






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 4 दिसम्बर 2021 प्रशांत किशोर ने ट्वीट करके इस बात की तरफदारी की है कि विपक्ष का नेतृत्त्व कांग्रेस करे ये जरूरी नहीं, कोई भी कर सकता है। दिखने में ये बात सही लगती है मगर यथार्थ में ये ट्वीट कांग्रेस का विरोध है। जबकि प्रशांत किशोर किसी राजनीतिक दल के सदस्य नहीं, न नेता है। वे केवल प्रोफेशनल रणनीतिकार है। उनका ये ट्वीट गैर राजनीतिक है, ये बात गले उतरने वाली नहीं है।
प्रशांत पहले मोदी के साथ थे। फिर मोदी के विरोध में नीतीश कुमार के साथ हुए। फिर अरविंद केजरीवाल के साथ हुए और अभी ममता बनर्जी के साथ थे। जाहिर है, वे ममता के विपक्ष का विकल्प बनने की कोशिश की अपरोक्ष कोशिश ही कर रहे हैं। वो भी तब जब उन्होंने चुनावों से दूर रहने का भी एक ट्वीट थोड़े समय पहले किया था। उसके बाद भी राजनीति पर उनका कुछ कहना एक राजनीति ही हुई।
ये देश की राजनीति का तथ्य है कि भाजपा के साथ कांग्रेस ही है जिसकी मौजूदगी हर प्रदेश में है। गांव, ढाणी तक उसके सदस्य है। भाजपा के बाद विपक्ष में सर्वाधिक सांसद उसके है। राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़ में वो शासन कर रही है। महाराष्ट्र, तमिलनाडू में वो सरकार के साथ है। देश में दूसरे नम्बर पर उसके विधायक है। अनेक राज्यों में वो मुख्य विपक्षी दल है। ये तथ्य है। उसके बाद भी विपक्ष में कांग्रेस के नेतृत्त्व को नकारना एक अलग तरह की राजनीति ही माना जायेगा। एनडीए सत्ता में है और विपक्ष में यूपीए है। यूपीए के वजूद पर ममता ने सवाल उठाया, प्रशांत का ट्वीट उसी का विस्तार माना जाना चाहिए। राजनीतिक विश्लेषक इसे विपक्ष को कमजोर करने की बात कह रहे हैं। क्योंकि ममता भी भाजपा पर हमलावर होने के बजाय अभी तो कांग्रेस को तोड़ने और उससे अपना कुनबा बढ़ाने की कोशिश में ही लगी है। अपने को बंगाल से राष्ट्र में विस्तार करने की उनकी महत्त्वाकांक्षा साफ दिखती है। मगर एक राज्य के अलावा किसी दूसरे राज्य में उनकी मजबूत मौजूदगी भी नहीं है। कांग्रेस के भीतरी असंतोष का लाभ उठा ममता भाजपा को चुनोती देने के बजाय फिलहाल विपक्ष को ही चुनोती दे रही प्रतीत होती है। विपक्ष कमजोर हुआ तो लाभ ममता को होगा, इसकी संभावना कम है। भाजपा को लाभ होगा, ये तय है। कांग्रेस और यूपीए को इस बदले हालात में फिर से चिंतन कर नई रणनीति बनाने की जरूरत है, नहीं तो भाजपा और एनडीए को अगले आम चुनाव में चुनोती नहीं मिल सकेगी।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार



