May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 11 फरवरी 2021। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩
📜 आज का पंचांग 📜

☀ 11 – Fab – 2021
☀ Shri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि अमावस्या 24:37:12
🔅 नक्षत्र श्रवण 14:05:32
🔅 करण :
चतुष्पाद 12:50:49
नाग 24:37:12
🔅 पक्ष कृष्ण
🔅 योग वरियान 27:31:54
🔅 वार गुरूवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 07:15:19
🔅 चन्द्रोदय चन्द्रोदय नहीं
🔅 चन्द्र राशि मकर – 26:11:13 तक
🔅 चन्द्रवास दक्षिण – 26:11:13 तक
🔅 सूर्यास्त 18:21:35
🔅 चन्द्रास्त 17:56:59
🔅 ऋतु शिशिर

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1942 शार्वरी
🔅 कलि सम्वत 5122
🔅 दिन काल 11:06:15
🔅 विक्रम सम्वत 2077
🔅 मास अमांत पौष
🔅 मास पूर्णिमांत माघ

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:26:15 – 13:10:40
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त :
10:57:25 – 11:41:50
15:23:55 – 16:08:20
🔅 कंटक 15:23:55 – 16:08:20
🔅 यमघण्ट 07:59:45 – 08:44:10
🔅 राहु काल 14:11:44 – 15:35:01
🔅 कुलिक 10:57:25 – 11:41:50
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 16:52:45 – 17:37:10
🔅 यमगण्ड 07:15:19 – 08:38:37
🔅 गुलिक काल 10:01:53 – 11:25:10
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल दक्षिण

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन

📜 आज के चौघड़िया 📜

🔅शुभ 07:15:19 – 08:38:37
🔅रोग 08:38:37 – 10:01:53
🔅उद्वेग 10:01:53 – 11:25:10
🔅चल 11:25:10 – 12:48:27
🔅लाभ 12:48:27 – 14:11:44
🔅अमृत 14:11:44 – 15:35:01
🔅काल 15:35:01 – 16:58:18
🔅शुभ 16:58:18 – 18:21:35
🔅अमृत 18:21:35 – 19:58:13
🔅चल 19:58:13 – 21:34:50
🔅रोग 21:34:50 – 23:11:28
🔅काल 23:11:28 – 24:48:05
🔅लाभ 24:48:05 – 26:24:42
🔅उद्वेग 26:24:42 – 28:01:20
🔅शुभ 28:01:20 – 29:37:57
🔅अमृत 29:37:57 – 31:14:35

❄️ लग्न तालिका ❄️

सूर्योदय का समय: 07:15:19

🔅 मकर चर
शुरू: 05:39 AM समाप्त: 07:01 AM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 07:01 AM समाप्त: 08:51 AM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 08:51 AM समाप्त: 10:17 AM

🔅 मेष चर
शुरू: 10:17 AM समाप्त: 11:53 AM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 11:53 AM समाप्त: 01:49 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 01:49 PM समाप्त: 04:04 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 04:04 PM समाप्त: 06:24 PM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 06:24 PM समाप्त: 08:41 PM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 08:41 PM समाप्त: 10:57 PM

🔅 तुला चर
शुरू: 10:57 PM समाप्त: अगले दिन 01:16 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: अगले दिन 01:16 AM समाप्त: अगले दिन 03:35 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 03:35 AM समाप्त: अगले दिन 05:39 AM

🌷माघ-मौनी अमावस्या 🌷
➡ 11 फरवरी 2021 गुरुवार को मौनी अमावस्या है ।
🙏🏻 माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहते हैं। इस नामकरण के लिए दो मान्यताएं हैं ।
🙏🏻 इस दिन मौन रहना चाहिए। मुनि शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई है। इसलिए इस व्रत को मौन धारण करके समापन करने वाले को मुनि पद की प्राप्ति होती है। इस दिन मौन रहकर प्रयाग संगम अथवा पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए।
🙏🏻 ऐसा माना जाता है इस दिन ब्रह्मा जी ने स्वयंभुव मनु को उत्पन्न कर सृष्टि का निर्माण कार्य आरम्भ किया था इसलिए भी इस अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है।
🙏🏻 ‘पद्म पुराण’ के अनुसार माघ मास के कृष्णपक्ष की अमावस्या को सूर्योदय से पहले जो तिल और जल से पितरों का तर्पण करता है, वह स्वर्ग में अक्षय सुख भोगता है। जो उक्त तिथि को तिल की गौ बनाकर उसे सब सामग्रियों सहित दान करता है, वह सात जन्म के पापों से मुक्त हो स्वर्गलोक में अक्षय सुख का भागी होता है। ब्राह्मण को भोजन के योग्य अन्न देने से भी अक्षय स्वर्ग की प्राप्ति होती है। जो उत्तम ब्राह्मण को अनाज, वस्त्र, घर आदि दान करता है, उसे लक्ष्मी कभी नहीं छोड़ती।
🙏🏻 इस दिन पितृ पूजा, श्राद्ध, तर्पण, पिण्ड दान, नारायणी आदि कर सकते है। वैसे तो प्रत्येक अमावस्या पितृ कर्म के लिए विशेष होती है परंतु युगादि तिथि तथा मकरस्थ रवि होने के कारण मौनी अमावस्या का महत्व कहीं ज्यादा है। अगर आप पितृदोष से पीड़ित हैं अथवा आपको लगता है की आपके पिता, माता अथवा गुरु के कुल में किसी को अच्छी गति प्राप्त नहीं हुई है तो आज तर्पण (विशेषतः गंगा किनारे) जरूर करें।
🙏🏻 अगर आप सौभाग्यशाली हैं और इस दिन गंगा स्नान के लिए जा रहे हैं तो तर्पण के अलावा भी बहुत कृत्य हैं। स्कंदपुराण में भगवान शिव का कथन है ।
🙏🏻 जो पितरों के उद्देश्य से भक्तिपूर्वक गुड़, घी और तिल के साथ मधुयुक्त खीर गंगा में डालते हैं, उसके पितर सौ वर्षों तक तृप्त बने रहते हैं और वे संतुष्ट होकर अपनी संतानों को नाना प्रकार की मनोवाञ्छित वस्तुएं प्रदान करते हैं।
🙏🏻 जो पितरों के उद्देश्य से गंगाजल के द्वारा शिवलिंग को स्नान कराते हैं, उनके पितर यदि भारी नरक में पड़े हों तो भी तृप्त हो जाते हैं।
🙏🏻 जो एक बार भी ताँबे के पात्र में रखे हुए अष्टद्रव्ययुक्त (जल, दूध, कुश का अग्रभाग, घी, मधु, गाय का दही, लाल कनेर तथा लाल चंदन) गंगाजल से भगवान सूर्य को अर्घ्य देते हैं, वे अपने पितरों के साथ सूर्यलोक में जाकर प्रतिष्ठित होते हैं।
🙏🏻 जो गंगा के तट पर एक बार भी पिण्डदान करता है, वह तिलमिश्रित जल के द्वारा अपने पितरों का भवसागर से उद्धार कर देता है।
🙏🏻 पिता/माता/गुरु/भाई/मित्र/रिश्तेदार किसी के भी कुल में कोई किसी भी तरह, किसी भी अवस्था में मरा हो (चाहे अग्नि से या विष से या आत्मदाह अथवा अन्य प्रकार से मृत्यु) आज सब पितरों का उद्धार संभव है।
🙏🏻 *गौशाला में गायों के निमित्त हरे चारे, खल, चोकर, भूसी, गुड़ आदि पदार्थों का दान देना चाहिए तथा गौ की चरण रज को मस्तक पर धारण कर उसे साष्टांग प्रणाम करना चाहिए।
(प. विष्णुदत्त शास्त्री) (8290814026)