May 21, 2026
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श्री डूंगरगढ़ टाइम्स, 04 नवम्बर 2022।

🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 04 – Nov – 2022
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि एकादशी 06:10 PM
🔅 नक्षत्र पूर्वाभाद्रपद +00:13 AM
🔅 करण :
वणिज 06:49 AM
विष्टि 06:49 AM
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग व्याघात +03:14 AM
🔅 वार शुक्रवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:46 AM
🔅 चन्द्रोदय 03:33 PM
🔅 चन्द्र राशि कुम्भ
🔅 सूर्यास्त 05:47 PM
🔅 चन्द्रास्त +03:32 AM
🔅 ऋतु हेमंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1944 शुभकृत
🔅 कलि सम्वत 5124
🔅 दिन काल 11:00 AM
🔅 विक्रम सम्वत 2079
🔅 मास अमांत कार्तिक
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 11:55:21 – 12:39:24
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त 08:59 AM – 09:43 AM
🔅 कंटक 01:23 PM – 02:07 PM
🔅 यमघण्ट 04:19 PM – 05:03 PM
🔅 राहु काल 10:54 AM – 12:17 PM
🔅 कुलिक 08:59 AM – 09:43 AM
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 02:51 PM – 03:35 PM
🔅 यमगण्ड 03:02 PM – 04:25 PM
🔅 गुलिक काल 08:09 AM – 09:32 AM
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, रोहिणी, आर्द्रा, पुनर्वसु, पुष्य, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, वृषभ, सिंह, कन्या, धनु, कुम्भ

📜 चोघडिया 📜

🔅चल 06:46:59 – 08:09:35
🔅लाभ 08:09:35 – 09:32:11
🔅अमृत 09:32:11 – 10:54:47
🔅काल 10:54:47 – 12:17:22
🔅शुभ 12:17:22 – 13:39:58
🔅रोग 13:39:58 – 15:02:34
🔅उद्वेग 15:02:34 – 16:25:10
🔅चल 16:25:10 – 17:47:45
🔅रोग 17:47:45 – 19:25:15
🔅काल 19:25:15 – 21:02:45
🔅लाभ 21:02:45 – 22:40:14
🔅उद्वेग 22:40:14 – 24:17:44
🔅शुभ 24:17:44 – 25:55:14
🔅अमृत 25:55:14 – 27:32:43
🔅चल 27:32:43 – 29:10:13
🔅रोग 29:10:13 – 30:47:42

❄️ लग्न तालिका ❄️

🔅 तुला चर
शुरू: 05:29 AM समाप्त: 07:49 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 07:49 AM समाप्त: 10:07 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 10:07 AM समाप्त: 12:12 PM

🔅 मकर चर
शुरू: 12:12 PM समाप्त: 01:55 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 01:55 PM समाप्त: 03:23 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 03:23 PM समाप्त: 04:49 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 04:49 PM समाप्त: 06:25 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 06:25 PM समाप्त: 08:21 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 08:21 PM समाप्त: 10:36 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 10:36 PM समाप्त: अगले दिन 00:56 AM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: अगले दिन 00:56 AM समाप्त: अगले दिन 03:13 AM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 03:13 AM समाप्त: अगले दिन 05:29 AM

🌟देवोत्थान एकादशी 2022 का महत्व🌟

देव जागरण या उत्थान होने के कारण इसको देवोत्थान एकादशी कहते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल एकादशी को चार महीने के लिए सो जाते हैं फिर कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। इन 4 महीनों में देवशयन होने के कारण समस्त मांगलिक काम वर्जित होते हैं। जब देव जाग जाते हैं तभी कोई मांगलिक काम संपन्न हो पाता है। इस दिन उपवास रखने का विशेष महत्व है। कहते हैं इससे एक हजार अश्वमेध यज्ञ और सौ राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है। पौराणिक मान्यतानुसार, इस दिन तुलसी माता का विवाह करना बेहद शुभ माना जाता है। इससे घर में सकारात्मकता आती है।

🌿इस दिन तुलसी विवाह का महत्व🌿

देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह कराने का अत्याधिक महत्व है। इस दिन तुलसी के वृक्ष और शालिग्राम का विवाह कराया जाता है। इसमें भी सामान्य विवाह की तरह तैयारियां की जाती हैं। चूंकि तुलसी को विष्णु प्रिया भी कहते हैं इसलिए नारायण भगवान जब जागते हैं, तो सबसे पहली प्रार्थना तुलसी माता की ही सुनते हैं। तुलसी विवाह का सीधा अर्थ है, तुलसी के माध्यम से भगवान का आह्वान करना। मान्यता है कि जिनकी कन्या नहीं होती है, उन्हें तुलसी विवाह अवश्य कराना चाहिए। इससे कन्यादान का पुण्य प्राप्त होता है।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री
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