May 21, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 25 जुलाई 2022। महामहिम राष्ट्रपति के चुनाव में विपक्ष की एकता पूरी तरह से बिखर गई, ये ही नहीं हुआ अपितु बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग भी हुई। वही दृश्य अब उपराष्ट्रपति के चुनाव में भी होता दिख रहा है। इस चुनाव में सीधे सीधे भाजपा नेतृत्त्व वाले एनडीए उम्मीदवार की बहुमत के कारण जीत तय है, इसी वजह से विपक्ष में ज्यादा बिखराव होता दिख रहा है।
महामहिम राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने की घोषणा करते समय यशवंत सिन्हा ने कहा था कि मैं ये चुनाव विपक्ष को एक करने के लिए लड़ रहा हूं। इस चुनाव से विपक्ष एक होगा और उसका असर अगले आम चुनावों पर पड़ेगा। मगर उस चुनाव में भी ये सत्य साबित नहीं हुआ। शिव सेना, बीजू जनता दल, वाईएसआर, अकाली दल, सपा के नेता आदि विपक्ष के उम्मीदवार के साथ नहीं रहे। कांग्रेस सहित अनेक विपक्षी दलों के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। यहां तक कि कुछ सांसदों ने ऐसा ही किया।

इन चुनावों से पहले बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने विपक्षी एकता के लिए बैठक बुलाई थी। मतभेद के बाद भी कांग्रेस उस बैठक में शामिल हुई। लगभग सभी विपक्षी दल एक मंच पर आये। मगर अब उपराष्ट्रपति चुनाव में सबसे पहले ममता ने ही अपना अलग निर्णय लिया है। भाजपा और एनडीए ने बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनकड़ को अपना उम्मीदवार बनाया है, जिनकी ममता सरकार के साथ टकराहट सार्वजनिक थी। इस चुनाव में विपक्ष ने कांग्रेस में रही मारग्रेट अलवा को उम्मीदवार बनाया।

अलवा की उम्मीदवारी घोषित होते ही ममता ने चुप्पी साध ली। फिर निर्णय सुनाया कि वो इस चुनाव से दूर रहेगी। ये एक तरह से विपक्ष के उम्मीदवार का विरोध ही हुआ। अन्य कुछ विपक्षी दल भी अलग सुर में बोल रहे हैं। इसलिए ये तय माना जा रहा है कि उपराष्ट्रपति चुनाव में भी विपक्ष बिखरा बिखरा ही रहेगा और कोई टक्कर भाजपा एनडीए उम्मीदवार को नहीं दे पायेगा।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ये चुनाव अगले आम चुनावों का दृश्य भी स्पष्ट करेंगे, अब साफ साफ दिखने लगा है। कमजोर विपक्ष ज्यादा कमजोर हो सकता है और कोई चुनोती नहीं दे सकेगा।
भाजपा राजनीतिक रूप से अगले आम चुनाव के लिए जहां एक तरफ जहां अपने सहयोगियों को एकजुट कर सकी है वहीं विपक्षी दलों में भी उसने सेंध लगाई है। महाराष्ट्र में शिव सेना टूटकर कमजोर हो चुकी है। एकनाथ शिंदे ने अधिकतर विधायको को अपने साथ लिया वहीं 12 सांसद भी उनके साथ आये हैं। यूपी में सपा से शिवपाल यादव, ओम राजभर भी अलग हो गये हैं। इस बिखराव का लाभ भाजपा को मिलेगा। अगले आम चुनाव के लिए भाजपा ने अभी से तैयारी करनी आरम्भ कर दी है, वहीं विपक्ष अपने को ही संभालने में लगा है। जिसका असर देश के राजनीतिक परिदृश्य पर पड़ना साफ साफ नजर आ रहा है।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार