






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 9 मार्च 2024। इस कॉलम में प्रति शनिवार हम करेंगे हमारे खेत खलिहान की बात। आइए पहले कॉलम में बात करते है क्षेत्र में धीरे धीरे बदल रहें खेती के ट्रेंड की, लगातार नीचे जा रहें जलस्तर और मौसम की मार के बीच किसान को लाभ देने वाली फसल के लिए बढ़ रहें किसान प्रेम की। क्षेत्र में ईसबगोल की बिजाई का रकबा लगातार बढ़ रहा है और किसान सरसों के स्थान पर ईसबगोल को स्थान देने लगे है। ईसबगोल कम पानी व कम मेहनत के साथ अधिक मुनाफा वाली फसल साबित हो रही है। क्षेत्र में बीते समय खरीफ की मुख्य फसल मूंगफली में मौसम की मार से किसानों ने काफी नुकसान झेला और उस नुकसान की भरपाई रबी की फसल ईसबगोल में होने की उम्मीदें जताई जा रही है। श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में इस बार कुल बिजाई क्षेत्र करीब 1,11,175 हेक्टेयर है। हालांकि सर्वाधिक बिजाई का रकबा सरसों ही है। किसानों ने सरसों 28,040 हेक्टेयर का बिजान किया है। वहीं गेंहू 22,140 हेक्टेयर में, ईसबगोल 10,340 हेक्टेयर, चना 32,340 हेक्टेयर, मैथी 7,630 हेक्टेयर व जौ 8,690 हेक्टेयर में बिजान किया गया है। गत वर्ष से सरसों 20 से 25 प्रतिशत कम बिजाई हुई है वहीं सरसों की जगह ईसबगोल का बिजान 20 से 25 प्रतिशत अधिक हुआ है। गत वर्ष ईसबगोल के भाव 14 हजार तक पहुंचे और अभी वर्तमान में इसका भाव 10,000/- से 15,000/- चल रहा है। निकाली हुई उपज भी बाजार में तुरंत अच्छे भावों में बिक जाती है। कृषि विभाग के सहायक निदेशक सुरेंद्र मारू ने बताया कि ईसबगोल में बीमारी का खतरा कम रहता है व इसकी फसल लेना भी अन्य फसलों से आसान है। इसीलिए किसानों का रूझान ईसबगोल की ओर बढ़ रहा है। मारू ने बताया कि गत तीन सालों से लगातार प्रति वर्ष सरसों का बिजाई क्षेत्र कम हो रहा है और ईसबगोल का बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरसों में पाले से नुकसान की आंशकाए अधिक रहती है वहीं ईसबगोल में पाले से नुकसान की आंशका कम रहती है वहीं कम पानी व लागत भी कम होने के साथ मुनाफा अच्छा मिलना इसका कारण है। विभाग के सहायक निदेशक आरडी सुथार ने कहा कि इस बार श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में अब तक किसानों की फसलें अच्छी है और अभी तक मूंगफली की फसल में जो नुकसान किसानों को हुआ उसकी थोड़ी भरपाई होने की उम्मीद ईसबगोल से है। सुथार ने बताया कि किसान प्रमाणित बीज ओर खेती के संबंध में कृषि विशेषज्ञों से समय समय पर जानकारी लेकर पैदावार लें तो पैदावार अच्छी गुणवत्ता के साथ अधिक भी होगी। औषधीय गुणों के कारण ईसबगोल की व्यापारिक फसल क्षेत्र के किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो रहा है।
किसानों में चर्चा बना ईसबगोल।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। क्षेत्र में किसान वर्ग में इस बार ईसबगोल की चर्चा है और इससे हो रहा फायदा उन्हें आकर्षित कर रहा है। गांव लिखमादेसर के किसान मांगीलाल तिवाड़ी ने बताया कि इस बार खेतों में ईसबगोल, चना व जौ में अच्छा सुआव है और अच्छी पैदावार होने की पूरी उम्मीद है। क्षेत्र के गांव लिखमादेसर के किसान मदनलाल ज्याणी ने पहली बार अपने खेत में 5 बीघा में ईसबगोल का बिजान किया है। ज्याणी ने बताया कि गत वर्ष 10 बीघा में सरसों की उपज ली परंतु इस वर्ष 5 बीघा में सरसों व 5 में ईसबगोल की बुवाई है। फसल अच्छी है और अगली बार ईसबगोल का क्षेत्रफल बढाने का विचार कर लिया है। इसी गांव के किसान मांगीलाल तिवाड़ी ने बताया कि उन्होंने भी पहली बार अपने खेत में ईसबगोल की बुवाई की है और वे इसे अगली बार ओर अधिक जगह देंगे। किसान मूंगफली के नुकसान की भरपाई ईसबगोल से होने की चर्चा कर रहें है।
बीमारियों का प्रकोप कम।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ की रेतीली भूमि ईसबगोल के लिए उपयुक्त है और इसकी पानी की आवश्यकता भी कम है। वहीं इसमें बीमारियों का प्रकोप कम होता है कीटनाशकों का खर्च भी कम हो रहा है। बाजार में भाव अच्छे मिलने से किसानों को दोहरे लाभ वाली फसल साबित हो रही है। किसानों का विश्वास भी ईसबगोल की फसल के लिए बढ़ने लगा है ओर यही कारण है कि ईसबगोल की बिजाई का क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है।







