May 22, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 5 सितंबर 2025। श्रीडूंगरगढ़ में पिछड़ों को पढ़ाई महंगी पड़ रही है और सरकार समाज कल्याण नहीं कर पा रही है। यहां सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित डॉ बीआर अंबेडकर छात्रावास सितंबर माह तक शुरू ही नहीं हो पाया है। छात्रावास में 40 सीटें है और जुलाई 2025 में 27 विद्यार्थियों ने यहां प्रवेश लिया। प्रवेश के बाद लगातार बच्चे और उनके अभिभावक परेशान हो रहें है। वे प्रतिदिन छात्रावास शुरू करने की मांग कर रहे है। बालक जो ग्रामीण क्षेत्रों के है और यहां के विद्यालयों में प्रवेश ले चुके है, वे बुरी तरह से पीड़ित है। बच्चों ने बताया कि स्कूल की पढ़ाई का जो नुकसान हो रहा है उसका खामियाजा उन्हें ही भुगतना होगा। इनमें अधिकांश बच्चों ने पीएमश्री राउमावि ताल मैदान में विज्ञान व कृषि संकाय में प्रवेश ले रखा है। इनका छात्रावास में प्रवेश हो गया तो परिजनों ने राहत की सांस ली। परंतु अब होस्टल का संचालन ही नहीं होने ये बच्चे और इनके अभिभावक बुरी तरह से निराश हो रहें है। ये छात्र अपने शिक्षण के हो रहें नुकसान से आहत हो रहें है। कुछ विद्यार्थियों ने तो पीजी में रहने का प्रयास किया है, वहीं कुछ ने रूम लेकर रहने का प्रयास कर रहें है। छात्रों के अभिभावकों ने बताया कि आर्थिक रूप से उन पर जो भार पढ़ रहा है, वे उससे परेशान होकर बच्चों के एडमिशन कैंसिल करने तक का मन बना रहें है। कुछ अभिभावकों ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि जब छात्रावास शुरू ही नहीं था, तो पोर्टल से इसका नाम हटाया क्यों नहीं। अब विभाग इस लापरवाही से बच्चों के भविष्य को बिगाड़ने का काम कर रहा है। अभिभावकों ने बताया कि उन्हें लगातार दो दिन, तीन दिन, 15 अगस्त, अवकाश होने के बहाने दिए जा रहें है। कुछ अभिभावकों आरोप लगाते हुए कहा कि अब प्रवेश के लिए पुन: आवेदन लिए जा रहें है, परंतु जिनका ले रखा है उनके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था तो की जानी चाहिए थी। कुछ परिजनों ने संपर्क पोर्टल पर भी जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय कर सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग करते हुए शिकायत भी दर्ज करवाई है। नाराज अभिभावकों ने विभाग के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताते हुए सुनवाई नहीं होने के आरोप लगाए है।
जर्जर है भवन, हाइवे पर देखा एक घर।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। छात्रावास के इंचार्ज राकेश सारण ने बताया कि वर्तमान में छात्रावास भवन को जर्जर घोषित कर दिया गया है। इसलिए इसमें बच्चों को रखा जाना संभव नहीं है। अब नेशनल हाइवे पर एक मकान देखा गया है, जिसका पीडब्ल्यूडी द्वारा किराया तय कर प्रस्ताव बीकानेर व जयपुर भेज दिया गया है। उसकी स्वीकृति मिल जाने पर हॉस्टल शुरू कर दिया जाएगा। सारण ने कहा कि शीघ्र होस्टल शुरू करने के पूरे प्रयास किए जा रहें है।
सीटें रिक्त, बच्चे नहीं ले रहें रूचि।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। इस छात्रावास में 40 में 27 सीटों पर प्रवेश हुआ है, वहीं 13 सीटें रिक्त है। राकेश सारण ने बताया कि रिक्त सीटों के लिए पुन: 15 सितंबर तक आवेदन लिए जा रहें है। परंतु बता देवें हॉस्टल संचालन नहीं होने के कारण विद्यार्थी निराश है और अब प्रवेश के लिए रूचि नहीं ले रहें है। होस्टल का संचालन शुरू होता तो ये सीटें भी भर जाती है।
ये ले सकते हैं प्रवेश, मिलती है ये सुविधाएं।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। विभाग द्वारा जिले में 21 राजकीय, दो अनुदानित एवं तीन निजी सहभागिता योजनान्तर्गत 26 छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है। जिनकी कुल स्वीकृत क्षमता 1 हजार 324 है। वे विद्यार्थी जो घर से दूर रहकर विद्यालयों व महाविद्यालयों में अध्ययनरत है। उन विद्यार्थियों को आवास अनावर्तक सुविधा, पोशाक, गुणवत्तापूर्ण भोजन, बेहतर शैक्षणिक वातावरण आदि सुविधा नि:शुल्क उपलब्ध करवाए जाने के प्रावधान है। इन छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को भोजन, नाश्ता, पोशाक, जूते, तौलिया, तेल, साबुन, बिजली पानी के लिए राज्य सरकार द्वारा तीन हजार 250 रूपए प्रति माह (9.5 माह प्रतिवर्ष) निर्धारित है। इसमें अन्य पिछड़ा वर्ग सहित, अनुसूचित जाति, जनजाति, स्वच्छकार, विमुक्त घुमंतु एवं अर्द्धघुमंतु, मिरासी व भिश्ती समुदाय, अति पिछड़ा वर्ग, आर्थिक पिछड़ा वर्ग के छात्र व छात्रा के परिवार की वार्षिक आय 8 लाख रूपए से अधिक नहीं होनी चाहिए।