May 21, 2026
रंगभरी एकादशी पर करें ये विशेष धार्मिक कर्म, पढ़ें धर्म कर्म में खास।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 25 मार्च 2021। आज आमलकी एकादशी है, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है। यह एकादशी होली से 4 दिन पहले आती है। आज के दिन भगवान श्रीविष्णु के साथ ही आंवले के वृक्ष की भी विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि जो जातक आमलकी एकादशी के दिन व्रत रखकर भगवान श्रीविष्णु और आंवला जी की पूजा करते हैं, उनके सभी मनोरथ निश्चय ही पूर्ण होते हैं। आंवला भगवान श्रीविष्णु को अति प्रिय है, माना जाता है कि आंवले को भगवान विष्णु ने ही आदि वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया था। इसीलिए आंवले के पेड़ में विष्णु का वास माना गया है।

शास्त्रों के अनुसार एकादशी तिथि भगवान श्री विष्णु को अति प्रिय है । एकादशी के दिन भगवान श्री विष्णु / श्री कृष्ण की आराधना की जाती है। शास्त्रों के अनुसार एकादशी का व्रत रखने वाला जातक भगवान विष्णु जी को बहुत प्रिय होता है ।

एकादशी के दिन जल में आँवले का चूर्ण या आँवले का रस डाल कर स्नान करने से समस्त पापो का नाश होता है।

एकादशी के दिन रात्रि में भगवान विष्णु के सामने नौ बत्तियों का दीपक जलाएं और एक दीपक ऐसा जलाएं जो रात भर जलता रहे।

एकादशी के दिन चावल और दूसरे का अन्न खाना मना है । एकादशी के दिन चावल खाने से रोग और पाप बढ़ते है, एकादशी के दिन दूसरे का अन्न खाने से समस्त पुण्यों का नाश हो जाता है ।

एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी के मन्त्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” अथवा ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमहि। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्।। एकादशी को अधिक से अधिक जाप करना चाहिए ।

प. विष्णुदत्त शास्त्री {8290814026}