


श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 2 सितंबर 2026। नगर निकाय चुनाव 2026 की तारीख नजदीक आते ही शहर की सियासत नई करवटें ले रही है। चुनावी रण में प्रत्याशियों के नाम कल शाम तक पूरी तरह से क्लीयर हो जाएंगे परंतु उससे पहले ही राजनीतिक गलियारों में हलचलें तेज हो गई है। इस बार मुकाबला केवल बीजेपी बनाम कांग्रेस तक सीमित रहने के आसार नहीं हैं। चार दशक से शहर की राजनीति में अपना दबदबा बनाए रखने वाली बीजेपी के सामने इस बार अपनी बादशाहत बचाने की चुनौती है, वहीं कांग्रेस लंबे निकाय चुनाव में बोर्ड बनाकर राजनीतिक सूखे को खत्म करने के लिए बेकरार है। इसी बीच विकास मंच की सक्रियता ने दोनों प्रमुख दलों के समीकरणों को हिला दिया है। CPMI और RLP की मौजूदगी भी कई वार्डों में जीत-हार की कहानी बदल सकती है।
पुराना किला… लेकिन चुनौती इस बार नई
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। बीजेपी के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा से कम नहीं है। चार दशक की राजनीतिक पकड़ केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि शहर की राजनीति में पार्टी के प्रभाव का प्रतीक रही है। लेकिन इस बार वार्डों में टिकट बंटवारा भी चुनौती बनेगा और स्थानीय स्तर पर बनते नए समीकरण और नए चेहरों की मांग ने पार्टी के सामने चुनौती बढ़ा दी है। हालांकि टिकट घोषणा के बाद नाराजों को मनाने के प्रयास भी किए जा रहें है। कुछ लोग दबाव बनाए जाने की बात भी ऑनकैमरा स्वीकार कर रहें है।
कांग्रेस की नजर वापसी पर..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। जानकारों का कहना है कि कांग्रेस के लिए यह चुनाव लंबे इंतजार के बाद वापसी का मौका है। पार्टी के सामने बीजेपी के मजबूत आधार को तोड़ने की चुनौती जरूर है, लेकिन बदलते राजनीतिक माहौल ने कांग्रेस के दावेदारों में उम्मीद जगाई है। कांग्रेस के लिए मुकाबला सीधा भी नहीं है और टिकिट दावेदारों की नाराजगी भी भाजपा के मुकाबले बेहद कम है।
विकास मंच ने बढ़ाई दोनों दलों की बेचैनी
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। चुनाव का सबसे रोचक नया कोण विकास मंच बनकर उभर रहा है। मंच की वार्ड-वार्ड सक्रियता और प्रत्याशियों को लेकर चल रही तैयारियों ने स्थापित दलों की चिंता बढ़ा दी है। मंच की ताकत कितनी सीटों में तब्दील होती है, यह चुनाव के बाद पता चलेगा, लेकिन इतना तय है कि कई वार्डों में वह बीजेपी और कांग्रेस के पारंपरिक वोटों में सेंध लगाने की स्थिति में पहुंच सकता है। त्रिकोणीय मुकाबला बनने पर जीत का अंतर बेहद कम हो सकता है और ऐसे में विकास मंच का हर वोट निर्णायक बन सकता है।
CPMI-RLP की भूमिका भी अहम
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। इसके साथ CPMI और RLP भी चुनावी समीकरणों में अपनी जगह बनाने की कोशिश में हैं। कुछ वार्डों में प्रत्याशी मजबूत माने जा रहें है, ऐसे में मुकाबला त्रिकोणीय से लेकर चतुष्कोणीय बनकर सामने आएगा और चुनाव में हार जीत का अंतर कम होने के साथ ही समीकरण बदल सकते है।
नगरपालिका चुनाव में अक्सर जीत और हार के बीच बहुत बड़ा अंतर नहीं होता है। ऐसे में कुछ दर्जन की नहीं चंद वोटों से वार्ड का परिणाम बदल सकते हैं। यही कारण है कि बड़े दल दूसरे दलों के संभावित उम्मीदवारों और उनके प्रभाव वाले वार्डों पर भी नजरे गड़ाए है।
दिग्गजों की साख बनाम युवाओं की पसंद
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। इस चुनाव में सिर्फ पार्टियों की नहीं, कई दिग्गजों की व्यक्तिगत साख भी दांव पर है। वर्षों से राजनीति में सक्रिय नेताओं के लिए यह चुनाव अपनी पकड़ साबित करने का मौका है, जबकि युवा दावेदार पुराने समीकरणों को चुनौती देने के लिए तैयार नजर आ रहे हैं। मतदाताओं की नई पसंद भी इस चुनाव का महत्वपूर्ण पहलू है। युवाओं का एक वर्ग अब केवल पार्टी के नाम के बजाय चेहरा, काम, व्यवहार और वार्ड में उपलब्धता को प्राथमिकता देता नजर आ रहा है। यही बदलाव पुराने राजनीतिक समीकरणों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है।





