






सांप भी मरे और लाठी भी ना टूटे
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। ग्राम पंचायतों व पंचायत समितियों के गठन के प्रस्तावों का प्रकाशन हो गया है और 6 मई 2025 तक इन प्रस्तावों पर आपत्ति प्रशासन को दर्ज करवाई जा सकती है। कोई भी व्यक्ति अपनी आपत्ति उपखंड अधिकारी, तहसीलदार या जिला कलेक्टर कार्यालय में दर्ज करवा सकता है। अब कहने को तो कई ऐसी आपत्तियां प्रशासन के समक्ष दर्ज होगी लेकिन प्रकाशित किए गए प्रारूप में पहले से ही ऐसे खांचे दिख रहे है जिन्हें केवल आपत्तियों के लिए रखा गया है। अनकही अनसुनी यह है कि नए प्रारूप में कुछ खांचे जानबूझ के रखे गए है ताकि जब अधिक आपत्तियां आएं तो आई हुई आपत्तियों में से संभव हो सके उतनी मान लिए जाने की खानापूर्ती भी हो जाए और चाहा गया समीकरण भी सेट हो जाए। इसे ही तो कहते है कि सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे।
विरोधी खेमे की गुटबाजी को दी हवा, दावेदारों में मचेगी होड़।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। अगले विधानसभा चुनावों के लिए वर्तमान विपक्षी खेमे में खासा उत्साह दिख रहा है एवं कई नेता अभी से ही टिकट की प्रतियोगिता में अपना खासा दम खम दिखा रहे है। ऐसे में पहले से ही चल रही गुटबाजी को यह परिसीमन और अधिक हवा देगा। नई बनी पंचायत समिति रीड़ी में शामिल की गई पंचायतों को देखा जाए तो कांग्रेस में टिकट के दावेदारी कर रहे पूर्व विधायक मंगलाराम गोदारा सहित, हरिराम बाना, हेतराम जाखड़, श्रीराम भादू, मूलाराम भादू आदि सभी के पैतृक गांव इनमें आ गए है एवं माकपा के गिरधारीलाल महिया के पैतृक गांव को भी इसी पंचायत समिति में रखा गया है। ऐसे में इन नेताओं के बीच विधानसभा चुनावों से पहले प्रधानी की दौड़ भी लगनी तय मानी जा रही है। अब अनकही अनसुनी बात यह है कि इस पंचायत समिति में आने वाली पंचायतों का आंकड़ा देखा जाए तो ओवरऑल कांग्रेस के पक्ष के मतदाताओं का आंकड़ा अधिक है। लेकिन कम मतदाताओं के बाद भी रीड़ी पंचायत समिति में वर्तमान विपक्षी नेताओं की आपसी टक्कर से सत्ता पक्ष फायदे की उम्मीद के सपने देखे हुए है।
सत्ता पक्ष के लिए सेफ मानी जा रही सीट में विपक्ष के नए नेता के लिए होगी खासी संभावनाएं।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। इस परिसीमन में श्रीडूंगरगढ़ की उत्तरी पूर्वी ग्राम पंचायतें जिनके मतदाताओं का आंकड़ा देखें तो यह सीट सत्ता पक्ष के लिए सुरक्षित मानी जा रही है। इन ग्राम पंचायतों में भगवा विचारधारा का प्रभाव भी है और विपक्ष का कोई बड़ा नेता भी इस ओर नहीं रहा है। ऐसे में अब श्रीडूंगरगढ़ पंचायत समिति क्षेत्र में विपक्ष की अगुवाई करने वाला वर्तमान ब्लॉक अध्यक्ष एक ही नेता बचा है। वैसे भी पिछले लंबे समय से खरी-खरी कहने वाले विपक्षी ब्लॉक अध्यक्ष के युवा पुत्र खासे सक्रिय है। ऐसे में विपक्षी खेमे में नए नेता के लिए खासी संभावनाएं होगी। उन्हें संघर्ष भी सीधा सीधा सत्ताधारी पार्टी के साथ ही करना होगा। ऐसे में अनकही अनसुनी यह है कि रीड़ी पंचायत समिति में जहां वर्तमान विपक्ष पार्टी को ताकतवर होने के बाद भी आपसी टकराव में दिक्कतें आनी तय है वहीं श्रीडूंगरगढ़ पंचायत समिति में नए युवा नेता को अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए खुला मैदान मिल गया है। लेकिन दोनो ही स्थितियों में लाभ में तो सत्ताधारियों का पलड़ा ही भारी रहने के कयास प्रबल है।
नहीं मिला हक, उठेगें विरोध के स्वर।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। क्षेत्र में भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए अमृतवासी को ग्राम पंचायत बनाया जाना चाहिए था। अमृतवासी से करीब 10 किलोमीटर तक कोई गांव नहीं होने के कारण यहां के ग्रामीण इस पर आपत्ति दर्ज करवाएंगे। प्रस्तावों के प्रकाशन के साथ ही ग्रामीणों में विरोध के स्वर मुखर होने लगे और वे बुधवार को उपखंड कार्यालय पहुंचकर ग्राम पंचायत के गठन का हक दिए जाने की मांग करेंगे। विदित रहें नियमों के तहत अमृतवासी का गठन होना भी जायज ही है। लेकिन अनकही अनसुनी यह है कि इस गांव में इन दिनों नेतृत्व की कमी देखने को मिल रही है। यहां के निवासी दमखम वाले पूर्व सरपंच के देहांत के बाद अभी कोई आगे नहीं आ पाया है और यह विरोध कम से कम से गांव को नया नेतृत्व तो दे ही देगा।
अंगूठे के नीचे रखने की जंग यहां भी जारी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गत विधानसभा चुनावों में चूरू को सीकर संभाग में शामिल कर अंगूठे के नीचे रखने की जंग राजनीतिक हलकों में खासी जोरों पर थी। लेकिन क्षेत्र की ग्राम पंचायत जोधासर में भी अब अंगूठे के नीचे रखने की जोर आजमाईश हो रही है। यहां ग्राम पंचायत मुख्यालय होने के बाद भी जोधासर की सत्ता पंचायत के गांव झंझेऊ के हाथों में है। ऐसे में इस परिसिमन में जोधासर के ग्रामीणों ने झंझेऊ को बड़ा गांव होने के कारण अलग से ग्राम पंचायत बनाए जाने का समर्थन किया। नियमों के अनुसार ये बनना तय था परंतु झंझेऊ के रसूखदार कुछ लोगों ने राज पर प्रभाव डाला और वे जोधासर पंचायत में ही रखे जाने के पक्षधर थे। आखिरकार प्रस्तावों में उनकी सिफारिश को माना गया और झंझेऊ को ग्राम पंचायत नहीं बनाया गया है। अनकही अनसुनी बात यह है कि झंझेऊ के रसूखदारों ने इसे अपनी मूंछ का ताव बना लिया है एवं मसला अब अपने साथ रख कर राज करने का अधिक है।
हेमगढ़ को मिला सत्ता के साथ का प्रतिफल।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। क्षेत्र में ब्राहम्ण बाहुल्य एक ही गांव है हेमासर, इस कारण इसे हेमगढ़ भी सोशल मीडिया पर कहा जाता है और इस बार सत्ता के साथ एकजुटता के साथ यह गांव गया था। ऐसे में इस गांव के बिन मांगें मोती मिलने वाली बात परिसीमन में सामने आई है। हेमासर ने ग्राम पंचायत बनाए जाने की मांग नहीं की परंतु राज का साथ देने के प्रतिफल में हेमासर को नई ग्राम पंचायत बनाया गया। लेकिन हेमासर को प्रतिफल देने के चक्कर में सालासर के ग्रामीणों को पीसना पड़ गया। नवगठित पंचायत में हेमासर की 1110 व सालासर की 764 जनसंख्या को साथ मिला कर ग्राम पंचायत का गठन कर दिया गया है। लेकिन सालासर की सीमा हेमासर के नहीं लगती और हेमासर जाने के लिए सालासर के ग्रामीणों को श्रीडूंगरगढ़ होकर जाना होगा जो की इन ग्रामीणों के लिए काफी समय व धन के दुरूपयोग वाला साबित होगा।
संघर्ष बलिदान मांगता है, चार विरोधियों के साथ एक अपने का भी त्याग।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। रीड़ी पंचायत समिति क्षेत्र में विपक्षी नेताओं में आपसी टकराव को बढ़ना तय माना जा रहा है एवं इस टकराव में पूर्व विधायक को भी शामिल होने के लिए मजबुर परिसीमन ने कर दिया है। लाल झंडे वाले पूर्व विधायक के प्रभाव वाले पांच बास सूडसर, दुलचासर, टेऊ, गोपालसर, देराजसर को रीड़ी में शामिल किया गया है। हालांकि इन ग्राम पंचायतों से रीड़ी आने जाने का कोई सीधा मार्ग भी नहीं है। ये श्रीडूंगरगढ़ होकर ही रीड़ी पहुंचेगे। अब अनकही अनसुनी बात यह है कि इन पांच गांवों में से 4 गांव तो वर्तमान सत्तापक्ष के विरोधी मतदाताओं की बहुलता वाले गांव है वहीं इनके साथ सत्ता पक्ष का साथ देने वाले एक गांव का बलिदान भी दे दिया गया है। अब सत्ता का संघर्ष है बलिदान तो मांगता ही है।
चिट और पट दोनों राज की।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। रीड़ी पंचायत समिति क्षेत्र को विपक्षी पार्टी के प्रभाव वाला क्षेत्र माना गया है एवं इस पंचायत समिति क्षेत्र में सत्ता पक्ष को स्वयं की ताकत से कहीं अधिक भरोसा विपक्ष के भीतरघात पर भरोसा है। लेकिन अगर ऐसा नहीं भी होता है और विपक्षी पार्टी आपसी गुटबाजी को मैनेज कर लेती है तो भी वर्तमान सत्ता पक्ष की सेहत पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। अब अनकही अनसुनी यह है कि इस पंचायत समिति क्षेत्र में श्रीडूंगरगढ़ के समीप के गांव पुदंलसर को शामिल करना संभावित हार का ठिकरा फोड़ने का ठिकाना ढूंढना है। इस गांव के बड़े नेता की कारसेवा तो सत्ता पक्ष के जिलाध्यक्ष चुनावों में भी सत्ताधारियों द्वारा की गई थी और अब आगामी चुनावों में इस बड़े नेता को अपने गृह क्षेत्र में संभावित नुकसान की जिम्मेदारी भी उठानी ही पड़ेगी। इनके साथ ही इंदपालसर वाले किसान कौम के किसान नेता को भी आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अपने गृह क्षेत्र में पार्टी को मजबूत दिखाने के लिए खासी जोर आजमाईश करनी पड़ेगी।




