






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 27 अप्रैल 2021।🚩श्री गणेशाय नम:🚩
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 27 – Apr – 2021
☀ Sri Dungargarh, India
☀ पंचांग
🔅 तिथि :
पूर्णिमा 09:03:15
प्रतिपदा 29:16:40
🔅 नक्षत्र स्वाति 20:09:10
🔅 करण :
बव 09:03:15
बालव 19:09:46
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग सिद्धि 20:02:07
🔅 वार मंगलवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 05:57:57
🔅 चन्द्रोदय 19:30:00
🔅 चन्द्र राशि तुला
🔅 चन्द्र वास पश्चिम
🔅 सूर्यास्त 19:05:49
🔅 चन्द्रास्त 06:04:59
🔅 ऋतु ग्रीष्म
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1943 प्लव
🔅 कलि सम्वत 5123
🔅 दिन काल 13:07:52
🔅 विक्रम सम्वत 2078
🔅 मास अमांत चैत्र
🔅 मास पूर्णिमांत चैत्र
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:05:37 – 12:58:08
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 08:35:31 – 09:28:02
🔅 कंटक 06:50:28 – 07:42:59
🔅 यमघण्ट 10:20:34 – 11:13:05
🔅 राहु काल 15:48:51 – 17:27:20
🔅 कुलिक 13:50:40 – 14:43:11
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 08:35:31 – 09:28:02
🔅 यमगण्ड 09:14:55 – 10:53:24
🔅 गुलिक काल 12:31:53 – 14:10:22
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल उत्तर
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर
📜 चोघडिया 📜
🔅रोग 05:57:57 – 07:36:26
🔅उद्वेग 07:36:26 – 09:14:55
🔅चल 09:14:55 – 10:53:24
🔅लाभ 10:53:24 – 12:31:53
🔅अमृत 12:31:53 – 14:10:22
🔅काल 14:10:22 – 15:48:51
🔅शुभ 15:48:51 – 17:27:20
🔅रोग 17:27:20 – 19:05:49
🔅काल 19:05:49 – 20:27:13
🔅लाभ 20:27:13 – 21:48:37
🔅उद्वेग 21:48:37 – 23:10:02
🔅शुभ 23:10:02 – 24:31:26
🔅अमृत 24:31:26 – 25:52:50
🔅चल 25:52:50 – 27:14:15
🔅रोग 27:14:15 – 28:35:39
🔅काल 28:35:39 – 29:57:03
❄️लग्न तालिका ❄️
🔅 मेष चर
शुरू: 05:19 AM समाप्त: 06:57 AM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 06:57 AM समाप्त: 08:53 AM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 08:53 AM समाप्त: 11:08 AM
🔅 कर्क चर
शुरू: 11:08 AM समाप्त: 01:28 PM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 01:28 PM समाप्त: 03:45 PM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 03:45 PM समाप्त: 06:01 PM
🔅 तुला चर
शुरू: 06:01 PM समाप्त: 08:21 PM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 08:21 PM समाप्त: 10:39 PM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 10:39 PM समाप्त: अगले दिन 00:44 AM
🔅 मकर चर
शुरू: अगले दिन 00:44 AM समाप्त: अगले दिन 02:27 AM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: अगले दिन 02:27 AM समाप्त: अगले दिन 03:55 AM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 03:55 AM समाप्त: अगले दिन 05:19 AM
हनुमान जन्मोत्सव पर विशेष।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। आज हनुमान जन्मोत्सव है। हनुमान जन्मोत्सव यानी कि जिस दिन भगवान हनुमान का जन्म हुआ था। ऐसे में आज हम आपको इस लेख में आपकी राशि अनुसार हनुमान जन्मोत्सव के दिन भगवान हनुमान के विभिन्न रूपों के दर्शन से मिलने वाले फल के बारे में बताने वाले हैं रामायण के प्रमुख किरदारों में से एक, मान्यताओं अनुसार भगवान शिव के ग्यारहवें रुद्र अवतार, राम के भक्त और संकटमोचक। इतनी उपमाओं के बाद किसी के लिए भी यह बताना आसान है कि हम प्रभु श्री राम के अनन्य भक्त भगवान हनुमान की बात कर रहे हैं। सनातन धर्म के अनुयायियों की भगवान हनुमान में बहुत आस्था है। मान्यता है कि भगवान हनुमान के नाम मात्र से ही भक्तों के सारे दुख दूर हो जाते हैं। ऐसे में अगर किसी भक्त पर भगवान हनुमान की कृपा हो जाये तो फिर उसकी पूरी ज़िंदगी ही संवर जाती है। यही वजह है कि भगवान हनुमान के भक्तों के लिए हनुमान जी से जुड़े हर दिन का बड़ा महत्व है लेकिन जब बात हनुमान जन्मोत्सव की हो तो उनका उत्साह दुगुना हो जाता है। हनुमान जन्मोत्सव न सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से लोगों के लिए सकारात्मक कार्य है बल्कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण से भी हनुमान जन्मोत्सव का बड़ा महत्व है। इस साल हनुमान जन्मोत्सव का पर्व खास इसलिए भी है क्योंकि इस दिन सिद्धि योग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सिद्धि योग को बड़ा शुभ माना जाता है। इस योग के दौरान हर तरह के शुभ व मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। हनुमान जन्मोत्सव के दिन यह सिद्धि योग रात के 08 बजकर 03 मिनट तक रहने वाला है। हालांकि सिद्धि योग के तुरंत बाद ही व्यतीपात योग की शुरुआत हो जाएगी। व्यतीपात योग को ज्योतिष शास्त्र में शुभ नहीं माना गया है।
भगवान हनुमान की पूजा न सिर्फ आपके विघ्न व बाधाओं को दूर करती है बल्कि ग्रह-दोष को भी शांत करती है। खास कर के वैसे जातक जो शनि के कुपित होने से परेशान रहते हैं, उन्हें तो भगवान हनुमान की पूजा अवश्य करनी चाहिए। अक्सर उन जातकों को भी हनुमान जी की पूजा करने को कहा जाता है जिन्हें अपने करियर की रह में बारंबार बाधाओं का सामना करना पड़ता है। वे लोग जिन्हें भूत-पिशाच से भय लगता है उन्हें भय के दौरान हनुमान जी का स्मरण करना चाहिए।




