






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 15 मई 2025। गांव में जीएसएस के निर्माण को लेकर उपजे विवाद में ग्राम पंचायत क्षेत्र के हजारों ग्रामीण अपने जनप्रतिनिधि और प्रशासन के बीच हुए गतिरोध की सजा भुगत रहें है। मामला ग्राम पंचायत ठुकरियासर का है, यहां सरपंच द्वारा प्रशासन व पंचायती राज विभाग की नाराजगी मोल लेने की कठोर सजा ग्रामीण भुगत रहें है। सरपंच व प्रशासन के बीच करीब 8 माह पूर्व जीएसएस निर्माण के स्थान को लेकर विवाद गहराया और थाने कचहरी तक पहुंच गया। आज भी ग्रामीण इस विवाद की सजा सी काट रहें है। ग्राम पंचायत के सभी खाते विभाग ने सीज कर रखे है और गत 8 माह से गांव में एक भी काम नहीं हो रहा है। गांव में सफाई व्यवस्था ठप्प पड़ी है। ट्यूबवेल खराब होने पर ठीक नहीं करवाई जाती तो ग्रामीण आपस में चंदा कर ट्यूबवेल ठीक करवाने का भुगतान करते है। फार्मर आईडी के शिविरों के लिए आए खर्च का भुगतान भी नहीं हुआ है। पूर्व में पंचायत द्वारा करवाए कार्यों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। जिससे इन कार्यों में काम करने लोग भी परेशान है। सरपंच अमराराम गांधी ने बताया कि गांव में दिखणादा बास में 20 दिन से ट्यूबवेल खराब पड़ा है। जिसके लिए ग्रामीण प्यासे है, वे ग्रामीणों की इस परेशानी के समाधान की प्रशासन से गुहार लगाकर थक गए है। गांधी ने बताया कि इसी को लेकर बुधवार सुबह सीओ को फोन किया और मांग की गई कि कम से कम बकाया भुगतान तो करवा दिए जाए जिससे लोग परेशान ना हो। गांव के हालातों को देखते हुए यह स्थिति मौत से बदतर बताते हुए इन हालातों से मौत भली की बात ही कही थी। लेकिन इसके बदले में भी प्रशासन ने उन्हें शांतिभंग के आरोप में गिरफ्तार करवा दिया। जनता द्वारा निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ यह व्यवहार लोकतंत्र की हत्या है।
सरपंच ने लगाए आरोप, जनमत की है अवहेलना।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सरपंच अमराराम गांधी ने कहा कि अधिकारियों के सामने जनप्रतिनिधि की सुनवाई नहीं हो रही तो आम जनता का हाल क्या होगा इसकी कल्पना की जा सकती है। गांव में जीएसएस निर्माण के लिए भूमि का नियमानुसार ग्राम पंचायत में प्रस्ताव लेकर भेजा गया। जिसकी एनओसी भी जारी कर दी गई, उसके ओके होने के बाद विभाग को जाने क्या सूझा। पूरा गांव एकमत है कि जीएसएस पंचायत द्वारा सुझाए स्थान पर बने क्योंकि वो सड़क के किनारे स्थित है और उपयुक्त है। परंतु गांव का एक गुट जिसने पंचायत की कीमती भूमि पर अतिक्रमण कर रखा ने रोड़ा अटकाया है। इसी के चलते विवाद हुआ और अधिकारियों ने परेशान कर लिया है। गांधी ने कहा कि जीएसएस निर्माण को लेकर गांव में मतदान करवा लिया जाए जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाए। प्रशासन की तानाशाही तो खत्म हो और जनहित में तो काम हो सकें। गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा जानबूझकर जनमत की अवहेलना की गई है और जनप्रतिनिधि को प्रताड़ित करने का काम किया जा रहा है।
“मामले से स्थानीय कांग्रेस में भी आक्रोश है। इस राज में जनता की सुनवाई नहीं हो रही है। सरपंच को कांग्रेस पृष्ठभूमि का होने के कारण प्रताड़ित किया जा रहा है। जनप्रतिनिधि ने स्थानीय प्रशासन से परेशान होकर जिला परिषद के उच्चाधिकारी को फोन किया। उन्होंने भी सरपंच को गिरफ्तार करवा दिया। जनता की समस्याओं को देखकर सरपंच दुःखी और क्षुब्ध होकर गुहार लगा रहें है। ये निर्वाचित प्रतिनिधि के साथ अमानवीय व्यवहार है। इसे लोकतंत्र की हत्या कहेंगे। कांग्रेस प्रदेश स्तर पर मामले को ले जाएगी।”
— हरिराम बाना क्षेत्रीय कांग्रेसी नेता व कांग्रेस पीसीसी सदस्य।




