






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 3 जून 2023। श्रीडूंगरगढ़ उपखण्ड मुख्यालय पर नेशनल हाईवे एवं स्टेट हाईवे बीदासर रोड़ से केवल आधा किलोमीटर की दूरी पर, बड़ी बात यह है कि वन विभाग के मुख्य कार्यालय से चंद कदमों की दूरी पर, पास ही चल रहें वन विभाग के टेंडर के कार्य, दिन रात चलती पेट्रोल कटर मशीनों की कानों को भेदने वाली आवाजें, ट्रेक्टर, जनरेटर, पाईपलाईन, मौके पर बने हुए निर्माण कार्य और रात दिन धधकती भट्टियों में हरे पेड़ों को कोयले में बदलने का क्रम। ये नजारा एक माह से अधिक वनों के रक्षकों की नाक के नीचे चला।इस सब में हजारों हरे पेड़ों से करोड़ों का कोयला बना लेने के बाद जब शनिवार को मामला खुला तो विभागीय अधिकारियों का यह बयान आया कि इस संबध में उन्हें पता नहीं था एवं पता लगते ही कार्रवाही को अंजाम दिया गया है। यहां करीब 1.5 महिनों से लगातार दिन रात 20 से ज्यादा लेबरों द्वारा पेड़ों की कटाई एवं भट्टे में डाल कर कोयला बनाने, कोयले को सप्लाई करने का क्रम जारी रहा और इस दौरान व्हीसल ब्लोरर्स द्वारा बार बार दी गई सूचनाओं व शिकायतों को अधिकारियों द्वारा नजर अंदाज भी किया गया। आखिर कर मामला वन विभाग के सचिव शिखर अग्रवाल तक पहुंचाया गया तो वन विभाग सक्रिय हुआ। हजारों पेड़ों की बली लेने के बाद आखिर खानापूर्ति कर मामले पर लीपापोती की गई। पढ़ें श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स की विशेष रिपोर्ट।
स्थानीय रेंजर से लेकर विभागीय सचिव तक लगाई गुहार, साहब पेड़ों को बचाओ।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। वन विभाग क्षेत्र में चल रहे इस काले धंधे को उजागर करने में कस्बे के जागरूक नागरिकों की मुख्य भूमिका रही। रेलवे स्टेशन निवासी गणेशसिंह एवं मोमासर बास निवासी आंनद जोशी ने इस संबध में पहले स्थानीय अधिकारियों को सूचित किया लेकिन कोई संज्ञान नहीं लेकर उदासीनता बरती गई। पेड़ काटने वाले लोगों ने भी इन दोनों के सामने दावे किए कि विभागीय अधिकारियों के ही निर्देश है एवं उनके निर्देशों पर ही पेड़ काटे जा रहे है। ऐसे में दोनों जनों ने शुक्रवार को जीव रक्षा संस्था बीकानेर के अध्यक्ष मोखराम विश्नोई को सूचना दी। मोखराम ने इस संबध में डीएफओ, सीएफओ, कलेक्टर, संभागीय आयुक्त और यहां तक की वन विभाग के सचिव आईएएस शिखर अग्रवाल तक बात को पहुंचाया। इसके पश्चात वन विभाग सक्रिय हुआ।
यह हुई विभाग की कार्रवाई लेकिन यह सवाल बाकी..
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। बात फैलने एवं उच्चाधिकारियों द्वारा सक्रिय होने के बाद शुक्रवार रात को क्षेत्रीय वन अधिकारी जितेन्द्रसिंह मय बल मौके पर पहुंचें। जितेन्द्रसिंह ने रतनगढ़ निवासी लेबर महेन्द्र नाथ के खिलाफ वन अधिनियम 1953 के तहत मुकदमा दर्ज किया एवं गिरफ्तार भी किया। मौके पर से 30-30 किलो कोयले से भरे हुए 40 कट्टे और करीब 80 क्विंटल लकड़ी भी जब्त की गई है। कहने को तो वन विभाग ने सख्त कार्रवाई की है परंतु मौके की हकीकत कुछ ओर ही कहानी बंया कर रही है। मौके पर प्रयुक्त हुई जेसीबी, पेट्रोल कटर मशीन, जनरेटर, ट्रेक्टर आदि को जब्त नहीं किया गया है। मौके पर 20 से अधिक लेबर होने के बाद भी केवल एक ही जने के खिलाफ मामला दर्ज करना एवं एक ही गिरफ्तारी करना भी मौके पर सवाल उठा रहा है। मौके पर दस से अधिक भट्टियों को मिट्टी बिछा कर ढकने का प्रयास किया गया है और करीब सात चालू भट्टियां जिनमें लकड़ियां दबाई हुई है उनका कोई उल्लेख तक नहीं किया गया है।
छोटा छोटा हिसाब बनता है करोड़ों में।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। वैसे तो कोयला बाजार में बेहद सस्ता केवल 15 रुपए किलो ही बिकता है लेकिन यहां पर करोड़ों के व्यारे न्यारे हो गए है। एक मोटे अनुमान से देखा जाए तो एक पेड़ का वजन 10 क्विंटल तो होता ही है और 10 क्विंटल हरी लकड़ी का कोयला आधा भी माना जाए तो पांच क्विंटल कोयला एक पेड़ से बन रहा था। बाजार मूल्य आंका जाए तो एक पेड़ से मिलने वाला कोयला 7500 रुपए तक बिक रहा था। यहां तो कई बीघा में हजारों पेड़ों को काट दिया गया है तो इस हिसाब से यहां करोड़ों रुपए के व्यारे न्यारे हो गए है।











