






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 18 अक्टूबर 2025।🚩श्री गणेशाय नम:🚩शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 18-Oct-2025
☀ Sri Dungargarh, bikaner
🔅 तिथि द्वादशी 12:20 PM
🔅 नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी 03:42 PM
🔅 करण तैतिल, गर 12:20 PM
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग ब्रह्म 01:47 AM
🔅 वार शनिवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:35 AM
🔅 चन्द्रोदय 04:32 AM
🔅 चन्द्र राशि सिंह 10:12 PM
🔅 चन्द्र वास पूर्व
🔅 सूर्यास्त 06:02 PM
🔅 चन्द्रास्त 04:18 PM
🔅 ऋतु शरद
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1947 विश्वावसु
🔅 काली सम्वत 5126
🔅 दिन काल 11:26:28
🔅 विक्रम सम्वत 2082
🔅 मास अमांत आश्विन
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजीत 11:56 AM 12:41 PM
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 06:35 AM 07:21 AM
🔅 कंटक 11:56 AM 12:41 PM
🔅 यमघण्ट 02:59 PM 03:44 PM
🔅 राहु काल 09:27 AM 10:53 AM
🔅 कुलिक 07:21 AM 08:07 AM
🔅 कालवेला / अर्द्धयाम 01:27 PM 02:13 PM
🔅 यमगण्ड 01:44 PM 03:10 PM
🔅 गुलिक काल 06:35 AM 08:01 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, आर्द्रा, पुष्य, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मिथुन, सिंह, तुला, वृश्चिक, कुम्भ, मीन
📜 चोघडिया 📜
🔅 काल 06:36 AM – 08:01 AM
🔅 शुभ 08:01 AM – 09:27 AM
🔅 रोग 09:27 AM – 10:53 AM
🔅 उद्वेग 10:53 AM – 12:19 PM
🔅 चल 12:19 PM – 01:44 PM
🔅 लाभ 01:44 PM – 03:10 PM
🔅 अमृत 03:10 PM – 04:36 PM
🔅 काल 04:36 PM – 06:02 PM
🔅 लाभ 06:02 PM – 07:36 PM
🔅 उद्वेग 07:36 PM – 09:10 PM
🔅 शुभ 09:10 PM – 10:44 PM
🔅 अमृत 10:44 PM – 00:19 AM
🔅 चल 00:19 AM – 01:53 AM
🔅 रोग 01:53 AM – 03:27 AM
🔅 काल 03:27 AM – 05:01 AM
🔅 लाभ 05:01 AM – 06:36 AM
📜 लग्न तालिका 📜
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 04:19 AM समाप्त: 06:35 AM
🔅 तुला चर
शुरू: 06:35 AM समाप्त: 08:55 AM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 08:55 AM समाप्त: 11:13 AM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 11:13 AM समाप्त: 01:18 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 01:18 PM समाप्त: 03:01 PM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 03:01 PM समाप्त: 04:29 PM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 04:29 PM समाप्त: 05:55 PM
🔅 मेष चर
शुरू: 05:55 PM समाप्त: 07:31 PM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 07:31 PM समाप्त: 09:27 PM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 09:27 PM समाप्त: 11:42 PM
🔅 कर्क चर
शुरू: 11:42 PM समाप्त: 02:02 AM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 02:02 AM समाप्त: 04:19 AM
।। आज का दिन मंगलमय हो ।।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पढने और गायत्री मन्त्र की एक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🌼 धनतेरस की हार्दिक शुभकामनाएँ
विश्व में आरोग्य, चिकित्सा के प्रसार के लिए ही भगवान विष्णु ने धन्वंतरि जी के रूप में अवतार लिया था।
आज के दिन धन्वन्तरि देव की पूजा करने घर पर उनकी तस्वीर की स्थापना करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है, समस्त रोगो से छुटकारा मिलता है, इसलिए प्रत्येक मनुष्य को आज धन्वन्तरि जी की पूजा अनिवार्य रूप से करनी चाहिए ।
चूँकि धन्वन्तरि जी अपने हाथ में अमृत का कलश लेकर प्रकट हुए थे, इसी कारण धनतेरस के दिन भगवान को प्रसन्न करने के लिए पीतल का बर्तन खरीदा जाता है। यह भी मान्यता है कि इस दिन जिस चीज को भी ख़रीदा जाता है उसमें तेरह गुणा बढ़ोतरी होती है।
धनतेरस के दिन भगवान कुबेर जी, का भी पूर्ण श्रद्धा से पूजन करना अनिवार्य है। कुबेर जी धनाध्यक्ष है, सम्पति प्रदान करने वाले है, इनकी सच्चे मन से पूजा करने से सुख – सौभाग्य और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है ।
पंचांग के मुताबिक वर्ष 2025 त्रयोदशी तिथि का प्रारम्भ 18 अक्टूबर शनिवार को दोपहर 12:20 बजे से होगा और त्रियोदशी तिथि 19 अक्टूबर रविवार को दोपहर 1:52 मिनट PM पर समाप्त होगी ।
दीपावली के पांच दिनों तक दीपदान का आज से ही प्रारम्भ होता है । इस दिन से दीपावली के पांचों दिनों तक संध्या के समय घर के बाहरी मुख्य द्वार के दोनों ओर अनाज के ढेर पर मिटटी के दीपक को तेल से भर कर अवश्य ही जलाना चाहिए ।
धनतेरस के दिन पीतल, सोना, चांदी, नवीन वस्त्र खरीदने का विधान है, दीपावली के दिन लक्ष्मी – गणेश जी की पूजा के लिए लक्ष्मी – गणेश जी की मूर्ति, खील, लावा, चीनी के खिलौने आज ही खरीदने चाहिए ।
इस दिन वैसे तो बहुत सी चीजें खरीदना शुभ होता है लेकिन विशेष रूप से सूखा खड़ा धनिया, पीली कौड़ियां, नमक, और झाड़ू अवश्य ही खरीद कर लाना चाहिए । इस दिन झाड़ू खरीदने के बाद उसे दीपावली के अगले दिन से प्रयोग में लाना चाहिए ।
पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री




