






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 12 अप्रैल 2022। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र की करीब 3 लाख से अधिक की आबादी को स्वस्थ रखने की जिम्मेदारी श्रीडूंगरगढ़ मुख्यालय पर बने 50 बैड के सीएचसी की है। लेकिन अव्यवस्थाओं के आलम में हालात यह है कि पहले खुद हॉस्पिटल के स्वस्थ होने की आवश्यकता आन पड़ी है। इसी आवश्यकता को पूरा करने की दिशा में क्षेत्र के जागरूक युवाओ ने मंगलवार सुबह से गांधीगिरी अपनाते हुए अनूठा अभियान “गेट वेल सुन सीएचसी श्रीडूंगरगढ़” शुरू किया है। राजकीय चिकित्सालय को बाहर की दवाइयां लिखने, बाहर से जांचे करवाने, कमीशनखोरी, सफाई में अनियमितता, चिकित्सकों के समय पर सीट पर मौजूद नहीं होने जैसे कई बीमारियां होने का आरोप आए दिन लगता रहता है ओर इन्ही बीमारियों को दूर करने के लिए यूथ कांग्रेस देहात जिलाध्यक्ष हरिराम बाना और राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं आरटीआई जागरूकता संगठन के संतोष विनायकिया ने यह पहल शुरू की है। पहल के तहत पहले दिन दोनों युवाओं ने चिकित्सालय के चिकित्सकों को आग्रह पत्र और गुलाब के फूल देते हुए चिकित्सालय के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। आग्रह पत्र में किसी भी रोगी को अनावश्यक रूप से बाहर की दवाइयां नहीं लिखने और बाहर की जांचों के लिए मजबूर नहीं करने का निवेदन किया गया है। बाना और विनायकिया ने बताया कि अभियान को लगातार जारी रखा जाएगा और गांधीवादी तरीके से लालच को समाप्त कर जनसेवा का सिस्टम बनवाया जाएगा। इस अभियान के लिए क्षेत्र के अन्य प्रबुद्ध वर्ग से भी जुड़ने का आह्वान इन युवाओं ने किया है। मंगलवार को इस अभियान के दौरान शुभम शर्मा, महेश पिलानिया, रामकरण कड़वासरा, पवन आसोपा, हनुमान माली, केशवसिंह पुंदलसर, शरीफ चेजारा, आबिद सोलंकी, मोहम्मद अली आदि जागरूक युवा उपस्थित रहे।
सरकार द्वारा एकदम फ्री, हॉस्पिटल आते ही हजारों खर्च।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है कि स्वास्थ्य से सबंधित किसी भी नागरिक पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़े। इसलिए सरकार ने राजकीय चिकित्सालयों में पहले दवाइयां, जांचे निःशुल्क की तथा बाद में पर्ची के लगने वाले 10 रुपये भी हटा दिए है। इसी प्रकार चिंरजीवी योजना के तहत निजी चिकित्सालयों में भी उपचार हेतु सभी परिवारों का 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा सरकार ने किया है। इस दिशा में हर वर्ष हजारों करोड़ खर्च कर सरकार चाहती है कि राज्य में रोगियों का उपचार एकदम फ्री हो। लेकिन श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में यह सिस्टम उलट जाता है क्योंकि यहां अभी तक एक भी निजी हॉस्पिटल को चिरंजीवी योजना से अधिकृत नहीं किया गया और राजकीय चिकित्सालय में भी जाते ही बाहर की दवाइयों, जांचों के सहारे रोगी से हजारों रुपए खर्च करवा दिए जाते है। आवश्यकता है कि क्षेत्र में जल्द से जल्द किसी निजी चिकित्सालय को चिरंजीवी से जोड़ा जाए और राजकीय चिकित्सालय में भी सिस्टम सुधार कर बाहरी हस्तक्षेप को पूर्णतया बन्द किया जाए।








