






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स – लोक सेवक का सामान्य अर्थ होता है कोई ऐसा सरकारी अधिकारी जिसे किसी सरकारी कामकाज के लिए केंद्रीय या राज्य सरकार द्वारा नियुक्त किया गया है। तथा वह इसके बदले उस अधिकारी को पारिश्रमिक का भुगतान करती है। लोक सेवक शासन के अधीन होते हैं समस्त कार्यपालिका कार्यों का संचालन एवं संपादन लोक सेवकों द्वारा किया जाता है। शासन की सफलता या असफलता लोक सेवक पर निर्भर करती है। लोक सेवक जितने ईमानदार व कर्तव्यनिष्ठ होंगे शासन उतना ही साफ सुथरा होगा। लोक सेवक भ्रष्टाचार से दूर रहें और उसमें न्याय और कर्तव्यनिष्ठा की भावना बनी रहे। संहिता में कतिपय आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं, अर्थात ऐसे अपराधों का जो केवल लोक सेवक द्वारा ही कारित किए जा सकते हैं।
भारतीय न्याय संहिता के अध्याय 12 में सामान्य रूप से चार प्रकार के अपराधों का उल्लेख किया गया है:-
1)- घूस अथवा रिश्वत के सहवर्ती अपराध।
2)- बेमानीपूर्ण कार्य।
3)- विधि विरुद्ध कार्य।
4)- लोक सेवक का प्रतिरूपण।
किसी व्यक्ति को क्षति पहुँचाने के लिए लोक सेवक द्वारा क़ानून कि अवज्ञा:-
बीएनएस कि धारा 198 के अनुसार जब कोई लोकसेवक होते हुए विधि के किसी ऐसे निर्देश की पालना नहीं करता है। जिसका पालन लोक सेवक के नाते उसे करना है। यह जानते हुए अवज्ञा इस आशय से करेगा कि ऐसी अवज्ञा से वह किसी व्यक्ति को क्षति कारित करेगा तो ऐसी स्थिति मे लोकसेवक को सादा कारावास जिसकी अवधि 1 वर्ष तक की हो सकेगी या जुर्माने से दंडित किया जाएगा। जैसे किसी अधिकारी द्वारा न्यायलय के किसी आदेश कि पालना नहीं करने से किसी को क्षति पहुँचती है तो ऐसा कृत्य इसी धारा मे शामिल किया जाएगा। जान-बूझकर किसी व्यक्ति को क्षति कारित करने के आशय से विधि की अवज्ञा करने वाले लोक सेवकों के लिए यह धारा दंड की व्यवस्था करती है लेकिन यदि कोई लोकसेवक केवल नियमों का उल्लंघन करता है तो वह इस धारा के अंतर्गत दंडनीय नहीं है।
क़ानून के अधीन किसी निर्देश कि लोक सेवक द्वारा अवज्ञा करना:- बीएनएस में धारा 199 में इस तरह के कार्य को तीन भागों में बांटा जाकर अलग-अलग परिस्थिति बताई गई है।
(क) लोक सेवक विधि के अधीन के निदेश की अवज्ञा करता है। या इस धारा के अनुसार विधि के किसी ऐसे निदेश की जो उसको किसी अपराध या किसी अन्य मामले में अन्वेषण के प्रयोजन के लिए किसी व्यक्ति की किसी स्थान पर उपस्थिति की अपेक्षा किए जाने से प्रतिषिद्ध करता है, जानते हुए अवज्ञा करता है। सामान्य अर्थ मे विधि के आदेश के बावजूद किसी अपेक्षित व्यक्ति को विधि के सामने पेश नहीं करना इसमें शामिल है।
(ख) किसी व्यक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव डालने जैसी जांच या अंवेक्षण करना व जानते हुए भी विधि के निदेश कि अवज्ञा करना इसमें शामिल किया गया है।
(ग) जब कोई लोकसेवक संगेय अपराध के सबंध मे दी गई सूचना को लेखबद्ध करने में असफल रहता है। जैसे किसी पुलिस अधिकारी को किसी महिला ने रेप के संबंध में कोई सूचना दी तथा पुलिस अधिकारी उसकी सूचना पर बलात्कार से संबंधित कोई रिपोर्ट नहीं लिख रहा है। यहां पर धारा 199 के अधीन इस प्रकार का अपराध कारित करने पर 6 महीने से 2 वर्ष तक के कठोर कारावास और जुर्माने के दंड का प्रावधान किया गया।
पीड़ित का उपचार न करने पर दंड:- किसी भी अस्पताल जो चाहे सरकारी हो या प्राइवेट, चाहे केंद्र सरकार द्वारा स्थापित हो चाहे राज्य सरकार द्वारा, में कार्यरत कोई लोकसेवक अगर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता कि धारा 397 का उलंघन करता है व किसी पीड़ित का उपचार करने से मना करता है तो एक वर्ष तक के कारावास व जुर्माने से दण्डित किया जा सकता है।
लोकसेवक द्वारा अशुद्द व झूटे दस्तावेजों कि रचना करना:- कोई लोकसेवक किसी दस्तावेज या इलेक्ट्रोनिक अभिलेख कि रचना या अनुवाद करते समय जानते हुए भी या जानबूझकर अशुद्ध या गलत दस्तावेज तैयार करता है और उसे विश्वास होता है कि इससे वह किसी कि क्षति कारित करेगा तो उसे बीएनएस कि धारा 201 के अनुसार तीन वर्ष तक कि जेल व जुर्माने कि सजा दी जा सकेगी।
लोकसेवक का विधि विरूद्ध व्यापार करना:- किसी का लोक सेवक होते हुए भी व्यापार करना या इस बात के लिए वैध रूप से आबद्ध होते हुए कि उसके द्वारा व्यापार नहीं किया जाना चाहिए। वह लोक सेवक व्यापार में लगता है तो एक वर्ष तक का कारावास व जुर्माना या सामुदायिक सेवा से दण्डित किया जाएगा।
लोक सेवक द्वारा विधि विरुद सम्पत्ति खरीदना या बोली लगाना:- किसी लोक सेवक को जानकारी होती है कि वैधानिक रूप से उसके द्वारा कतिपय सम्पत्ति को नहीं खरीदा जाना चाहिए। न ही बोली लगाई जानी चाहिए। फिर भी लोकसेवक द्वारा अपने नाम से, या किसी दूसरे के नाम से, दुसरों के साथ संयुक्त रूप से, या अंशो में उस सम्पत्ति को कारय करता है या बोली लगाता है तो दो वर्ष तक के कारावास व जुर्माने कि सजा होंगी और खरीदी गई सम्पत्ति अधिकृत कर ली जाएगी।
कपटपूर्ण तरीके से लोकसेवक कि पोशाक पहनना:- बीएनएस कि धारा 205 के अनुसार किसी के द्वारा कपटपूर्ण तरिके से लोकसेवक कि या उसके जैसी पोशाक पहनी जाती है तो उसे तीन माह तक कि जेल व जुर्माना जो पांच हजार रूपये तक हो सकता है या दोनों से दण्डित किया जाएगा।




