May 21, 2026
13 अप्रैल 2021 के पंचांग के साथ जाने और भी कई खास बातें आचार्य विष्णुदत्त शास्त्री के साथ।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 13 अप्रैल 2021।🚩श्री गणेशाय नम:🚩

शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।

📜 आज का पंचांग 📜

☀ 13 – Apr – 2021
☀ Sri Dungargarh, India

☀ पंचांग
🔅 तिथि  प्रतिपदा  10:18:32
🔅 नक्षत्र  अश्विनी  14:19:44
🔅 करण :
बव  10:18:32
बालव  23:32:32
🔅 पक्ष  शुक्ल
🔅 योग  विश्कुम्भ  15:14:53
🔅 वार  मंगलवार

☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय  06:11:46
🔅 चन्द्रोदय  06:58:00
🔅 चन्द्र राशि  मेष
🔅 चन्द्र वास पूर्व
🔅 सूर्यास्त  18:57:57
🔅 चन्द्रास्त  20:07:00
🔅 ऋतु  वसंत

☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत  1943  प्लव
🔅 कलि सम्वत  5122
🔅 दिन काल  12:46:11
🔅 विक्रम सम्वत  2078
🔅 मास अमांत  चैत्र
🔅 मास पूर्णिमांत  चैत्र

☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित  12:09:19 – 13:00:23
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त  08:45:00 – 09:36:04
🔅 कंटक  07:02:50 – 07:53:55
🔅 यमघण्ट  10:27:09 – 11:18:14
🔅 राहु काल  15:46:24 – 17:22:10
🔅 कुलिक  13:51:28 – 14:42:33
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम  08:45:00 – 09:36:04
🔅 यमगण्ड  09:23:18 – 10:59:05
🔅 गुलिक काल  12:34:51 – 14:10:37
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल  उत्तर

☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, आश्लेषा, मघा, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, मूल, पूर्वाषाढ़ा, उत्तराषाढ़ा, धनिष्ठा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 मेष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, कुम्भ

🔅 पंचक – बुधवार, 7 अप्रैल (03:00 PM)   से
सोमवार, 12 अप्रैल (11:29 AM) तक

📜 चोघडिया 📜

🔅रोग  06:11:46 –   07:47:32
🔅उद्वेग  07:47:32 –   09:23:18
🔅चल  09:23:18 –   10:59:05
🔅लाभ  10:59:05 –   12:34:51
🔅अमृत  12:34:51 –   14:10:37
🔅काल  14:10:37 –   15:46:24
🔅शुभ  15:46:24 –   17:22:10
🔅रोग  17:22:10 –   18:57:57
🔅काल  18:57:57 –   20:22:02
🔅लाभ  20:22:02 –   21:46:08
🔅उद्वेग  21:46:08 –   23:10:14
🔅शुभ  23:10:14 –   24:34:20
🔅अमृत  24:34:20 –   25:58:25
🔅चल  25:58:25 –   27:22:31
🔅रोग  27:22:31 –   28:46:37
🔅काल  28:46:37 –   30:10:42

❄️लग्न तालिका ❄️

🔅 मीन  द्विस्वाभाव
शुरू: 04:50 AM  समाप्त: 06:15 AM

🔅 मेष  चर
शुरू: 06:15 AM  समाप्त: 07:52 AM

🔅 वृषभ  स्थिर
शुरू: 07:52 AM  समाप्त: 09:48 AM

🔅 मिथुन  द्विस्वाभाव
शुरू: 09:48 AM  समाप्त: 12:03 PM

🔅 कर्क  चर
शुरू: 12:03 PM  समाप्त: 02:23 PM

🔅 सिंह  स्थिर
शुरू: 02:23 PM  समाप्त: 04:40 PM

🔅 कन्या  द्विस्वाभाव
शुरू: 04:40 PM  समाप्त: 06:56 PM

🔅 तुला  चर
शुरू: 06:56 PM  समाप्त: 09:16 PM

🔅 वृश्चिक  स्थिर
शुरू: 09:16 PM  समाप्त: 11:35 PM

🔅 धनु  द्विस्वाभाव
शुरू: 11:35 PM  समाप्त: अगले दिन 01:39 AM

🔅 मकर  चर
शुरू: अगले दिन 01:39 AM  समाप्त: अगले दिन 03:22 AM

🔅 कुम्भ  स्थिर
शुरू: अगले दिन 03:22 AM  समाप्त: अगले दिन 04:50 AM

नवरात्रि हिन्दुओं का एक प्रमुख पर्व है यह प्रत्येक वर्ष दो बार एक बार चैत्र माह में और दूसरे बार अश्विन माह में आते है।
इसके अतिरिक्त माघ माह और आषाढ़ माह में भी नवरात्री आते है जिन्हे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है।

आज से चैत्र नवरात्री 13 अप्रैल मंगलवार से आरंभ होने जा रहा है जो पूरे 9 दिन 21 अप्रैल तक चलेंगे।
हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नौ दिनों तक बसंत नवरात्री में माँ दुर्गा की आराधना की जाती है।

नवरात्रि के नौ दिनों में प्रत्येक दिन देवी दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि पर देवी दुर्गा नौ दिनों तक पृथ्वी पर वास करती हैं, और अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। नवरात्री के यह 9 दिन जिसे दुर्गा पूजा के नाम से भी जाना जाता है अति सिद्ध, शक्तिशाली, पुण्यदायक माने जाते है ।

शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री राम ने भी लंका पति रावण से युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए लंका पर चढ़ाई करने से पहले इन्ही दिनों में देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए माँ की आराधना की थी।

नवरात्रि के पहले दिन माता के भक्त अपने अपने घरो, अपने कारोबार में कलश की स्थापना करते है। शास्त्रों के अनुसार कलश को सदैव शुभ मुहूर्त में ही स्थापित करना चाहिए । प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना के साथ ही नौ दिनों तक चलने वाला नवरात्रि का पर्व आरंभ हो जाता है।
जानिए इस वर्ष कलश की स्थापना किस मुहूर्त में करनी चाहिए ।

चर वेला – प्रातः 09:23 से 11:00 बजे तक
लाभ एवं अभिजीत – प्रातः 11:00 से 01:00 बजे तक

पं. विष्णुदत्त शास्त्री (8290814026)