






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। तप करने से मनुष्य के दुर्गुणों का नाश होता है तथा शरीर, मन, बुद्धि, आत्मा निर्मल होती है। ये कहा शुक्रवार को मालू भवन में साध्वी बसन्त प्रभाजी ने समाज के तपस्वियों का अभिनंदन करते हुए। साध्वी ने कहा कि जैन आगम में तम को मंगल बताया गया है और तम ही जैन शासन की प्रभावना का हेतु है। इस अवसर पर साध्वी गुप्तिप्रभाजी ने कहा कि तप से शरीर के रोग खत्म है और अशुद्ध कर्म संस्कारों का शोधन भी होता है व तप आत्मा को कुंदन बनाती है। साध्वी संकल्पश्री ने भी विचार रखें तथा साध्वी मल्लिकाश्री सहित सभी साध्वियों ने सामुहिक तप गीत का संगान किया गया। यहां तपस्वी तमन्ना झाबक, ऋषभ झाबक, आयुषी जैन, अरिहन्त और हर्षवर्धन के तप की अनुमोदना की गई। इस अवसर पर तेरापंथ सभा के तेजकरण डागा, अणुव्रत समिति के विजय सिंह पारख, उपाध्यक्ष पवन सेठिया, युवक परिषद से पुखराज बरड़िया, महिला मंडल से मंत्री मंजू झाबक ने अपने विचार प्रस्तुत किए।तपस्वियों के परिवार से शान्तिलाल झाबक, मधु झाबक, चन्दा, नमन जैन, नगरपालिका के पूर्व चैयरमैन रामेश्वर पारीक ने, अम्बिका डागा ने तपस्वियों के अपनी भावनाएं प्रस्तुत की। तपस्वियों को तेरापंथ सभा, महिला मंडल एव युवक परिषद द्वारा सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में चैयरमैन मानमल शर्मा, पूर्व प्रधान छैलूसिंह शेखावत भी शामिल रहें। कार्यक्रम का संचालन साध्वी संकल्पश्री ने किया।




