May 21, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 10 सितंबर 2021। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 10 – Sep – 2021
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि चतुर्थी 21:59:42
🔅 नक्षत्र चित्रा 12:58:12
🔅 करण :
वणिज 11:10:19
विष्टि 21:59:42
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग ब्रह्म 17:41:12
🔅 वार शुक्रवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:16:22
🔅 चन्द्रोदय 09:24:59
🔅 चन्द्र राशि तुला
🔅 चन्द्र वास पश्चिम
🔅 सूर्यास्त 18:45:21
🔅 चन्द्रास्त 21:07:00
🔅 ऋतु शरद

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1943 प्लव
🔅 कलि सम्वत 5123
🔅 दिन काल 12:28:59
🔅 विक्रम सम्वत 2078
🔅 मास अमांत भाद्रपद
🔅 मास पूर्णिमांत भाद्रपद

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:05:54 – 12:55:50
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त :
08:46:10 – 09:36:06
12:55:50 – 13:45:46
🔅 कंटक 13:45:46 – 14:35:42
🔅 यमघण्ट 17:05:30 – 17:55:26
🔅 राहु काल 10:57:14 – 12:30:52
🔅 कुलिक 08:46:10 – 09:36:06
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 15:25:38 – 16:15:34
🔅 यमगण्ड 15:38:07 – 17:11:44
🔅 गुलिक काल 07:49:59 – 09:23:37
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, तुला, धनु, मकर

📜 चोघडिया 📜

🔅चल 06:16:22 – 07:49:59
🔅लाभ 07:49:59 – 09:23:37
🔅अमृत 09:23:37 – 10:57:14
🔅काल 10:57:14 – 12:30:52
🔅शुभ 12:30:52 – 14:04:29
🔅रोग 14:04:29 – 15:38:07
🔅उद्वेग 15:38:07 – 17:11:44
🔅चल 17:11:44 – 18:45:21
🔅रोग 18:45:21 – 20:11:47
🔅काल 20:11:47 – 21:38:13
🔅लाभ 21:38:13 – 23:04:39
🔅उद्वेग 23:04:39 – 24:31:05
🔅शुभ 24:31:05 – 25:57:31
🔅अमृत 25:57:31 – 27:23:57
🔅चल 27:23:57 – 28:50:23
🔅रोग 28:50:23 – 30:16:49

❄️लग्न तालिका❄️

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 04:32 AM समाप्त: 06:49 AM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 06:49 AM समाप्त: 09:05 AM

🔅 तुला चर
शुरू: 09:05 AM समाप्त: 11:24 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 11:24 AM समाप्त: 01:43 PM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 01:43 PM समाप्त: 03:48 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 03:48 PM समाप्त: 05:31 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 05:31 PM समाप्त: 06:59 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 06:59 PM समाप्त: 08:25 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 08:25 PM समाप्त: 10:01 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 10:01 PM समाप्त: 11:57 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 11:57 PM समाप्त: अगले दिन 02:12 AM

🔅 कर्क चर
शुरू: अगले दिन 02:12 AM समाप्त: अगले दिन 04:32 AM

गणेश चतुर्थी 2021: पूजा विधि

समय मध्यान्ह काल 12 बजे उपरान्त

गणेश चतुर्थी या गणेशोत्सव का त्योहार मुख्य तौर पर 10 दिनों तक मनाया जाता है। हालांकि जो लोग अपने घरों में गणेश भगवान की प्रतिमा स्थापित करते हैं वे 1 दिन, 3 दिन, 5 दिन, या 7 दिनों के लिए भी भगवान गणपति को घर ला सकते हैं और उसके बाद बाप्पा की विदाई कर सकते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने सभी दैनिक कार्यों से निवृत्त होने के बाद स्नान कर लें।
इसके बाद भगवान गणपति का स्मरण करें और पूजा की तैयारी करें।
सम्भव हो तो इस दिन लाल रंग के कपड़े या फिर पीले रंग के कपड़े धारण करें।
इसके बाद एक साफ़ कलश में जल भरें और इसमें सुपारी डालकर कलश को साफ कपड़े से बांध दें।
इसके बाद एक चौकी स्थापित करें और उस पर लाल रंग का साफ़ कपड़ा बिछा दें।
स्थापना करने से पहले भगवान गणेश को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद गंगा जल से भगवान गणेश की मूर्ति को स्नान कराकर चौकी पर स्थापित करें।
इसके बाद भगवान गणेश के साथ चौकी पर दो सुपारी (रिद्धि और सिद्धि माता के रूप में) रख दें।
स्थापना के बाद भगवान गणेश को फल, फूल, आदि अर्पित करें और फूल से जल अर्पित करें।
इसके बाद भगवान गणेश को रोली, अक्षत लगायें।
इसके बाद पूजा में लाल रंग के फूल, जनेऊ, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, और भोग अर्पित करें।
इस दिन मोदक अवश्य अर्पित करें।
इसके बाद षोडशोपचार से भगवान गणेश का पूजन करें।
उन्हें 21 लड्डुओं का भोग लगाएं और अंत में भगवान गणेश की आरती करें इसके बाद भगवान गणेश के मंत्रों का जप करें।

चंद्र-दर्शन दोष दूर करने के मंत्र

इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भूल से भी भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन न करें। यदि कोई जातक भूल से चंद्र दर्शन कर लेता है तो उसे इसके निवारण के लिए श्रीमद्‌भागवत के 10वें स्कन्ध, 56-57वें अध्याय में उल्लेखित स्यमंतक मणि के चोरी की कथा को सुनना चाहिए। इस कार्य से जातक के दोष दूर होते हैं और उसे चंद्रमा के दर्शन से होने वाले मिथ्या कलंक का ज्यादा खतरा नहीं होगा।

गणेश चतुर्थी पर विभिन्न मनोकामनाओं को पूरा करने के लिए करें ये उपाय

जीवन में मानसिक परेशानियों दूर करने के लिए और शांति का अनुभव करने के लिए गणेश अथर्वशीष का पाठ करें।
जीवन में सकारात्मकता हासिल करने के लिए घर में गणेश यंत्र की स्थापना करें।
जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए गणेश चतुर्थी के दिन हाथी को हरा चारा खिलाएं।
आर्थिक तंगी दूर करने के लिए गणेश चतुर्थी के दिन शुद्ध घी और गुड़ का भोग लगाएं। इसके बाद इस भोग को किसी गाय को खिला दें। यह उपाय आप गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक करें।
व्यापार में तरक्की और नौकरी में प्रमोशन आदि प्राप्त करने के लिए गणेश चतुर्थी के दिन अपने घर में गणपति बाप्पा की पीली प्रतिमा लेकर आए। उनका पूजन करें। इसके अलावा उन्हें पूजा में पांच हल्दी की गांठ अर्पित करें।
वैवाहिक जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए या सुयोग्य वर वधु प्राप्त करने के लिए गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को गुड़ की 21 गोलियां और दूर्वा अर्पित करें।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
(8290814026)