीपल के वृक्ष की दूध, जल, पुष्प, अक्षत, चन्दन इत्यादि से पूजा और वृक्ष के चारों ओर १०८ बार धागा लपेट कर परिक्रमा करने का विधान होता है।और प्रत्येक परिक्रमा में कोई भी एक मिठाई, फल, मिश्री या मेवा चढ़ाने से विशेष लाभ होता है ।
सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के वृक्ष के चारों ओर यदि धागा ना लपेट पाएं तो भी पीपल की 108 परिक्रमा करने से जन्म जन्मान्तरों के पाप का नाश होता है, भाग्य प्रबल होता है ।
इस दिन जो स्त्री तुलसी व माता पार्वती पर सिन्दूर चढ़ाकर अपनी माँग में लगाती है वह अखण्ड सौभाग्यवती बनी रहती है ।
सोमवती अमावस्या की कथा का विशेष महत्व है, मान्यता है कि जो जातक सोमवती अमावस्या की कथा पढ़ता है उसका दाम्पत्य जीवन निश्चित ही सुखमय होता है, परिवार में प्रेम और सहयोग बना रहता है ।
सोमवती अमवास्या के दिन जो भी जातक धोबी, धोबन को भोजन कराता है, उनका सम्मान करता है, उन्हें दान दक्षिणा देता है, उसका दाम्पत्य जीवन लम्बा और सुखमय होता है उसके सभी मनोरथ अवश्य ही पूर्ण होते है ।
अमावस्या तिथि के स्वामी पितृ देव को माना गया है।
पीपल के पेड़ पर पितरों का वास माना गया है। अमावस्या के दिन सुबह के समय लोहे के बर्तन में, दूध, पानी, काले तिल, शहद एवं जौ मिला कर समस्त सामग्री पीपल की जड़ में अर्पित करके पीपल की 7 परिक्रमा करें, तथा इस दौरान “ॐ सर्व पितृ देवताभ्यो नमः” मंत्र का जाप भी लगातार करते रहें ।
इस उपाय को करने से पितृ प्रसन्न होते है, उनका आशीर्वाद मिलता है ।
अमावस्या तिथि को पितरों के तर्पण, दान के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है । इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करके भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देकर अपने पितरों की शांति के लिए उनका तर्पण करते हैं ।
आज पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए घर पर ब्राह्मण को भोजन कराएं एवं उसे यथा शक्ति दान – दक्षिणा प्रदान करें ।
अमावस्या के दिन घर पर खीर अवश्य बनायें फिर उसमें थोड़ी सी खीर दोने पर निकाल कर पित्रों के निमित पीपल पर रख आएं ।
हर अमावस्या को गहरे गड्ढे या कुएं में एक चम्मच दूध डालें इससे कार्यों में बाधाओं का निवारण होता है ।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026