May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 11 नवंबर 2021। 🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 11 – Nov – 2021
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि अष्टमी 29:53:30
🔅 नक्षत्र श्रवण 14:59:22
🔅 करण :
विष्टि 18:17:41
बव 29:53:30
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग वृद्धि 28:43:18
🔅 वार गुरूवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 06:52:10
🔅 चन्द्रोदय 13:20:00
🔅 चन्द्र राशि मकर – 26:52:05 तक
🔅 चन्द्र वास दक्षिण रात्रि 02:52 तक
🔅 सूर्यास्त 17:43:25
🔅 चन्द्रास्त 24:12:59
🔅 ऋतु हेमंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1943 प्लव
🔅 कलि सम्वत 5123
🔅 दिन काल 10:51:15
🔅 विक्रम सम्वत 2078
🔅 मास अमांत कार्तिक
🔅 मास पूर्णिमांत कार्तिक

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 11:56:05 – 12:39:30
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त :
10:29:15 – 11:12:40
14:49:45 – 15:33:10
🔅 कंटक 14:49:45 – 15:33:10
🔅 यमघण्ट 07:35:35 – 08:19:00
🔅 राहु काल 13:39:12 – 15:00:36
🔅 कुलिक 10:29:15 – 11:12:40
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 16:16:35 – 17:00:00
🔅 यमगण्ड 06:52:10 – 08:13:34
🔅 गुलिक काल 09:34:58 – 10:56:23
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल दक्षिण

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुष्य, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, मकर, मीन

📜 चोघडिया 📜

🔅शुभ 06:52:10 – 08:13:34
🔅रोग 08:13:34 – 09:34:58
🔅उद्वेग 09:34:58 – 10:56:23
🔅चल 10:56:23 – 12:17:47
🔅लाभ 12:17:47 – 13:39:12
🔅अमृत 13:39:12 – 15:00:36
🔅काल 15:00:36 – 16:22:01
🔅शुभ 16:22:01 – 17:43:25
🔅अमृत 17:43:25 – 19:22:07
🔅चल 19:22:07 – 21:00:48
🔅रोग 21:00:48 – 22:39:29
🔅काल 22:39:29 – 24:18:10
🔅लाभ 24:18:10 – 25:56:52
🔅उद्वेग 25:56:52 – 27:35:33
🔅शुभ 27:35:33 – 29:14:14
🔅अमृत 29:14:14 – 30:52:55

❄️ लग्न तालिका❄️

🔅 तुला चर
शुरू: 05:01 AM समाप्त: 07:19 AM

🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 07:19 AM समाप्त: 09:39 AM

🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 09:39 AM समाप्त: 11:43 AM

🔅 मकर चर
शुरू: 11:43 AM समाप्त: 01:26 PM

🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: 01:26 PM समाप्त: 02:54 PM

🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: 02:54 PM समाप्त: 04:20 PM

🔅 मेष चर
शुरू: 04:20 PM समाप्त: 05:56 PM

🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 05:56 PM समाप्त: 07:52 PM

🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 07:52 PM समाप्त: 10:07 PM

🔅 कर्क चर
शुरू: 10:07 PM समाप्त: अगले दिन 00:27 AM

🔅 सिंह स्थिर
शुरू: अगले दिन 00:27 AM समाप्त: अगले दिन 02:45 AM

🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 02:45 AM समाप्त: अगले दिन 05:01 AM

गोपाष्टमी पर्व पर करें ये गौपूजन।
सनातन धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है गाय के समस्त शरीर में 33 कोटि देवी देवताओं का वास है। यही वजह है कि सनातन धर्म के अनुयायी गाय को पूजते हैं और उसका सम्मान करते हैं। इसी मान्यता पर आधारित है गोपाष्टमी पूजा। हर साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व ब्रज में काफी धूमधाम से मनाया जाता है।

इस दिन देश भर के कृष्ण मंदिरों में भगवान कृष्ण की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन ही भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठा कर भगवान इंद्र के प्रकोप से गोप और गोपियों की रक्षा की थी। वहीं गोपाष्टमी पूजा को लेकर यह भी कहा जाता है कि इस दिन से ही भगवान कृष्ण ने पहली बार गायों को चराना शुरू किया था।

मान्यता है कि इस दिन गाय और उसके बछड़े की पूजा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

🌟गोपाष्टमी पूजा विधि🌟

इस दिन सुबह जल्दी उठ कर गाय और उसके बछड़े को स्नान करवाना चाहिए। फिर उसके बाद उनका शृंगार किया जाता है। बहुत से लोग इस दौरान गाय और बछड़े को आभूषण से सजाते हैं।
गोपाष्टमी के दिन गाय के सींगों पर चुनरी बांधने की परंपरा है।
इसके बाद खुद भी स्नान करें और साफ कपड़े धारण कर लें।
गाय माता के चरणों की धूल से माथे पर तिलक करें और उनका चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
इसके बाद गौ माता की परिक्रमा कर लें।
इसके बाद गाय को बाहर चारा चराने के लिए ले जाया जाता है।
इस दिन दान का भी विशेष महत्व है। इस दिन ग्वालों को दान में पैसे व उपहार देने से घर में सुख-शांति व समृद्धि आती है।

पण्डित विष्णुदत्त शास्त्री (छंगाणी)
8290814026