






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 29 मई 2022। नव ग्रहों में न्यायाधीश माने जाने वाले भगवान शनि का जन्मोत्सव सोमवार को है। घास मंडी रोड स्थित शनि मंदिर के 100 वर्ष भी पूर्ण हो रहें है और इस पर मंदिर प्रशासन द्वारा विशेष उत्सव भी मनाया जाएगा। आज भव्य जागरण व कल सुबह हवन पूजन का आयोजन होगा जिसमें क्षेत्र के सैंकड़ो श्रद्धालु भाग लेंगे। इस बीच आमजन के लिए कल करने और न करने योग्य कुछ बातें राजगुरू पंडित रामदेव उपाध्याय ने श्रद्धालुओं के लिए बताई है। आप भी पढ़ें व इसे सभी तक पहुंचाए।
इस बार शनि जन्मोत्सव पर विशेष योग बन रहें है। आप भी नीचे बताए गए उपाय करें जिससे शनिदेव की कृपा पा सकें। शनि जन्मोत्सव का पर्व दिनांक 30 मई 2022 वार सोमवार को मनाया जाएगा। सूर्यपुत्र शनिदेव को ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार नवग्रह मंडल में न्यायाधीश ग्रह के रूप में माना जाता है। किसी भी जातक की जन्मकुंडली में उच्च स्थान पर स्थित शनि उस जातक के यश, ऐश्वर्य, दीर्घायु, चिन्तन शक्ति (विशेष रूप से दार्शनिक चिंतन) का कारक होता है। किंतु विपरीत स्थान पर स्थित शनि जातक की निर्धनता, दासता एवं अनाचार को बढ़ावा देता है। अन्य ग्रहों की तुलना में शनि को अधिक बलशाली माना जाता है।
* वर्तमान गोचर कुण्डली के अनुसार शनि की ढैया एवं साढ़ेसाती से प्रभावित कर्क, वृश्चिक, मकर, कुंभ, मीन आदि राशियां हैं। इन राशियों के जातकों के लिए कष्ट की निवृत्ति हेतु शनिजयंति पर भगवान शनिदेव की प्रसन्नता हेतु शनिदेव की विशेष आराधना उपयुक्त रहेगी।
*व्यापार वर्ग के लिए विशेष –
शनि जयंती के दिन “सर्वार्थ सिद्धि योग” का निर्माण हो रहा है जो सोमवार को प्रातः 07:12 बजे से आरंभ होकर पूरे दिन रहेगा । जिन व्यापारीयों को व्यापार संबंधित बाधाएं आ रही है वे किन किन उपायों से भगवान शनि को प्रसन्न करके अपना मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं?
१. काली चीटियों को आटा डालें।
२. गरीबों या असहाय लोगों की मदद करें।
३. सत्य बोलें एवं न्यायप्रिय कर्म करें।
४.शनिदेव की विशेष आराधना करें।
* सुकर्मा योग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस वर्ष शनिजयंति के दिन” सुकर्मा “नामक योग का भी निर्माण हो रहा है जिसे ज्योतिष शास्त्रों में शुभ माना जाता है।
* रोगी उत्तम स्वास्थ्य हेतु क्या करें?
१. शनि चालीसा का पाठ करें।
२. पीपल के पेड़ पर जल अवश्य चढ़ाएं एवं पीपल के पेड़ पर धागा बांधकर परिक्रमा करें एवं सरसों के तेल का दीपक भी करें।
३. “ओउम् ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नमः ” मंत्र का जप करें।
अथवा
“ओउम् शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जप करें ।
४.शारीरिक सुरक्षा की दृष्टि से एवं जन्मकुंडली में शनि की प्रतिकूल दशा होने पर “श्री शनिकवचम् ” का पाठ अति उत्तम निवारण माना जाता है।
शनि जयंती के दिन कौन -कौन से कार्य निषेध हैं –
१- जिनके घर पर प्रसूति या सूतक है उन्हें शनि पुजन नहीं करना चाहिए।
२. शनि जयंती के दिन कांच या लोहे से बनी वस्तुओं को घर पर नहीं लाना चाहिए।
३. शनि जयंती के दिन पीपल के पत्ते भी नहीं तोड़ने चाहिए।
४. इस दिन बाजार से सरसों का तेल ,काली उड़द, लकड़ी आदि खरीद कर घर पर नहीं लानी चाहिए।
५. शनि जयंती के दिन बाल, नाखून आदि नहीं काटने चाहिए अन्यथा आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
६. शनि जयंती के दिन मांस मदिरा आदि ग्रहण नहीं करना चाहिए।
७. भगवान शनि देव के दर्शन करते समय उनके चरणों का दर्शन करना चाहिए मुख का नहीं।
*शनि ही कर्मफलदाता क्यों ?
कुछ लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि सभी देवों में शनि देव को ही कर्म का फलदाता क्यों माना जाता है तो आइए इस विषय पर चर्चा करते हैं। शनिदेव की माता छाया ने शनिदेव के गर्भ के समय भगवान शिव की घोर तपस्या की थी। जिसका प्रभाव शनिदेव पर भी पड़ा। शनिदेव श्याम वर्ण के हो गए थे। उनका श्याम वर्ण होने के कारण शनि देव के पिता सूर्यदेव ने अपनी पत्नी छाया पर संदेह किया था तब शनिदेव के क्रोध के कारण परिणाम स्वरूप सूर्यदेव भी काले हो गये थे उनको कुष्ठ रोग हो गया था। शनिदेव ने भगवान शिव को प्रसन्न करके वरदान प्राप्त किया था कि वे लोगों को कर्मों के अनुसार ही फल देंगे।
राजगुरू पंडित रामदेव उपाध्याय- 98296 60721
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