May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 4 सितंबर 2021। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 04 – Sep – 2021
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि  द्वादशी  08:26:23
🔅 नक्षत्र  पुष्य  17:45:22
🔅 करण :
तैतिल  08:26:23
गर  20:30:10
🔅 पक्ष  कृष्ण
🔅 योग  वरियान  09:36:26
🔅 वार  शनिवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय  06:13:30
🔅 चन्द्रोदय  28:12:59
🔅 चन्द्र राशि  कर्क
🔅 चन्द्र वास उत्तर
🔅 सूर्यास्त  18:52:16
🔅 चन्द्रास्त  17:25:00
🔅 ऋतु  शरद

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत  1943  प्लव
🔅 कलि सम्वत  5123
🔅 दिन काल  12:38:45
🔅 विक्रम सम्वत  2078
🔅 मास अमांत  श्रावण
🔅 मास पूर्णिमांत  भाद्रपद

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित  12:07:36 – 12:58:11
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त :
06:13:30 – 07:04:06
07:04:06 – 07:54:41
🔅 कंटक  12:07:36 – 12:58:11
🔅 यमघण्ट  15:29:56 – 16:20:31
🔅 राहु काल  09:23:12 – 10:58:03
🔅 कुलिक  07:04:06 – 07:54:41
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम  13:48:46 – 14:39:21
🔅 यमगण्ड  14:07:44 – 15:42:35
🔅 गुलिक काल  06:13:30 – 07:48:21
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल  पूर्व

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, मूल, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, कर्क, कन्या, तुला, मकर, कुम्भ

📜 चोघडिया 📜

🔅काल  06:13:30 –   07:48:21
🔅शुभ  07:48:21 –   09:23:12
🔅रोग  09:23:12 –   10:58:03
🔅उद्वेग  10:58:03 –   12:32:53
🔅चल  12:32:53 –   14:07:44
🔅लाभ  14:07:44 –   15:42:35
🔅अमृत  15:42:35 –   17:17:26
🔅काल  17:17:26 –   18:52:16
🔅लाभ  18:52:16 –   20:17:29
🔅उद्वेग  20:17:29 –   21:42:42
🔅शुभ  21:42:42 –   23:07:55
🔅अमृत  23:07:55 –   24:33:08
🔅चल  24:33:08 –   25:58:21
🔅रोग  25:58:21 –   27:23:34
🔅काल  27:23:34 –   28:48:47
🔅लाभ  28:48:47 –   30:14:00

❄️लग्न तालिका ❄️

🔅 सिंह  स्थिर
शुरू: 04:56 AM  समाप्त: 07:13 AM

🔅 कन्या  द्विस्वाभाव
शुरू: 07:13 AM  समाप्त: 09:29 AM

🔅 तुला  चर
शुरू: 09:29 AM  समाप्त: 11:48 AM

🔅 वृश्चिक  स्थिर
शुरू: 11:48 AM  समाप्त: 02:07 PM

🔅 धनु  द्विस्वाभाव
शुरू: 02:07 PM  समाप्त: 04:11 PM

🔅 मकर  चर
शुरू: 04:11 PM  समाप्त: 05:54 PM

🔅 कुम्भ  स्थिर
शुरू: 05:54 PM  समाप्त: 07:23 PM

🔅 मीन  द्विस्वाभाव
शुरू: 07:23 PM  समाप्त: 08:48 PM

🔅 मेष  चर
शुरू: 08:48 PM  समाप्त: 10:24 PM

🔅 वृषभ  स्थिर
शुरू: 10:24 PM  समाप्त: अगले दिन 00:20 AM

🔅 मिथुन  द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 00:20 AM  समाप्त: अगले दिन 02:35 AM

🔅 कर्क  चर
शुरू: अगले दिन 02:35 AM  समाप्त: अगले दिन 04:56 AM

❇️बछ बारस पर्व का महत्व ❇️

हिन्दू धर्म के इस त्यौहार को मनाये जाने के पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी है। मान्यता है कि इस त्यौहार का ख़ास संबंध माता यशोदा और श्री कृष्ण से है। ये त्यौहार खासतौर से माँ और बेटे के बीच के प्रेम को दर्शाता है। एक पौराणिक कथा के अनुसार जब कृष्ण जी थोड़े बड़े हुए तो उन्होनें अपने मित्रों को जंगल में गाय चराने के लिए जाते देखा। उनके मन में भी गाय चराने की हट जाग उठी, जब ये बात उन्होनें अपनी माँ यशोदा से कही तो उन्होनें बेटे की हिफाज़त की चिंता करके उन्हें जाने से मना कर दिया। लेकिन माता यशोदा मन ही मन ये जानती थी की वो ज्यादा दिनों तक कृष्ण जी को घर में कैद करके नहीं रख सकती हैं। जिस दिन उन्होनें कृष्ण जी को गाय चराने जाने की इजाजत दी वो दिन भादो माह कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि थी।

यशोदा माता ने अपने लाड़ले को वन में भेजने से पहले उनके लिए उनका पसंदीदा पकवान बनाया। यशोदा माँ के साथ ही साथ नन्द गावं की अन्य महिलाएं भी कान्हा के लिए बहुत से उपहार और तरह-तरह के पकवान बनाकर ले आयी। गायों को सजाया गया और उनके लिए भी अंकुरति अनाज बांधें गए। माता यशोदा को कृष्ण जी की इतनी चिंता सता रही थी की जब तक वो वन से लौट नहीं आये तब तक उन्होनें कुछ खाया नहीं सिर्फ अंकुरित अनाज ही खाएं। इस तरह से कृष्ण जी पहली बार वन से सही सलामत गाय चराकर लौटे। इसी दिन को बछ बारस के रूप में मनाया जाने लगा।

📜बछ बारस पूजा विधि 📜

आज के दिन व्रती महिलाएं सबसे पहले सुबह सवेरे उठकर स्नान करके नए वस्त्र धारण करें।
इसके बाद गाय और उसके बछड़ों को नहलाएं और उन्हें नए वस्त्र ओढ़ाएं।
गाय और बछड़े दोनों को फूलों की माला अर्पित करें।
माथे पर चंदन का तिलक लगाएं और गाय की सींग को रंग बिरंगी चीजों से सजाएँ।
अब गौ माता का पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें और उनके पैर में लगी मिट्टी से माथे पर तिलक लगा लें।
पूरा दिन व्रत रखें और खाने में सिर्फ अंकुरित अनाज ही ग्रहण करें। रात के वक़्त गौ माता की पूजा के बाद अपना व्रत खोलें।
आज के दिन व्रती महिलाओं के लिए बाजरे की रोटी खाना महत्वपूर्ण माना जाता है।
ध्यान रखें की आज गाय का दूध, दही और चावल से बने किसी भी भोज्य पदार्थ का सेवन ना करें।
अगर किसी के पास गाय या बछड़े ना हों तो वो मिट्टी से बने गाय की पूजा कर सकते हैं।
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शनि प्रदोष

पं. विष्णुदत्त शास्त्री {8290814026}