May 20, 2026
21-march

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 21 मार्च 2026। आज का पंचांग।

🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 21 – Mar – 2026
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि तृतीया 11:58 PM
🔅 नक्षत्र अश्विनी +00:38 AM
🔅 करण :
तैतिल 01:17 PM
गर 01:17 PM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग एन्द्र 07:00 PM
🔅 वार शनिवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:37 AM
🔅 चन्द्रोदय 07:45 AM
🔅 चन्द्र राशि मेष
🔅 चन्द्र वास पूर्व
🔅 सूर्यास्त 06:45 PM
🔅 चन्द्रास्त 09:22 PM
🔅 ऋतु वसंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1948 पराभव
🔅 कलि सम्वत 5127
🔅 दिन काल 12:07 PM
🔅 विक्रम सम्वत 2083
🔅 मास अमांत चैत्र
🔅 मास पूर्णिमांत चैत्र

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:17:17 – 13:05:49
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 06:37 AM – 07:26 AM
🔅 कंटक 12:17 PM – 01:05 PM
🔅 यमघण्ट 03:31 PM – 04:19 PM
🔅 राहु काल 09:39 AM – 11:10 AM
🔅 कुलिक 07:26 AM – 08:14 AM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 01:54 PM – 02:42 PM
🔅 यमगण्ड 02:12 PM – 03:43 PM
🔅 गुलिक काल 06:37 AM – 08:08 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पूर्व

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ

📜 चोघडिया 📜

🔅काल 06:37:33 – 08:08:33
🔅शुभ 08:08:33 – 09:39:33
🔅रोग 09:39:33 – 11:10:32
🔅उद्वेग 11:10:32 – 12:41:32
🔅चल 12:41:32 – 14:12:32
🔅लाभ 14:12:32 – 15:43:32
🔅अमृत 15:43:32 – 17:14:32
🔅काल 17:14:32 – 18:45:32
🔅लाभ 18:45:32 – 20:14:24
🔅उद्वेग 20:14:24 – 21:43:15
🔅शुभ 21:43:15 – 23:12:07
🔅अमृत 23:12:07 – 24:40:58
🔅चल 24:40:58 – 26:09:50
🔅रोग 26:09:50 – 27:38:41
🔅काल 27:38:41 – 29:07:33
🔅लाभ 29:07:33 – 30:36:24

📜 लग्न तालिका 📜

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 06:23 AM समाप्त: 07:48 AM

🔅 मेष चर
शुरू: 07:48 AM समाप्त: 09:24 AM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 09:24 AM समाप्त: 11:20 AM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 11:20 AM समाप्त: 01:35 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 01:35 PM समाप्त: 03:55 PM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 03:55 PM समाप्त: 06:12 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 06:12 PM समाप्त: 08:28 PM

🔅 तुला चर
शुरू: 08:28 PM समाप्त: 10:48 PM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 10:48 PM समाप्त: अगले दिन 01:06 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 01:06 AM समाप्त: अगले दिन 03:11 AM

🔅 मकर चर
शुरू: अगले दिन 03:11 AM समाप्त: अगले दिन 04:54 AM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: अगले दिन 04:54 AM समाप्त: अगले दिन 06:23 AM

🌼 आप सभी को नवरात्री के तीसरे दिन की हार्दिक शुभकामनायें , जय माँ चंद्रघंटा
नवरात्री के तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। माँ का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी के नाम से जाना जाता है।

माँ चंद्रघंटा के शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। माता के दस हाथ हैं जिनमे तलवार, त्रिशूल, खड्ग, बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। माता का वाहन सिंह है।

मां चंद्रघंटा देवी देवी पार्वती का विवाहित रूप हैं। भगवान भोलेनाथ जी से विवाह करने के बाद माता ने अपने मस्तक पर अर्धचंद्र को सजाना शुरू कर दिया था, इसीलिए मां पार्वती को मां चंद्रघंटा के नाम से जाना जाता है।

नवरात्री के तीसरे दिन माता के भक्त का मन ‘मणिपूर’ चक्र में प्रविष्ट होता है। माँ चंद्रघंटा के घंटे की ध्वनि सदा अपने भक्तों की रक्षा करती है।

मां चंद्रघंटा की कृपा से भक्तो के समस्त संकटो और पापो का नाश हो जाता हैं। मान्यता है कि मां अपने भक्तों पर प्रसन्न होकर उन्हें उन्हें सुख-शांति व समृद्धि प्रदान करती हैं ।

🌼 गणगौर पूजा , मेला

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री