






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 29 मार्च 2025। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 29-Mar-2025
☀ Sri Dungargarh, India
🔅 तिथि अमावस्या 04:29 PM
🔅 नक्षत्र उत्तराभाद्रपद 07:27 PM
🔅 करण नाग, किन्स्तुघ्ना 04:29 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग ब्रह्म 10:02 PM
🔅 वार शनिवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:28 AM
🔅 चन्द्रोदय चन्द्रोदय नहीं
🔅 चन्द्र राशि मीन
🔅 चन्द्र वास उत्तर
🔅 सूर्यास्त 06:49 PM
🔅 चन्द्रास्त 06:52 PM
🔅 ऋतु वसंत
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1946 क्रोधी
🔅 काली सम्वत 5125
🔅 दिन काल 12:21:28
🔅 विक्रम सम्वत 2082
🔅 मास अमांत फाल्गुन
🔅 मास पूर्णिमांत चैत्र
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 12:14 PM 01:03 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 06:28 AM 07:17 AM
🔅 कंटक 12:14 PM 01:03 PM
🔅 यमघण्ट 03:32 PM 04:21 PM
🔅 राहु काल 09:33 AM 11:06 AM
🔅 कुलिक 07:17 AM 08:07 AM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 01:53 PM 02:42 PM
🔅 यमगण्ड 02:11 PM 03:44 PM
🔅 गुलिक काल 06:28 AM 08:01 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर, मीन
📜 चोघडिया 📜
🔅 काल 06:27 AM – 08:00 AM
🔅 शुभ 08:00 AM – 09:33 AM
🔅 रोग 09:33 AM – 11:05 AM
🔅 उद्वेग 11:05 AM – 12:38 PM
🔅 चल 12:38 PM – 02:11 PM
🔅 लाभ 02:11 PM – 03:44 PM
🔅 अमृत 03:44 PM – 05:17 PM
🔅 काल 05:17 PM – 06:50 PM
🔅 लाभ 06:50 PM – 08:17 PM
🔅 उद्वेग 08:17 PM – 09:44 PM
🔅 शुभ 09:44 PM – 11:11 PM
🔅 अमृत 11:11 PM – 00:38 AM
🔅 चल 00:38 AM – 02:05 AM
🔅 रोग 02:05 AM – 03:33 AM
🔅 काल 03:33 AM – 05:00 AM
🔅 लाभ 05:00 AM – 06:27 AM
📜 लग्न तालिका 📜
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 05:50 AM समाप्त: 07:15 AM
🔅 मेष चर
शुरू: 07:15 AM समाप्त: 08:51 AM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 08:51 AM समाप्त: 10:47 AM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 10:47 AM समाप्त: 01:02 PM
🔅 कर्क चर
शुरू: 01:02 PM समाप्त: 03:23 PM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 03:23 PM समाप्त: 05:40 PM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 05:40 PM समाप्त: 07:56 PM
🔅 तुला चर
शुरू: 07:56 PM समाप्त: 10:15 PM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 10:15 PM समाप्त: 00:34 AM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 00:34 AM समाप्त: 02:38 AM
🔅 मकर चर
शुरू: 02:38 AM समाप्त: 04:21 AM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 04:21 AM समाप्त: 05:50 AM
।। आज का दिन मंगलमय हो ।।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पढने और गायत्री मन्त्र की एक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
अमावस्या तिथि को पितरों के तर्पण, दान के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है । इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करके भगवान सूर्यदेव को अर्घ्य देकर अपने पितरों की शांति के लिए उनका तर्पण करते हैं ।
आज पितरों की कृपा प्राप्त करने के लिए घर पर ब्राह्मण को भोजन कराएं एवं उसे यथा शक्ति दान – दक्षिणा प्रदान करें ।
अमावस्या के दिन घर पर खीर अवश्य बनायें फिर उसमें थोड़ी सी खीर दोने पर निकाल कर पित्रों के निमित पीपल पर रख आएं ।
हर अमावस्या को गहरे गड्ढे या कुएं में एक चम्मच दूध डालें इससे कार्यों में बाधाओं का निवारण होता है ।
इसके अतिरिक्त अमावस्या को आजीवन जौ दूध में धोकर बहाएं, आपका भाग्य सदैव आपका साथ देगा ।
अमावस्या पर तुलसी के पत्ते या बिल्व पत्र बिलकुल भी नहीं तोडऩा चाहिए। अमावस्या पर देवी-देवताओं को तुलसी के पत्ते और शिवलिंग पर बिल्व पत्र चढ़ाने के लिए उन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
8290814026



