May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 17 जनवरी 2022। 70 सदस्यों की विधान सभा वाला उत्तराखंड इस बार भी दलबदल के कारण कांग्रेस और भाजपा को सकते में डाले हुए है। इसी कारण इस छोटे राज्य में दोनों ही दल अभी तक उम्मीदवार घोषित नहीं कर पाये हैं। इस राज्य में अब तक केवल दिग्गज नेता नारायण दत्त तिवारी ही पूरे पांच साल मुख्यमंत्री रहे हैं, बाकी सभी अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके हैं। यहां के नेता बगावत करने में जरा भी गुरेज नहीं करते।
उत्तर प्रदेश से अलग कर दो दशक पहले इस राज्य का गठन किया गया था, तब से ही दोनों प्रमुख दल अपने नेताओं की बगावत झेल रहे हैं। पिछली बार के चुनाव में कांग्रेस के कई दिग्गज बगावत कर भाजपा के साथ हो लिए थे, उसी वजह से वहां भाजपा की सरकार बनी। मगर पांच साल में तीन मुख्यमंत्री बने। ये अस्थिरता का ही संकेत है।
इस बार फिर चुनाव आते ही बगावत ने सिर उठाया। पहले भाजपा में गये यशपाल शर्मा वापस कांग्रेस में आ गये तो हरक सिंह रावत भी बगावती बन गये। रविवार को उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना पड़ा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को।
बगावत का शिकार हुई कांग्रेस इस बार सतर्क थी, इसलिए एक ट्वीट कर बगावत दर्शाने वाले दिग्गज नेता हरीश रावत को आलाकमान ने तुरंत मनाया। उनको तव्वजो दी तब जाकर कांग्रेस में कुछ हलचल कम हुई।
मगर अब भी हरीश रावत और प्रीतम सिंह के बीच टिकट वितरण को लेकर खींचतान जारी है और उम्मीदवार तय नहीं हो सके हैं। दोनों ही नेता अपने समर्थकों को अधिक टिकट दिलाने के लिए अड़े हैं। आलाकमान को फिर से हस्तक्षेप कर बीच का रास्ता तलाशना पड़ रहा है। कांग्रेस सत्ता से बाहर है इसलिए बगावत के सुर कुछ धीमे है, जिनको थामना ज्यादा मुश्किल का काम नहीं है।
मगर भाजपा में कुछ ज्यादा बगावती तेवर दिख रहे हैं। उस पर दलबदल का साया भी मंडरा रहा है। यशपाल के बाद कुछ और विधायक भी दल बदल सकते हैं। इस तरह के कयास लगाये जा रहे हैं।
कांग्रेस और भाजपा के मध्य यहां कड़ा मुकाबला है इसीलिए दोनों दल पहले अपनी अपनी बगावत को थामने में लगे हैं। मगर आम आदमी पार्टी की उपस्थिति ने यहां के सारे राजनीतिक समीकरण उलट पुलट कर दिए हैं। दोनों प्रमुख दलों पर इसका असर भी पड़ रहा है।
इस छोटे राज्य में कांग्रेस और भाजपा ने बगावत को थामने के लिए बड़ी टीम लगाई है। जो दल बगावत को रोक लेगा, उसको फायदा मिलना तय है। विभिन्न सर्वे के अनुसार यहां बराबरी का मुकाबला दिख रहा है। लेकिन बगावत रोकने वाला फायदे में रहेगा, ये तय है। उत्तराखंड में चुनावी मुकाबला इस बार रोचक और कांटे का होगा, थोड़ा सा बदलाव राजनीति में बड़ा बदलाव कर देगा। इसीलिए कांग्रेस और भाजपा यहां फूंक फूंककर कदम रख रही है। टिकट वितरण के बाद ही यहां की राजनीतिक तस्वीर साफ होगी। अभी तस्वीर की धुंध हटाने के लिए कांग्रेस में हरीश रावत और भाजपा में पुष्कर सिंह धामी पूरा जोर लगा रहे हैं।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार