August 30, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स, 21 अगस्त 2026। नगरपालिका चुनावों की तारीख नजदीक आने के साथ ही श्रीडूंगरगढ़ की सियासत गर्माने लगी है। प्रत्याशी मतदाताओं की चौखट तक पहुंचने लगे हैं और सुबह से देर रात तक गली-मोहल्लों में चुनावी बैठकों का दौर चल रहा है। कहीं जातीय समीकरणों पर चर्चा है तो कहीं व्यक्तिगत संपर्क और पुराने कामकाज का हिसाब-किताब लगाया जा रहा है। हर प्रत्याशी अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन इस चुनाव में 10 वार्ड ऐसे हैं जहां जीत-हार का असली गणित महिला मतदाताओं के हाथ में नजर आ रहा है।
महिलाएं तय करेंगी किसके सिर सजेगा जीत का ताज?
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। श्रीडूंगरगढ़ नगरपालिका के 40 वार्डों में से 9 वार्डों में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। संख्या का यह अंतर भले ही कई वार्डों में मामूली दिखाई देता हो, लेकिन करीबी मुकाबले में एक-एक वोट निर्णायक साबित हो सकता है। यही वजह है कि इन वार्डों में प्रत्याशियों की नजर विशेष रूप से महिला मतदाताओं पर टिकी हुई है। चुनावी मैदान में उतर चुके प्रत्याशी घर-घर पहुंचकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। वहीं जागरूक महिला मतदाता भी इस बार केवल आश्वासनों से संतुष्ट होने के बजाय पेयजल, सफाई, नालियों, सड़कों, रोड लाइट और सुरक्षा जैसे सीधे जीवन से जुड़े मुद्दों को लेकर सवाल पूछ रही हैं। दरअसल, वार्ड की मूलभूत सुविधाओं का सबसे सीधा असर महिलाओं पर ही पड़ता है। पानी की सप्लाई बाधित हो तो घर की व्यवस्था प्रभावित होती है, गली में सफाई नहीं हो तो परेशानी महिलाओं को झेलनी पड़ती है और अंधेरी गलियों में रोड लाइट का अभाव सुरक्षा का सवाल खड़ा करता है। ऐसे में इस बार महिला मतदाताओं का मुद्दों के आधार पर मतदान करना चुनावी समीकरणों को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है।
इन 9 वार्डों में महिलाओं का पलड़ा भारी
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। नगरपालिका के उपलब्ध मतदाता आंकड़ों के अनुसार वार्ड 16, 17, 18, 28, 29, 30, 31, 35,36 और 38 में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है।
वार्ड 16 में 829 मतदाताओं में 411 पुरुष और 418 महिलाएं हैं।
वार्ड 17 में 1,262 मतदाताओं में 616 पुरुष और 646 महिलाएं हैं।
वार्ड 18 में 1,066 मतदाताओं में 529 पुरुष और 537 महिलाएं हैं।
वार्ड 28 में 403 मतदाताओं में 186 पुरुष और 217 महिलाएं हैं।
वार्ड 29 में 520 मतदाताओं में 258 पुरुष और 262 महिलाएं हैं।
वार्ड 30 में 600 मतदाताओं में 298 पुरुष और 302 महिलाएं हैं।
वार्ड 31 में 737 मतदाताओं में 366 पुरुष और 371 महिलाएं हैं।
वार्ड 35 में 828 मतदाताओं में 405 पुरुष और 423 महिलाएं हैं।
वार्ड 36 में 931 मतदाताओं में 459 पुरूष और 472 महिलाएं हैं।
वार्ड 38 में 993 मतदाताओं में 495 पुरुष और 498 महिलाएं हैं।
इनमें वार्ड 28 सबसे दिलचस्प है, जहां 186 पुरुषों के मुकाबले 217 महिला मतदाता हैं। यानी यहां महिलाओं की संख्या पुरुषों से 31 अधिक है। वहीं वार्ड 17 में भी 646 महिला मतदाता हैं, जो पुरुष मतदाताओं से 30 अधिक हैं। वार्ड 35 में महिलाओं की संख्या पुरुषों से 18 अधिक है। ऐसे में यदि इन वार्डों में मतदान के दिन महिला मतदाताओं की भागीदारी अधिक रहती है तो चुनावी परिणामों पर इसका सीधा असर पड़ना तय माना जा रहा है। खासकर कांटे के मुकाबले में यह अंतर जीत और हार के बीच की सबसे बड़ी वजह बन सकता है।
महिला मतदाताओं को साधने में जुटे प्रत्याशी
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। महिला मतदाताओं की ताकत को देखते हुए प्रत्याशियों ने भी अपनी रणनीति में बदलाव शुरू कर दिया है। घर-घर संपर्क में महिलाओं से संवाद, वार्ड की समस्याओं को सुनना और भविष्य में समाधान का भरोसा देना चुनाव प्रचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है। इस बार महिला मतदाता यदि ‘कौन हमारा काम करेगा’ के सवाल को केंद्र में रखकर मतदान करती हैं तो कई वार्डों में वर्षों से चले आ रहे राजनीतिक समीकरण भी उलट सकते हैं। यही कारण है कि चुनावी मैदान में मौजूद प्रत्याशियों के लिए महिलाओं की नाराजगी दूर करना और उनका भरोसा जीतना बड़ी चुनौती बन गया है।

पति-पत्नी ने अलग-अलग वार्डों से भरा पर्चा, सारस्वत दंपती की एंट्री से बढ़ी राजनीतिक चर्चाएं।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। नगरपालिका चुनाव में एक और रोचक राजनीतिक घटनाक्रम ने शहर की सियासत को चर्चा में ला दिया है। कांग्रेस के चिर-परिचित चेहरे एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष राधेश्याम सारस्वत ने वार्ड 15 से नामांकन दाखिल किया है, वहीं उनकी पत्नी चंपादेवी ने वार्ड 14 से चुनावी मैदान में उतरते हुए पर्चा भरा है।
राधेश्याम सारस्वत को शहर की कांग्रेस राजनीति में लंबे समय से सक्रिय एवं रणनीतिक भूमिका निभाने वाले नेताओं में गिना जाता है। इस चुनाव में भी टिकट वितरण से लेकर प्रत्याशियों की रणनीति और चुनावी गतिविधियों में उनकी सक्रियता दिखाई दे रही है।
अब पति-पत्नी के दो अलग-अलग वार्डों से चुनाव मैदान में उतरने के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दायरा और बढ़ गया है। समर्थकों में उत्साह है तो राजनीतिक गलियारों में इसके मायने भी तलाशे जा रहे हैं। चुनावी परिणाम आने के बाद पालिका की सत्ता के समीकरण क्या रूप लेते हैं और अध्यक्ष पद की दौड़ में कौन-कौन से चेहरे सामने आते हैं, इसे लेकर भी अभी से चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
फिलहाल इतना तय है कि श्रीडूंगरगढ़ का नगरपालिका चुनाव इस बार केवल प्रत्याशियों के बीच मुकाबला नहीं, बल्कि मतदाताओं के बदलते रुझान, महिला शक्ति, स्थानीय मुद्दों और नए राजनीतिक समीकरणों की भी परीक्षा बनने जा रहा है।