






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 7 जनवरी 2023। सोने के बारे में आज तक हम बस इतना ही सुनते आए हैं कि रोजाना 7-8 घंटे की नींद लेना जरूरी होता है. हालांकि सोने की घंटों की जानकारी होने के साथ-साथ यह जानना भी आपके लिए जरूरी है कि किस मुद्रा में सोना आपके लिए बेहतर है. हम सोते वक्त अक्सर वही मुद्रा अपनाते हैं, जो हमें आरामदेह लगती है. ज्यादातर लोग पेट के बल सोना भी काफी पसंद करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पोस्चर में सोना कितना नुकसानदायक साबित हो सकता है? अमेरिका के मैरीलैंड की एक एक्यूपंक्चरिस्ट और कायरोप्रैक्टर डॉ. खनीता सुवर्णसुधी ने उन परेशानियों के बारे में बताया है, जो पेट के बल सोने पर हो सकती हैं.
इंस्टाग्राम पर पोस्ट एक वीडियो में सुवर्णसुधी ने बताया कि पेट के बल लेटने से रीढ़ पर अनुचित दबाव पड़ता है, क्योंकि आप स्वाभाविक रूप से टॉर्सो पर ज्यादा गहराई तक अंदर धंस जाते हैं. इसके अलावा अगर आपके पास मसाज टेबल नहीं है तो आप वास्तव में ठीक से ऐसे सो नहीं सकते हैं. मसाज टेबल आपकी रीढ़ को स्टेबल रखने के लिए काफी अच्छा ऑप्शन है. अगर आप अपने बेड पर पेट के बल सोते हैं तो पूरी रात अपनी गर्दन को मरोड़ते रहते हैं. इससे आपकी रीढ़ को भी कई बार मुड़ना पड़ता है. ज्यादा मरोड़ की वजह से भविष्य में आपको गर्दन में तकलीफ की शिकायत भी हो सकती है.
कोलकाता के फोर्टिस हॉस्पिटल के डॉ. जॉयदीप घोष बताते हैं कि जब पेट के बल सोते हैं तो हमारा ज्यादातर वजन शरीर के बीच के हिस्से पर पड़ता है. जब आप सो रहे होते हैं तो कई बार रीढ़ को स्टेबल रखना मुश्किल हो जाता है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, डॉ घोष ने कहा कि रीढ़ की हड्डी पर स्ट्रेस देने से आपके शरीर के अलग-अलग सिस्टम पर तनाव बढ़ेगा. डॉ घोष ने भी माना कि पेट के बल सोने से गर्दन की पॉजिशन में बाधा पैदा होती है. यह पॉजिशन आपकी गर्दन को घुमाते हुए आपके सिर और रीढ़ की हड्डी को एलाइनमेंट से बाहर कर देती है.
शुरुआत में नहीं दिखेगा प्रभाव
बेली स्लीपिंग के बुरे परिणाम आपको शुरुआत में दिखाई नहीं देंगे. लेकिन आने वाले दिनों में इसकी वजह से गर्दन से जुड़ी समस्या पैदा हो सकती है. डॉ खनीता कहती हैं कि अगर आपको अपने पेट के बल सोने की आदत है तो आप एक सख्त गद्दे का इस्तेमाल कर सकते हैं. या फिर अपने पेल्विस के नीचे तकिया लगा सकते हैं.



