






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 10 दिसम्बर 2020। ग्रामीण अंचल की महिलाऐं परिवार, पशु, खेती-बाड़ी, नाते रिश्तेदारी संभालने में दक्ष और अब आने वाले पांच साल तक पूरे क्षेत्र का विकास इन चुड़ियों वाले हाथों में होगा। पर्दें के पीछे रहने के साथ ही ये महिलाऐं राजनीति से अब तक पूर्णतया दूर थी परन्तु इस बार महिला प्रधान के लिए आरक्षित सीट की मजबूरी ने श्रीडूंगरगढ़ पंचायत समिति में 85 प्रतिशत सदस्यों के पद महिलाओं के खातों में डाल दिए है। सदस्यों की कुल 21 संख्या में 17 महिला सदस्य है जो जनता ने चुन कर भेजें है और मात्र 4 पुरूष सदस्य पंचायत समिति में होगें। हालांकि ये महिला सशक्तिकरण नहीं होगा क्यों कि काम महिलाऐं नहीं करेगी उनके प्रतिनिधि ही करेंगे फिर भी ये सदस्य महिलाऐं कुर्सियों पर बैठेगी और उनके प्रतिनिधि उनके पास की सीट पर बैठाया जाएगा और ये देख कर पंचायतों में इस आधी आबादी को उनका हक दिलवाने के समर्थकों को सुखद एहसास जरूर होगा। महिला नेत्री के मामले में हमारे क्षेत्र में अकाल ही रहा है संभव है कि ये तस्वीर आने वाले पांच सालों में बदल सकें और महिला सदस्यों के घर में या प्रभाव में कोई महिला राजनीति में उतर सकें। एक सुखद परिणाम ये भी रहा है कि क्षेत्र में इस बार चुनाव हारने वाली कई महिलाऐं शिक्षित होने के साथ ही अपने अधिकारों के प्रति जागरूक भी नजर आई है।



