May 21, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 13 नवंबर 2022। निमोनिया फेफड़ों से जुड़ा एक संक्रमण यानी इंफेक्शन है. यह दोनों फेफड़ों में भी हो सकता है और एक में भी. निमोनिया के लिए बैक्टीरिया, वायरस और फंगी भी जिम्मेदार हो सकते हैं. फेफड़ों में संक्रमण की वजह से फेफड़ों में हवा के लिए बने पॉकेट्स में सूजन आ जाती है. इन एयर पॉकेट्स को एलविओली कहा जाता है और इनमें फ्लूइड या पस भर जाता है, जिसकी वजह से सांस लेना मुश्किल हो सकता है.

निमोनिया भले ही वायरल हो या बैक्टिरिया की वजह से यह बहुत ही संक्रामक होता है. इसका मतलब है कि निमोनिया के मरीज के के छींकने या खांसने पर जो बूंदें हवा में चली जाती हैं वह किसी अन्य स्वस्थ व्यक्ति को भी निमोनिया का संक्रमण दे सकती हैं. यही नहीं संक्रमित मरीज का बॉडी फ्लूइड यदि जमीन पर गिर जाता है और कोई अन्य व्यक्ति उसके संपर्क में आता है तो उसे भी निमोनिया हो सकता है. हालांकि फंगल निमोनिया एक व्यक्ति से दूसरे में नहीं फैलता.

निमोनिया के प्रकार

निमोनिया को भी चार अलग-अलग भागों में बांटा जाता है. यह निर्धारण निमोनिया के कारण और व्यक्ति कैसे संक्रमित हुआ, इन बातों पर निर्भर करता है.

  • हॉस्पिटल एक्वायर्ड निमोनिया (HAP) जब किसी व्यक्ति को हॉस्पिटल में रहने के दौरान निमोनिया का संक्रमण होता है तो इस प्रकार के निमोनिया को हॉस्पिटल एक्वायर्ड निमोनिया (HAP) कहते हैं. इस तरह का निमोनिया संक्रमण अन्य से ज्यादा गंभीर हो सकता है, क्योंकि हॉस्पिटल में मौजूद बैक्टीरिया एंटीबायोटिक्स के प्रति ज्यादा रजिस्टेंस दिखा सकता है.
  • कम्युनिटी एक्वायर्ड निमोनिया (CAP) जब कोई व्यक्ति किसी मेडिकल या संस्थागत सेटिंग के बाहर निमोनिया से ग्रसित होता है तो ऐसे निमोनिया को कम्युनिटी एक्वायर्ड निमोनिया (CAP) कहा जाता है.
  • वेंटिलेटर एसोसिएटिड निमोनिया (VAP) किसी भी अन्य बीमारी से गंभीर रूप से ग्रसित व्यक्ति को वेंटिलेटर पर रखा जाता है और इस दौरान उसे वेंटिलेटर के कारण निमोनिया हो जाता है तो इसे वेंटिलेटर एसोसिएडिट निमोनिया (VAP) कहा जाता है.
  • एस्पिरेशन निमोनिया भोजन, किसी ड्रिंक या सलाइवा से जब बैक्टीरिया किसी व्यक्ति की सांसों में चला जाता है, तो इसे एस्पिरेशन निमोनिया कहा जाता है. अगर आपको निगलने में समस्या है तो आपको इस तरह का निमोनिया हो सकता है. अगर आप दवा, शराब या अन्य प्रकार के ड्रग्स के प्रभाव में ज्यादा रहते हैं तो आपको इस तरह का निमोनिया हो सकता है.

निमोनिया के लक्षण क्या होते हैं?

निमोनिया एक गंभीर संक्रमण है, जो फेफड़ों को प्रभावित करता है. इसके लक्षण मामूली भी हो सकते हैं और कई बार इसके लक्षण प्राणघातक भी साबित हो सकते हैं. निमोनिया के लक्षणों में शामिल हैं –

  • खांसी के साथ बलगम आना (coughing that may produce phlegm)
  • बुखार
  • पसीना आना या ठंड लगना (sweating or chills)
  • साधारण गतिविधि करने या आराम के दौरान भी सांस लेने में तकलीफ होना
  • छाती में दर्द होना और खांसी या सांस लेने में दर्द बढ़ना
  • थकावट महसूस होना
  • भूख न लगना
  • उलटी या मितली
  • सिरदर्द

उम्र और व्यक्ति के स्वास्थ्य के अनुसार कुछ अन्य लक्षण भी दिख सकते हैं –

  • हो सकता है बच्चों में निमोनिया के कोई लक्षण न दिखें
  • कई बार बच्चों को उल्टी, ऊर्जा की कमी और खाने-पीने में दिक्कत हो सकती है
  • पांच साल से कम उम्र के बच्चों में तेज सांस लेना और सांस के दौरान घरघराहट की आवाज आना भी लक्षण है
  • बुजुर्गों में निमोनिया के हल्के लक्षण दिख सकते हैं
  • बुजुर्गों में भ्रम और शरीर का तापमान सामान्य से कम रह सकता है

निमोनिया के क्यों होता है?

जब रोगजनक आपके फेफड़ों में पहुंच जाते हैं और वहां संक्रमण फैलाते हैं तो उस स्थिति को निमोनिया कहा जाता है. हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता इस इंफेक्शन से लड़ने की कोशिश करती है और इस कोशिश में फेफड़ों में हवा के लिए बनी थैलिया यानी एलविओली में सूजन आ जाती है. इस सूजन की वजह से फेफड़ों में हवा के लिए बनी थैलियों में फ्लूइड और पस भर जाता है, जो निमोनिया के लक्षण पैदा करता है. बैक्टीरिया, वायरस और फंगी सहित कई प्रकार के संक्रामक एजेंटों की वजह से निमोनिया हो सकता है.

बैक्टीरियल निमोनिया : बैक्टीरियल निमोनिया का सबसे आम कारण स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया है. इसके अन्य कारणों में

  • माइकोप्लाज्मा न्यूमोनिया (Mycoplasma pneumoniae)
  • हेमोफिलस इन्फ्लुएंजा (Haemophilus influenzae)
  • लेजिओनेला न्यूमोफिला (Legionella pneumophila)

वायरल निमोनिया : श्वसन संबंधी वायरसों की वजह से भी अक्सर निमोनिया होता है. निम्न वायरल संक्रमण की वजह से निमोनिया हो सकता है –

  • इनफ्लूएंजा (flu)
  • रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (RSV)
  • राइनोवायरस (सामान्य सर्दी-जुकाम)
  • ह्यूमन पैरैनफ्लुएंजा वायरस (एचपीआईवी) संक्रमण
  • ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) संक्रमण
  • खसरा (measles)
  • चिनकपॉक्स (वैरिसेला-जोस्टर वायरस)
  • एडेनोवायरस संक्रमण (adenovirus infection)
  • कोरोनावाइरस संक्रमण (coronavirus infection)
  • SARS-CoV-2 इंफेक्शन (COVID-19 का कारण बनने वाला वायरस)

वायरल और बैक्टीरियल निमोनिया के लक्षण एक जैसे ही होते हैं. हालांकि, वायरल निमोनिया गंभीरता के मामले में हल्का होता है. बिना किसी इलाज के भी वायरल निमोनिया से पीड़ित मरीज को लक्षणों में आराम मिलता है. बता दें कि जिन लोगों को वायरल निमोनिया होता है, उनमें बैक्टीरियल निमोनिया का भी खतरा होता है.

फंगल निमोनिया : मिट्टी में पाए जाने वाले कवक (फंगी) या चिड़िया की बीट (Bird Droppings) से भी निमोनिया हो सकता है. कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में इस प्रकार का निमोनिया ज्यादा होता है. निम्न कुछ प्रकार के कवक आपको फंगी निमोनिया दे सकते हैं.

  • न्यूमोसिस्टिस जीरोवेसी (Pneumocystis jirovecii)
  • क्रिप्टोकोकस प्रजाति (Cryptococcus species)
  • हिस्टोप्लाज्मोसिस प्रजातियां (Histoplasmosis species)

निमोनिया का निदान कैसे होता है?

जब आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो वह सबसे पहले आपकी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानकारी जुटाते हैं. इस दौरान वह आपसे पूछ सकते हैं कि आपको निमोनिया का पहला लक्षण कब महसूस हुआ. इसके बाद वह आपकी शारीरिक जांच करेंगे. इसके तहत वह स्टेथोस्कोप के जरिए आपके फेफड़ों को सुनेंगे और जानेंगे कि कहीं कोई असाधारण अवाज तो नहीं आ रही. आपके लक्षण कितने गंभीर हैं उसके आधार पर डॉक्टर निम्न में से कोई एक या एक से अधिक टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं.

  • छाती का एक्सरे एक्स-रे की मदद से डॉक्टर आपकी छाती में सूजन के लक्षण देखते हैं. अगर सूजन है तो डॉक्टर को उसकी जगह की भी सही-सही जानकारी एक्स-रे से मिल जाएगी.
  • ब्लड कल्चर इस टेस्ट के लिए आपके रक्त की आवश्यकता होती है जो किसी तरह के संक्रमण के बारे में जानकारी देता है. ब्लड कल्चर के जरिए इंफेक्शन का कारण भी पता चल सकता है.
  • स्पुटम कल्चर इस टेस्ट के लिए आपके बलगम की आवश्यकता होती है. लैब में आपके बलगम की जांच करके पता लगाया जाता है कि सूजन का कारण क्या है.
  • पल्स ऑक्सीमीट्री पल्स ऑक्सीमीटर से आपके रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा का पता लगाया जाता है. आपकी उंगली पर पल्स ऑक्सीमीटर लगाकर पता लगाया जाता है कि आपके फेफड़े ब्लड स्ट्रीम में उचित मात्रा में ऑक्सीजन भेज रहे हैं या नहीं.
  • सीटी स्कैन सीटी स्कैन के जरिए आपके फेफड़ों की साफ और ज्यादा डिटेलयुक्त तस्वीर ली जाती है.
  • फ्लूइड सैंपल अगर आपके डॉक्टरों को लगता है कि छाती के प्लूरल स्पेस में पानी जमा हो गया है तो वह सुई की मदद से इस फ्लूइड का सैंपल लेते हैं. इससे संक्रमण के कारम का पता लगाने में मदद मिल सकती है.
  • ब्रॉन्कोस्कोपी ब्रॉन्कोस्कोपी की मदद से फेफड़ों के वायुमार्गों की जांच होती है. इसके लिए एक फ्लेक्सिबल ट्बूय के सिरे पर कैमरा लगाकर उसे धीरे-धीरे गले के जरिए फेफड़ों तक पहुंचाकर जांच की जाती है.

निमोनिया का इलाज क्या है?

निमोनिया का इलाज इसके प्रकार, आपकी स्थिति गी गंभीरता और आपकी ओवरऑल हेल्थ के आधार पर तय होता है. डॉक्टर निमोनिया के इलाज के लिए निम्न प्रोसीजर को अपनाते हैं.

डॉक्टर आपको निमोनिया के लक्षणों से निजात दिलाने के लिए दवाएं दे सकते हैं. यह दवाएं निमोनिया के प्रकार और कारण के साथ ही उसकी गंभीरता पर निर्भर करती हैं. बता दें कि एंटीबायोटिक दवाएं खाने से बैक्टीरियल निमोनिया के ज्यादातर मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है. भले ही आपको लक्षणों में आराम मिल गया हो, इसके बावजूद आपको एंटीबायोटिक का कोर्स पूरा करना चाहिए. ऐसा नहीं करने पर इंफेक्शन पूरी तरह से खत्म नहीं होगा और आगे निमोनिया का इलाज और मुश्किल हो सकता है.

एंटीबायोटिक दवाएं वायरस पर असर नहीं करती हैं. कुछ मामलों में डॉक्टर आपको एंटीवायरल दवाएं लेने को कह सकते हैं. हालांकि, ऐसे भी बहुत से मामले देखने को मिलते हैं जब वायरल निमोनिया कुछ दिन के घरेलू इलाज के बाद अपने आप ठीक हो जाते हैं. फंगल निमोनिया के इलाज के लिए डॉक्टर एंटीफंगल दवाएं खाने को देते हैं. संक्रमण को दूर करने के लिए आपको कई हफ्तों तक दवाएं खानी पड़ सकती हैं. डॉक्टर खासी में राहत देने के लिए आपको कफ सिरप का भी सुझाव दे सकते हैं. खांसने के दौरान निकलने वाले बलगम के साथ आपके फेफड़े साफ हो जाते हैं.

इसके अलावा ओटीसी मेडिसिन का भी आप इस्तेमाल कर सकते हैं. यह दवाएं कैमिस्ट से बिना डॉक्टर के पर्चे के मिल जाती हैं, लेकिन हमारी आपको सलाह है कि डॉक्टर की सलाह से ही दवाओं का सेवन करें. इन दवाओं में एस्पिरिन, आईबूप्रोफेन और एसिटामिनोफेन सॉल्ट शामिल हैं.