September 3, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 3 सितंबर 2026। नगरपालिका चुनाव का मैदान अब सिर्फ गलियों, चौपालों और जनसंपर्क तक सीमित नहीं है। पुराने प्रचार को पछाड़ कर मोबाइल स्क्रीन भी चुनाव की रणभूमि बन चुकी है। सोशल मीडिया पर शहर की सड़कों, सफाई, जलभराव और अन्य व्यवस्थाओं की तस्वीरें और वीडियो लगातार सामने आ रहे हैं। इनके साथ उठ रहें सवाल सीधे गत नगरपालिका के कार्यकाल और विकास के दावों को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। चुनाव से ठीक पहले सोशल मीडिया पर ‘विकास कहां हुआ?’ और ‘शहर की यह तस्वीर क्यों?’ जैसे सवाल तेजी से तैर रहे हैं। किसी वार्ड की सड़क की तस्वीर वायरल होती है तो कहीं गंदगी और जलभराव के वीडियो राजनीतिक बहस छेड़ देता है। देखते ही देखते स्थानीय मुद्दा सैकड़ों लोगों तक पहुंच रहा है।

सत्ता के लिए डैमेज कंट्रोल की चुनौती।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। गत 5 वर्ष ही नहीं नगरपालिका में सत्तारूढ़ दल के 40 साल के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों के सवाल उठ रहें है। अब सत्ता पक्ष को सिर्फ उपलब्धियां गिनाना ही पर्याप्त नहीं होगा। सोशल मीडिया पर सामने आ रही तस्वीरें और जनता की टिप्पणियां दावों की जमीन पर परीक्षा ले रही हैं। एक ओर उपलब्धियों के पोस्ट सामने आ रहे हैं, तो दूसरी ओर शहर के मौजूदा हालात की तस्वीरें उनके सामने सवाल बनकर खड़ी हैं। यही वजह है कि चुनाव के अंतिम दौर में सत्ता पक्ष के सामने नैरेटिव संभालने और डैमेज कंट्रोल की बड़ी चुनौती दिखाई दे रही है।
विपक्ष के हाथ लगा जनता का मुद्दा।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। वहीं विपक्ष के लिए सोशल मीडिया ने चुनावी मैदान आसान कर दिया है। जो सवाल जनता वर्षों से स्थानीय स्तर पर उठाती रही, वही सवाल अब तस्वीर और वीडियो के साथ हजारों लोगों तक पहुंच रहे हैं। विपक्ष इन पोस्टों को विकास के दावों पर पलटवार करते हुए हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। सड़क, सफाई, नाली, रोशनी और अन्य स्थानीय समस्याओं को लेकर दनादन पोस्टें की जा रही है।
अब चुनाव सिर्फ मैदान में नहीं, मोबाइल में भी
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। चुनाव के बचे दिनों में सोशल मीडिया पर राजनीतिक वार-पलटवार और तेज होने की उम्मीदें यूजर को है। ये पहला चुनाव है, जिसमें प्रत्याशियों की उपलब्धियां, पुराने वादे, शहर की समस्याएं और विकास कार्यों की तस्वीरें लगातार लोगों तक तुरंत पहुंच रही है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस मुद्दे की तस्वीर सोशल मीडिया पर चल गई, वह अब सिर्फ एक वार्ड का मुद्दा नहीं रह जाता है। वह पूरे शहर की चर्चा बन जाता है।
यही कारण है कि इस नगरपालिका चुनाव में सोशल मीडिया किसी के लिए आफत, किसी के लिए अवसर और प्रत्याशियों के लिए जनता की नब्ज टटोलने का सबसे तेज माध्यम बन गया है। अब देखना यह है कि मतदान से पहले मोबाइल स्क्रीन पर कौन-सा नैरेटिव हावी होता है—सत्ता के विकास या विपक्ष का सवालों का.?