






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 1 अप्रैल 2023। श्रीडूंगरगढ़ अंचल में गत दो वर्षों से जंगली मधुमक्खियों का आंतक लगातार बढ़ रहा है। मोमासर की इचरज देवी पटावरी राबाउमावि में करीब एक हजार बालिकाएं इन मधुमक्खियों के आंतक में पढ़ाई कर रही है। रोजाना यहां आधा दर्जन से लेकर एक दर्जन तक बालिकाएं मधुमक्खियों के काटने से पीड़ा सहन कर रही है। बता देवें अंचल के अनेक गांवों की गुवाड़ में व अनेक खेतों में एक ही परिवार के अनेक लोग इनके कारण घायल तक हो रहें है। परंतु वन विभाग के पास इनके लिए गत वर्ष भी कोई प्रावधान नहीं थे व इस बार भी कोई प्रावधान नहीं है। विभाग के रेंजर जितेंद्र कुमार ने बताया कि गांवो से आए दिन जंगली मधुमक्खियों के काटने के फोन आते है परंतु विभाग के पास इन्हें हटाने का ना तो कोई प्रावधान है ना ही कोई इंस्ट्रूमेंट है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को भी इस बारे में कोई पहल करनी चाहिए।
बंद कर दी स्कूल की ऊपरी मंजिल, हटाने के किए प्रयास भी।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। मधुमक्खियों के खौफ से यहां तिमंजिला स्कूल भवन की सबसे ऊपर वाली मंजिल को बंद करना पड़ा है। दूसरी मंजिल को भी बंद करने की नौबत आ गई है। ऐसे में 12वीं तक की बालिकाओं के बैठने का संकट भी खड़ा हो जाएगा। बालिकाओं व अभिभावकों सहित स्कूल प्रशासन भी बुरी तरह से परेशान है। अभिभावकों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पोषाहार पकाने के समय होने वाले धुंए से परेशान होकर ये उड़ती है और रोजाना कुछ बच्चियों को अपना शिकार बना लेती है। स्कूल प्रबंधन ने इन्हें हटाने के प्रयास करते हुए डीडवाना से स्नेक रेसक्यू एक्सर्पट को बुलाया। एक्सर्पट का हालांकि ये कार्य नहीं है परंतु उसने बालिकाओं के लिए प्रयास किया और दूसरी मंजिल से दो बड़े छत्ते हटाए भी परंतु समस्या का समाधान नहीं हो सका। क्योंकि वे ऊपर की मंजिल के छत्ते हाथ नहीं पहुंचने के कारण नहीं हटा पाए। स्कूल के शिक्षक जगदीश प्रसाद ने बताया कि हालांकि मधुमक्खियों ने स्थान नहीं छोड़ा और पुन वहीं छत्ता बना रही है। प्रधानाचार्य इंद्रा भी इन्हें हटवाने का प्रयास कर रही है।
आखिर कब होगा प्रावधान.?
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। वन विभाग के रेंजर जितेंद्र कुमार ने बताया कि अनेक गांवो से इस समस्या से परेशान ग्रामीणों के फोन आते है। परंतु विभाग भी इसमें कोई मदद नहीं कर पाता है। उन्होंने कहा कि हमनें उच्चाधिकारियों से बात की परंतु अभी तक कोई समाधान नहीं हो सका है। अनेक ग्रामीणों का सवाल होता है कि आखिर कब विभाग के पास प्रावधान होगा। मोमासर के जागरूक युवाओं का कहना है कि विभाग से स्थायी व्यवस्था ना हो तो ना सही परंतु समस्या के समाधान के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था तो रखनी चाहिए।





