May 21, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 11 जनवरी 2025। प्रभु श्रीराम की मूर्ति स्थापना का विराट महोत्सव देश भर में मनाया जा रहा है ऐसे में कुछ युवाओं ने मानवता का ऐसा उदाहरण पेश किया जिससे एक बुढ़ी माँ का ह्रदय सदा के लिए उनका ऋणी हो गया है। बांग्लादेश के सीमांत इलाके के एक गांव शंकरपुर, बालाघाट से 25 वर्षीय युवक मिठुन राव गत सोमवार शाम सरदारशहर रोड़ पर श्रीडूंगरगढ़ सीमा के निकटवर्ती गांव बंधनाऊ पहुंचा। यहां रोड पर स्थित उदरासर निवासी गोपीचंद धतरवाल की होटल पर आया। युवक की स्थिति दयनीय थी और उसने गोपीचंद से दो रोटी मांगी। गोपीचंद ने उसे पेटभर भोजन करवाया और रात को वहीं सुला लिया। सुबह गोपीचंद ने गांव के सामाजिक कार्यकर्ता परमेश्वर चौधरी को जानकारी दी और युवक की मदद करने का आग्रह किया। चौधरी सहित रमेश, मामराज, सरदाराराम, राकेश, श्याम, नंदलाल पूनियां, दौतलराम, मुकेश व कानाराम की टोली इस प्रयास में सक्रिय हो गई। इन्होंने मिठुन से उसके गांव व विधानसभा क्षेत्र की जानकारी ली। युवक ने बताया कि किसी ने उसका फोन छीन लिया। वह 8 माह से लगातार पैदल चल रहा है। मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण वह किसी से ज्यादा बातचीत नहीं कर सका। टोली ने गुगल मैप पर उसके गांव की तलाश की, मैप पर वहां शो हो रहें बैनरों को देखकर करीब 200 नबंर एकत्र किए। युवकों ने एक के बाद एक नबंर पर फोन करना शुरू किया। परंतु किसी ने ठीक से जवाब नहीं दिया। चौधरी ने बताया कि बुधवार तक वे लोग फोन कर करके नाउम्मीद हो गए। उन्हें लगा युवक का परिवार नहीं मिलेगा। तभी बुधवार दोपहर 2.30 बजे उस गांव के निकट स्थित इंडियन ऑइल के पेट्रोल पंप के कार्मिक से बातचीत हुई। बातचीत कुछ सकारात्मक लगी। रात करीब 9.30 बजे उसी कार्मिक का दुबारा फोन आया कि वह युवक के घर खड़ा है और उसकी माँ से बात करवा रहा है। ऐसे में भाषा बाधक बन गई, मिठुन की माँ हिंदी नहीं जानती थी। चौधरी उसी समय रात को ही होटल पर पहुंचे और युवक की उसकी माँ से वीडियो कॉल पर बात करवाई। माँ ने दो साल से खोए हुए बेटे के मिलने की उम्मीद ही छोड़ दी थी ऐसे में जब उसे वीडियो कॉल पर देखा तो उसकी आंखो से आंसूओं की धारा बह निकली। वह बात ही नहीं कर पाई और खूब रोई, पास खड़े युवक के भाई ने बात की। भाई ने कहा वे मिठुन को लिवाने रवाना हो रहें है। मिठुन का भाई शुक्रवार को बादनूं पहुंचा। उसने बताया घर की आर्थिक स्थिति खराब है और वह यहां तक आने का किराया भी मुश्किल से जुटा पाया। टोली के सदस्यों ने रात को उन्हें भोजन करवाया और वहीं रोका। मिठुन को नए कपड़े दिलवाए व आपसी सहयोग से 11,150 रूपए एकत्र कर किराया देते हुए दोनों भाईयों को शनिवार सुबह गांव से विदा किया। दोनों भाईयों व उनकी माता ने इस युवा टोली को झोली भर भर दुआएं दी, उन्होंने राजस्थान के लोगों को दुनिया में सबसे अच्छा होने की बात कही। उन्होंने कहा कि वे लौट कर मजदूरी के लिए यहीं आएंगे। गांव भर में टोली के इस कार्य की चर्चा रही वहीं लोगों ने सोशल मीडिया के सकारात्मक उपयोग की सराहना भी की। बुजुर्ग ग्रामीणों ने कहा ऐसी घटनाएं आदमी का आदमी के प्रति विश्वास को बढ़ाने के साथ समाज के लिए प्रेरणीय है।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गांव के युवाओं ने मिठुन को मिलवाया परिजनों से, खूब की मनुहार, युवक के परिजनों ने दी दुआएं, क्षेत्र भर में हो रही सराहना।