May 20, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स के फेसबुक पेज पर एक लाख फॉलोवर बन श्रीडूंगरगढ़वासियों ने जो विश्वास टाइम्स पर दिखाया है उसी को जिम्मेदारी मानते हुए पाठकों तक क्षेत्र की राजनीति, प्रशासनिक एवं सामाजिक क्षेत्रों की अंदरखाने की बातें विशेष आलेख अनकही-अनसुनी में प्रकाशित करने का क्रम शुरू किया गया है। इस आलेख को क्षेत्र के प्रबुद्धजनों की खासी सराहना मिल रही है एवं आप भी इस आलेख से जुड़ी अपनी राय, टिप्पणी 9414417401 पर वाटसएप कर भेज सकते है, अथवा फेसबुक पर आलेख की लिंक के नीचे अपना कमेंट कर सकते है।
“तुलसी बिरवा बाग में, सींचे से कुम्हिलाय। राम भरोसे जो रहे, पर्वत पर हरियाय।”
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। “तुलसी बिरवा बाग में, सींचे से कुम्हिलाय। राम भरोसे जो रहे, पर्वत पर हरियाय।” महाकवि गोस्वामी तुलसीदासजी महाराज कि इन पंक्तियों का भावार्थ यही है कि व्यक्ति अपनी पूरी ताकत से जो काम नहीं कर पाता उससे भी बड़े काम राम-भरोसे से हो जाते है। श्रीडूंगरगढ़ के राजनीतिक हलकों में देखें तो राम की जगह राज-भरोसे में ऐसे काम हो जाने की चर्चा बड़े जोरों-शोरों से चल रही है। गोस्वामी तुलसीदास की पंक्तियों में राम की जगह राज कर दिया जाए तो ये पंक्तियां श्रीडूंगरगढ़ में चरितार्थ होते दिख रही है। यहां इन दिनों नेशनल हाईवे पर नवनिर्मित एक चमचमाता शो-रूम बड़ी चर्चा में है, और हर कोई यही कहता नजर आता है, कि विपक्ष में रहने के दौरान यह सुख मिल जाए तो सत्ता की क्या ही जरूरत पड़ती है। अनकही अनसुनी यह है कि यहां विपक्षी पार्टी के गत 30 वर्षों से मुखिया पद संभाल रहे क्षेत्र के बड़े नेताजी का यह काम उनके स्वंय के सत्तासीन कार्यकाल में उनके अथक प्रयासों के बाद भी नहीं हुआ एवं स्थितियां यह बन गई के उस समय उनके निर्माण को अतिक्रमण मानना पड़ा एवं उन्हें स्वंय खड़े रह कर अपना निर्माण तोड़ना पड़ा। लेकिन अब सुनने में आ रहा है कि राज-भरोसे में हुए चमचमाते भव्य निर्माण को राजकीय मान्यता भी मिल गई है। ऐसे में सत्ताधारी पार्टी के उन कार्यकर्ताओं मन बड़ा दु:खी हो रहा है जो विपक्षी होने के नाते मरने-मारने की हद तक विरोध पैदा कर लेते है। हालांकि प्रबुद्धजन कह रहें है कि गलती भी इन कार्यकर्ताओं की ही है, क्योंकि यह तो हमेशा ही देखने को मिलता है कि पार्टी, विचारधारा एवं सत्ता की लड़ाई छोटे कार्यकर्ताओं के लिए होती है, ऊपरखाने में विरोधी नेता भी एक जाजम पर एक साथ ही दिखते है। और यही कारण है कि किसी भी सत्ताधारी नेता पर हद से ज्यादा भ्रष्टाचार के आरोप लगाने वाले विपक्षी नेता जब स्वंय सत्ता में आ जाते है तो पूर्ववर्ती सत्ताधारी के भ्रष्टाचार पर किसी प्रकार की कार्रवाही के बजाए उसके सभी कर्मों को भूल कर अभय दे देते है। दिल्ली की सत्ता से लेकर स्थानीय स्तर तक यही देखने को मिला है तो इसमें नया क्या है.?

दो बैलों की लड़ाई में मक्के को नुकसान, चर्चित हुई वीर की बगावत।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। अंग्रेजों के समय से बनाए गए प्रशासनिक ढांचे में लंबे समय तक जिला स्तर पर एवं उपखण्ड स्तर पर बड़े अधिकारी को चर्चाओं में राजा ही माना जाता रहा है। और जब बड़े साहब को राजा तो उनके साथ अलग अलग विभागों के अधिकारियों को वजीर, सेनापती आदि भी कहा जा सकता है। इस लिहाज से देखें तो इन दिनों श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र में राजा के खिलाफ ज्ञानवान विभाग के वीर अधिकारी द्वारा बगावत के सुर बड़े चर्चित हो रहे है। प्रशासनिक अमले में चर्चा है कि ज्ञानवान विभाग के वीर अधिकारी अपने विभाग को भी अपनी सल्तनत के रूप में चला रहें है। अब इसे बगावत का नाम दिया तो अतिश्योक्ति नहीं कह सकते। लेकिन अनकही अनसुनी बात को इस कहावत से समझ सकते है कि “दो बैलों की लडाई में मक्के का नुकसान”। अब बगावत में बड़े अधिकारी के सामने ज्ञानवान अधिकारी का बस चल नहीं रहा तो बड़े अधिकारी के आदेशों पर राज काज में जुटे ज्ञानवान विभाग के कार्मिकों पर गाज गिर रही है। ज्ञानवान विभाग के महामहिम के दौरे के दौरान तो स्थानीय वीर अधिकारी ने ऐसी कारसेवा की एक कार्मिक को निलंबित ही होना पड़ा। सुनने में आ रहा है कि अब भी यह कार सेवा जारी है एवं लंबे समय से राजा साहब के आदेशों की पालना में राजकाज में जुटे कार्मिकों की कार-सेवा रिपोर्ट बनवाई जा रही है। अनसुनी बात यह है सुनी गई कि कार्मिकों ने अपने ज्ञानवान विभाग के वीर अधिकारी से इस बगावती तेवरों पर चर्चा की तो उत्तर मिला कि “मजा आ रहा है”। कार्मिकों में चर्चा यही है कि बगावत के मजे लेने है, तो सीधे बड़े साहब से अदावत क्यों नहीं की जा रही, अपने ही विभाग के कार्मिकों को प्रताडित करने से कहां तक अंह संतुष्ट होगा।

आंकड़े झूठ नहीं बोलते लेकिन आंकड़े झूठे बनाए जाते है, गर्मी और आंकड़ों के गणित में उलझे कार्मिक।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। जयपुर के एसी ऑफिसों में बैठे अफसरों को क्या पता कैसे चल रहा है ग्राम रथ अभियान। ये कहना है बेहाल करने वाली गर्मी में प्रदेश के गांवों में रथ लेकर पहुंच रहे सरकार के सारथियों का। इन रथों के कार्यक्रमों के लिए ग्रामीणों को एकत्र करना भी रथ की जिम्मेदारी निभा रहें सारथियों के लिए चुनौती बन गया है। राज्य भर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक ओर तो गर्मी को देखते हुए दोपहर में घर से निकलने से बचने की सलाह दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर गांव गांव घूम रहें रथों के लिए लाभार्थियों को एकत्र करने में पूरा जोर लगाना पड़ रहा है। अब ऐसे में जनता तो जनता है, मन नहीं तो नहीं आ रही कार्यक्रमों में, अनकही अनसुनी बात यह है कि रथ के सारे कार्यक्रम केवल आंकड़ों तक सीमित हो गए है। हालांकि आंकड़े भरने की खानापूर्ति तो जोरों शोरों से पूरी की जा रही है परंतु ग्रामीणों की वास्तविक उपस्थित संख्या लज्जा देने वाली ही है। रथ के सारथी इस गर्मी में झूठे आंकड़ों के मकड़जाल में ऐसे उलझ गए कि भीषण गर्मी में दिमाग गर्म हो रहा है। रथ-यात्रा पूर्ण होने के बाद राज्य भर के विकास के आंकड़ों सामने आएंगें तो विपक्षी आंकड़ों को झूठा बताएगें। लेकिन सच तो यही है कि आंकड़े झूठ नहीं बोलते, बस आंकड़े बनाए ही झूठे जाते रहें है। गांव की चौपालों पर इस सवाल की चर्चा है कि दो माह पहले ऐसी ही यात्रा गांवों में निकल चुकी तो अब फिर से रथ-यात्रा की कहां जरूरत थी, वहीं दबी जुबान में रथ-यात्रा के खर्चों से कईयों का पेट भरे जाने का उत्तर भी सुनने में आ रहा है।