






सोमवार को यूपी विधान सभा के दूसरे चरण की 55 सीटों पर मतदान होगा जहां भाजपा के सामने सपा – रालोद गठबंधन कड़ी चुनोती पेश कर रहा है। उत्तराखंड और गोवा में सभी सीटों पर भी मतदान होगा। गोवा में जहां त्रिकोणीय संघर्ष है वहीं उत्तराखंड में भाजपा – कांग्रेस आमने सामने है, मुकाबला रोचक है।
यूपी के दूसरे चरण में बरेली, रामपुर, मुरादाबाद जैसे क्षेत्र है और यहां कड़ा संघर्ष है। इस चरण की 55 सीटों पर मुस्लिम आबादी अधिक है और यादव भी बड़ी संख्या में है। इसी वजह से ये चरण उत्तर प्रदेश के चुनाव परिणामों की दृष्टि से खास महत्त्व रखता है। भाजपा के ध्रुवीकरण के प्रयासों का यहां खास असर है और उसकी प्रतिक्रिया भी देखने को मिल रही है।
मुस्लिम, यादव बहुल इस इलाके में अखिलेश और जयंत चौधरी ने पूरी ताकत झोंकी है। मुस्लिम वोट न कटे, इस पर ही गठबंधन का विशेष ध्यान रहा है। रामपुर में आजम खां और उनके पुत्र भी चुनाव मैदान में है, जिसका असर आसपास की सीटों पर भी पड़ रहा है। यहां गठबंधन के लिए कोई चिंता की बात है तो वो बसपा है। यदि उसने मुस्लिम मतदाताओं में विभाजन कराया तो स्थिति कठिन होगी। हालांकि यादव गठबंधन के साथ है और मुस्लिम मतदाता भी सतर्क है। किसान तो अपने 13 महीने के आंदोलन के बाद पूरी तरह से मुखरित है और भाजपा के लिए परेशानी खड़ी कर रहे हैं। किसान आंदोलन, ध्रुवीकरण, महंगाई, बेरोजगारी, जाट – मुस्लिम साथ का इस चरण पर असर रहेगा। कुल मिलाकर दूसरे चरण की सीटों में मुकाबला कड़ा है, जो पक्ष अधिक मतदान के लिए वोटर को बूथ तक खींच लायेगा, उसके लिए राहत रहेगी। पहले चरण की हवा का यहां असर है और वो तटस्थ मतदाता पर पूरा असर डाल रहा है।
उत्तराखंड की सभी 70 सीटों पर भी सोमवार को मतदान होगा। यहां भाजपा – कांग्रेस में सीधा मुकाबला है। भाजपा में चुनाव से पहले बिखराव हुआ, जिसका असर पड़ेगा। वहीं कांग्रेस ने हरीश रावत को कमान देकर एक ठोस निर्णय किया। शिवराज सिंह, हेमंत बिस्वा, अमित शाह ने यहां प्रचार कर वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश की। सीएम धामी के बयान भी इसी तर्ज पर थे। कांग्रेस ने ‘ चार धाम, चार काम ‘ के नारे को आधार बनाया है। एन वक़्त पर असम के सीएम बिस्वा के हरीश रावत पर दिए विवादित बयान को अब कांग्रेस ले उड़ी है और उसे स्थानीयता से जोड़ दिया है। यहां दोनों दलों को भितरघात का भी डर सता रहा है। कांटे की टक्कर है उत्तराखंड में।
गोवा के चुनाव को आम आदमी पार्टी ने त्रिकोणीय बना दिया है। पिछली बार भी यहां कांग्रेस के 17 विधायक चुने गये थे। 40 सीटों में भाजपा को केवल 13 सीटें मिली थी, मगर जोड़ तोड़ से वो सरकार बना ले गई। इस बार भाजपा के पास मनोहर पन्निकर जैसा करिश्माई नाम भी नहीं है और उनके पुत्र भी भाजपा से बागी बनकर चुनाव लड़ रहे हैं। इस छोटे प्रदेश में चुनाव से पहले जमकर दलबदल हुआ, उसका असर परिणामों पर पड़ेगा। कांग्रेस ने यहां पूरी रणनीति से चुनाव लड़ा है मगर ममता की टीएमसी यहां उसके लिए चुनोती है। मगर कांग्रेस की रणनीति, आप की शक्ति के कारण भाजपा परेशानी में है। वापसी करने भाजपा के लिए खासा मुश्किल है। निकट के चुनावी संघर्ष से गोवा में राजनीति रोचक हो गई है।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार



