






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 17 जनवरी 2024। हमारे क्षेत्र में सरसों की फसल का बिजान रबी की फसल की मुख्य जिंस के रूप में खूब हुआ है। सरसों का बिजान करने वाले किसानों के लिए ये खास खबर कृषि विभाग से आई है। विभाग के अनुसार मौसम में उतार चढ़ाव के कारण सरसों की फसलों में चेंपा (मोयला) कीट लगने की संभावना इस माह में बढ़ जाती है। औसत तापतान 10-20 डिग्री सैल्सियस व मौसम में आद्रता ज्यादा होती है तो चेंपा कीट ज्यादा फैलने की संभावना रहती है। जिससे किसानो की फसलों की पैदावार प्रभावित होती है। ऐसे में कृषि अधिकारी सुरेन्द्र मारू ने बताया कि जनवरी लास्ट या फरवरी फर्स्ट में चेंपा का प्रकोप होने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि किसान अगर इन कीटों की रोकथाम के उपाय नहीं करते है तो फसलों की पैदावार प्रभावित होती है। किसान कृषि अधिकारी या कृषि पर्यवेक्षक से संपर्क कर कीटनाशकों का प्रयोग कर समय रहते इस पर नियंत्रण जरूर करें। मारू ने बताया कि चेंपा कीट का प्रकोप होते ही एक सप्ताह के अंदर पौधे की मुख्य शाखा की लगभग 10 सेमी की लंबाई में चेंपा की संख्या 20 से 25 दिखाई देने पर मैलाथियॉन 50 ई.सी. सवा लीटर अथवा डायमेथोएट(रोओर) 30 ई.सी. एक लीटर दवा प्रति हैक्टेयर 400 से 500 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। मारू ने बताया कि चेंपा कीट का प्रकोप जनवरी माह में अधिक होता है, जिसमें हल्के हरे, पीले या काले रंग का कीट छोटे छोटे समूह में रहकर पौधे के विभिन्न कोमल भागों, फूलों, कलियों व टहनियों पर रहकर रस चूसता है। रस चूस जाने के कारण पौधें की बढ़वार रूक जाती है। कलियां कम आती है और फलियों के दानों की संख्या में भी कमी आती है जिससे कम पैदावार मिलती है। किसान समय रहते इससे बचाव के उपाय अपना कर पैदावार बढ़ा सकते है।





