






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 5 अगस्त 2025। भारत के राष्ट्रपति द्वारा स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर आयोजित ‘एट होम’ कार्यक्रम हेतु चक 12 टी के निवासी, डूंगर कॉलेज बीकानेर में पदस्थापित पर्यावरणविद्, शिक्षक और ‘पारिवारिक वानिकी’ आंदोलन के प्रणेता प्रोफेसर श्याम सुंदर ज्याणी को आमंत्रित किया गया है। यह गरिमामय आयोजन 15 अगस्त 2025 को राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली में संपन्न होगा। जिसमें स्वतंत्रता दिवस समारोह के मुख्य अतिथि, भारत की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रिमंडल, तीनो सेनाओं के अध्यक्ष, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश, विदेशी राजदूत शामिल होंगे। प्रो. ज्याणी ने शिक्षा को समाज और पर्यावरण से जोड़ते हुए वृक्षों को परिवार का हिस्सा मानने की सांस्कृतिक अवधारणा से एक जन आंदोलन खड़ा किया है। उनके नेतृत्व में ‘पारिवारिक वानिकी ’ अवधारणा के माध्यम से न केवल राजस्थान बल्कि भारत और विदेशों में भी लाखों परिवारों और संस्थानों ने वृक्षारोपण को अपनाया है। उनके प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र द्वारा भूमि संरक्षण के सर्वोच्च सम्मान ‘लैंड फॉर लाइफ अवॉर्ड’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर के प्राचार्य प्रो. राजेन्द्र पुरोहित ने इस गौरवपूर्ण आमंत्रण पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि “प्रो. ज्याणी का राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित होना न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का सम्मान है, बल्कि हमारे महाविद्यालय और पूरे बीकानेर क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। उनके कार्यों से आज वैश्विक मंचों पर भी हमारे महाविद्यालय की पहचान बनी है।” वरिष्ठ संकाय सदस्य एवं फैमिलियल फॉरेस्ट्री डिवीजन के संयोजक प्रो. विक्रमजीत ने कहा “प्रो. ज्याणी द्वारा प्रारंभ की गई पारिवारिक वृक्षारोपण की यह अवधारणा आज एक वैश्विक उदाहरण बन चुकी है। यह आमंत्रण उसी सतत परिश्रम और समर्पण का प्रतिफल है। हम सभी उनके साथ खड़े हैं और इस उपलब्धि पर गर्वित हैं।” प्रो. श्याम सुंदर ज्याणी ने इस अवसर पर कहा कि “यह आमंत्रण केवल मेरा नहीं है, यह उन सभी लोगों का सम्मान है जिन्होंने धरती को माता और वृक्षों को परिजन मानते हुए उन्हें सहेजा है। यह अवसर हमें स्मरण कराता है कि यदि हम प्रकृति से जुड़ें तो राष्ट्र भी मजबूत होता है।” ज्याणी के पिता सेवानिवृत्त निरीक्षक के. आर. ज्याणी ने कहा कि “बचपन से ही श्याम में समाज और प्रकृति के लिए कुछ करने की भावना थी। आज भारत की माननीय राष्ट्रपति द्वारा उन्हें ऐट होम के लिए आमंत्रित करना हमारे पूरे परिवार के लिए गौरव और संतोष का विषय है।”
पत्नी कविता ज्याणी ने कहा कि “जीवनसाथी व पारिवारिक वानिकी मुहिम में एक सहयोगी के रूप में मैंने देखा है कि ज्याणी जी किस समर्पण से इस कार्य को जीवन का मिशन बनाए हुए हैं। यह आमंत्रण उस तप और संकल्प का सम्मान है, और मैं उनके साथ इस क्षण को साझा कर गर्वित हूं।” देव जसनाथ संस्थागत वन मंडल अध्यक्ष बहादुर मल सिद्ध ने कहा कि “प्रो. ज्याणी ने जिस तरह से जसनाथ जी की पर्यावरणीय शिक्षाओं को आगे बढ़ाते हुए पर्यावरण संरक्षण को जनांदोलन बनाया है, वह आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यह आमंत्रण उन गाँवों की आवाज़ है जहाँ अब हर घर पेड़ों का संरक्षक बन चुका है।”
वरिष्ठ शिक्षाविद् मोटाराम चौधरी ने कहा कि “शिक्षा और प्रकृति का यह संगम भारतीय परंपरा की पुनर्स्थापना है। प्रोफेसर ज्याणी का कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। यह आमंत्रण उनके नवाचारपूर्ण शिक्षकीय योगदान की स्वीकृति है।” यह आमंत्रण न केवल एक व्यक्ति विशेष को मिला सम्मान है, बल्कि यह पर्यावरण के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में एक बड़ा संकेत भी है।
उल्लेखनीय है कि प्रोफेसर ज्याणी अब तक 43 लाख पौधों का रोपण करवा चुके हैं एवं 208 संस्थागत वन खंड विकसित करवा चुके हैं ज्याणी की देखरेख में 5 जन पौधशालाओं में प्रतिवर्ष 2 लाख से अधिक पौधे तैयार करके राजस्थान , पंजाब व हरियाणा के ग्रामीण इलाकों को निःशुल्क उपलब्ध करवाए जाते हैं । अभी ज्याणी चौधरी चरण सिंह पारिवारिक वानिकी मिशन के तहत एक पेड़ माँ के नाम और हरियालो राजस्थान अभियान के लिए स्कूली शिक्षकों के सहयोग से बीकानेर जिले में 100, चूरू में 15 व सीकर में 15 चौधरी चरण सिंह जन पौधशालाओं में 5 लाख सहजन के पौधे विकसित करवा रहे हैं जिन्हें सितंबर में “घर -घर सहजन अभियान” के जरिए बालिकाओं द्वारा अपने -अपने घरों में हरित सदस्य के रूप में रोपित किया जाएगा । बीकानेर जिले के लूणकरणसर उपलब्ध स्थित देव जसनाथ जी की अवतार स्थली डाबला तालाब में प्रोफेसर ज्याणी के नेतृत्व में पूरे जसनाथी समुदाय ने अवैध खनन रुकवाकर 84 हेक्टेयर भूमि के पुनरुद्धार व संरक्षण का जो कार्य किया है वह सामुदायिक भागीदारी से भूमि बहाली का प्रदेश का पहला व एकमात्र सफलतम उदाहरण है।





