






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स।
हर देश के लिए सार्वजनिक शांति सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। इसलिए सार्वजनिक शांति को नुकसान पहुंचाने वाले को न केवल अपराधी माना जाना चाहिए बल्कि उसे दंडित भी किया जाना चाहिए। भारतीय न्याय संहिता में ऐसे अपराधों के लिए विशेष धाराएं है, ऐसे अपराधों को “सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध” कहा जाता है।
आप भी जाने कि सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध का क्या अर्थ है.?
सार्वजनिक शांति के विरुद्ध अपराध वे आचरण या कार्य हैं जो समाज की शांति और सौहार्द को बाधित करते हैं। ये वे कार्य हैं जो सामाजिक व्यवस्था को बिगाड़ते हैं। ऐसे कृत्यों से आम जनता को असुविधा, चिंता या परेशानी हो सकती है और समाज के सामान्य कामकाज में व्यवधान पैदा हो सकता है। ये वे अपराध हैं जो लोगों में अशांति या भय पैदा करने की क्षमता रखते हैं।
ऐसे अपराधों को गंभीर प्रकृति का माना जाता है। ऐसे अपराधों को आपराधिक बनाने के पीछे उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनी रहे।
गैरकानूनी या विधिविरुद्ध जमावड़ा:-
बीएनएस की धारा 189 (1) गैरकानूनी जमावड़े कि जानकारी देते हुए इसे अपराध बताया है। इस अपराध को करने के सामान्य इरादे से व्यक्तियों (पांच या पांच से अधिक) की भीड़ के रूप में परिभाषित किया गया है। जमावड़े का इरादा किसी कानूनी प्रक्रिया या कानून के क्रियान्वयन का विरोध करना भी हो सकता है। सरल शब्दों में, किसी भी सभा को गैरकानूनी माना जा सकता है यदि उसका उद्देश्य समाज के लिए विघटनकारी या हानिकारक हो या राज्य के शांतिपूर्ण कामकाज को बाधित करना हो।
सजा:- विधि विरुद्ध जमावडे में जानबूझकर शामिल होने पर 6 माह तक कि जेल व जुर्माने कि सजा हो सकती है। वहीं सक्षम अधिकारी द्वारा ऐसे जमावडे या सभा को हटाने का आदेश देने के बाद भी कोई जमाव में शामिल रहता है तब उसे दो वर्ष तक कि जेल हो सकेगी।
दंगा:- बीएनसी की धारा 194 (1) दंगा से संबंधित है। इसे ऐसे गैरकानूनी जमावड़े के रूप में परिभाषित करती है जिसमें संपत्ति या व्यक्तियों के खिलाफ हिंसा या बल का प्रयोग होता हो या ऐसी हिंसा या बल का प्रयोग करने की धमकी शामिल है। सामान्य अर्थ मे दंगा को सार्वजनिक स्थान पर दो या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच लड़ाई के रूप में परिभाषित किया गया है, जिससे जनता में भय या आतंक फैल जाता है।
सजा:- सामान्य दंगा करने वाले को एक माह तक कि जेल व जुर्माने कि सजा दी जाएगी।
घातक हथियार लेकर दंगा करना:-
जो कोई भी व्यक्ति घातक हथियार से या किसी ऐसी चीज से, जिसका उपयोग अपराध के हथियार के रूप में किया जाता है, लेकर दंगा करता है और मृत्यु का कारण बनने की संभावना पैदा करता है तो इसे बीएनएस में धारा 189 (4) जिसे पुराने कानूनों मे धारा 144 के नाम से जाना जाता था में शामिल कर दो वर्ष तक कि जेल व जुर्माने कि सजा का प्रावधान किया गया है।
विधिविरुद्ध जनसमूह का प्रत्येक सदस्य बराबर का अपराधी:-
यदि विधिविरुद्ध जनसमूह के किसी सदस्य द्वारा उस जनसमूह के सामान्य उद्देश्य की पूर्ति में कोई अपराध किया जाता है, या ऐसा अपराध किया जाता है जिसके बारे में उस जनसमूह के सदस्य जानते थे कि उस उद्देश्य की पूर्ति में ऐसा अपराध किये जाने कि सम्भावना है, तो प्रत्येक व्यक्ति, जो उस अपराध के किए जाने के समय उसी जनसमूह का सदस्य है, उस अपराध का दोषी माना जाएगा। वहीं पांच या अधिक व्यक्तियों के समूह में जानबूझकर शामिल होना या उसमें बने रहना, जब उसे तितर-बितर होने का आदेश दिया गया हो। पुराने कानूनों कि सबसे प्रचलित धारा 151 को नये कानूनों में 189 (5) बना दिया है इसके अनुसार जब कोई पांच या अधिक व्यक्तियों के किसी ऐसे जमावड़े में जानबूझकर शामिल होगा। जिससे लोक शांति में विघ्न पड़ने की संभावना है, व ऐसे जमावड़े को तितर-बितर हो जाने का विधिपूर्वक आदेश दे दिया गया है, तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास से, जिसे छह महीने तक बढ़ाया जा सकता है, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा।
दंगा आदि दबाने के दौरान लोक सेवक पर हमला करना या बाधा डालना।
जो कोई लोक सेवक विधिविरुद्ध जनसमूह को तितर-बितर करने या दंगा दबाने के प्रयास कर रहा हो, या लोक सेवक के नाते अपना कर्तव्य निर्वहन कर रहा हो, के उपर कोई हमला करेगा या हमला करने की धमकी देगा, या बाधा पहुंचाएगा या ऐसे लोकसेवक पर आपराधिक बल का प्रयोग करेगा, तो अपराधी को बीएनएस कि धारा 195 (1) के तहत कारावास जिसकी अवधि तीन वर्ष तक की हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से, दंडित किया जाएगा।
धार्मिक या सामाजिक दंगा:-
जब धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना तथा सद्भाव बनाए रखने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला कार्य किया जाता है तो ऐसे भारतीय न्याय सहिंता में धारा 196 के तहत परिभाषित किया गया है। बोले गए या लिखे गए शब्दों से, या संकेतों या दृश्य चित्रणों द्वारा जब कोई धर्म, मूलवंश, जन्मस्थान, निवास, भाषा, जाति या समुदाय या किसी भी अन्य आधार पर विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूहों या जातियों या समुदायों के बीच वैमनस्य या दुश्मनी, घृणा या दुर्भावना की भावनाओं को बढ़ावा देता है या बढ़ावा देने का प्रयास करता है, या ऐसा कोई कार्य करता है जो विभिन्न धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूहों या जातियों या समुदायों के बीच सद्भाव बनाए रखने पर प्रतिकूल प्रभाव डालता हो, और जो सार्वजनिक शांति को भंग करता हो या भंग करने की संभावना हो, या कोई आंदोलन या अन्य समान गतिविधि आयोजित करता है या भाग लेता है जिससे किसी भी समाज में भय या चिंता या असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती हो या उत्पन्न होने की संभावना हो तो ऐसी दशा मे अपराधी को तीन वर्ष तक के कारावास या जुर्माने या दोनों से दंडित किया जाएगा।
पूजा स्थल आदि में किया गया अपराध:-
जो कोई किसी पूजा स्थल में या धार्मिक अनुष्ठान करने में लगी किसी भीड़ में धार्मिक या सामाजिक भावना भड़काने जैसा कोई अपराध करेगा, तो उसे पांच वर्ष तक के कारावास से दंडित किया जाएगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा।
एडवोकेट अनिल धायल
9660801700




