






श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 14 मई 2021।🚩श्री गणेशाय नम:🚩
शास्त्रों के अनुसार तिथि के पठन और श्रवण से माँ लक्ष्मी की कृपा मिलती है ।
वार के पठन और श्रवण से आयु में वृद्धि होती है।
नक्षत्र के पठन और श्रवण से पापो का नाश होता है।
योग के पठन और श्रवण से प्रियजनों का प्रेम मिलता है। उनसे वियोग नहीं होता है ।
*करण के पठन श्रवण से सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है ।
इसलिए हर मनुष्य को जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए नित्य पंचांग को देखना, पढ़ना चाहिए ।
📜 आज का पंचांग 📜
☀ 14 – May – 2021
☀ Sri Dungargarh, India
☀ पंचांग
🔅 तिथि तृतीया पूर्ण रात्रि
🔅 नक्षत्र मृगशिरा पूर्ण रात्रि
🔅 करण तैतिल 18:52:42
🔅 पक्ष शुक्ल
🔅 योग सुकर्मा 25:44:44
🔅 वार शुक्रवार
☀ सूर्य व चन्द्र से संबंधित गणनाएँ
🔅 सूर्योदय 05:45:04
🔅 चन्द्रोदय 07:19:59
🔅 चन्द्र राशि वृषभ – 19:13:52 तक
🔅 चंद्र वास दक्षिण शाम 07:13 तक
🔅 सूर्यास्त 19:15:48
🔅 चन्द्रास्त 21:38:59
🔅 ऋतु ग्रीष्म
☀ हिन्दू मास एवं वर्ष
🔅 शक सम्वत 1943 प्लव
🔅 कलि सम्वत 5123
🔅 दिन काल 13:30:44
🔅 विक्रम सम्वत 2078
🔅 मास अमांत वैशाख
🔅 मास पूर्णिमांत वैशाख
☀ शुभ और अशुभ समय
☀ शुभ समय
🔅 अभिजित 12:03:24 – 12:57:27
☀ अशुभ समय
🔅 दुष्टमुहूर्त :
08:27:12 – 09:21:15
12:57:27 – 13:51:30
🔅 कंटक 13:51:30 – 14:45:33
🔅 यमघण्ट 17:27:42 – 18:21:45
🔅 राहु काल 10:49:05 – 12:30:26
🔅 कुलिक 08:27:12 – 09:21:15
🔅 कालवेला या अर्द्धयाम 15:39:36 – 16:33:39
🔅 यमगण्ड 15:53:07 – 17:34:28
🔅 गुलिक काल 07:26:24 – 09:07:45
☀ दिशा शूल
🔅 दिशा शूल पश्चिम
☀ चन्द्रबल और ताराबल
☀ ताराबल
🔅 भरणी, रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा, पुनर्वसु, आश्लेषा, पूर्वा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाति, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढ़ा, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, रेवती
☀ चन्द्रबल
🔅 वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन
📜 चोघडिया 📜
🔅चल 05:45:04 – 07:26:24
🔅लाभ 07:26:24 – 09:07:45
🔅अमृत 09:07:45 – 10:49:05
🔅काल 10:49:05 – 12:30:26
🔅शुभ 12:30:26 – 14:11:47
🔅रोग 14:11:47 – 15:53:07
🔅उद्वेग 15:53:07 – 17:34:28
🔅चल 17:34:28 – 19:15:48
🔅रोग 19:15:48 – 20:34:23
🔅काल 20:34:23 – 21:52:58
🔅लाभ 21:52:58 – 23:11:33
🔅उद्वेग 23:11:33 – 24:30:08
🔅शुभ 24:30:08 – 25:48:43
🔅अमृत 25:48:43 – 27:07:18
🔅चल 27:07:18 – 28:25:53
🔅रोग 28:25:53 – 29:44:27
❄️लग्न तालिका❄️
🔅 मेष चर
शुरू: 04:13 AM समाप्त: 05:50 AM
🔅 वृषभ स्थिर
शुरू: 05:50 AM समाप्त: 07:46 AM
🔅 मिथुन द्विस्वाभाव
शुरू: 07:46 AM समाप्त: 10:01 AM
🔅 कर्क चर
शुरू: 10:01 AM समाप्त: 12:21 PM
🔅 सिंह स्थिर
शुरू: 12:21 PM समाप्त: 02:38 PM
🔅 कन्या द्विस्वाभाव
शुरू: 02:38 PM समाप्त: 04:54 PM
🔅 तुला चर
शुरू: 04:54 PM समाप्त: 07:14 PM
🔅 वृश्चिक स्थिर
शुरू: 07:14 PM समाप्त: 09:32 PM
🔅 धनु द्विस्वाभाव
शुरू: 09:32 PM समाप्त: 11:37 PM
🔅 मकर चर
शुरू: 11:37 PM समाप्त: अगले दिन 01:20 AM
🔅 कुम्भ स्थिर
शुरू: अगले दिन 01:20 AM समाप्त: अगले दिन 02:48 AM
🔅 मीन द्विस्वाभाव
शुरू: अगले दिन 02:48 AM समाप्त: अगले दिन 04:13 AM
पं. विष्णुदत्त शास्त्री {8290814026}
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अक्षय तृतीया को स्वयं सिद्धि मुहूर्त कहा जाता है। अबूझ मुहूर्त का होने की वजह से इस दिन कोई भी शुभ काम करने के लिए हमें निश्चित शुभ मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती है और मांगलिक कार्यों के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ माना गया है। अक्षय तृतीया के दिन का हर पल बेहद शुभ होता है। अक्षय तृतीया के दिन परशुराम जी (भगवान विष्णु के छठे अवतार) का जन्मोत्सव मनाया जाता है है। ऐसे में इस वर्ष अक्षय तृतीया के मौके पर कई महत्वपूर्ण और शुभ योगों का संयोग भी बन रहा है जो इस दिन के महत्व को कई गुना बढ़ाने का काम करेगा। इस मौके पर लक्ष्मी नारायण योग, सर्वार्थ सिद्धि योग गजकेसरी योग बन रहा है। कहा जाता है कि, अक्षय तृतीया के दिन यदि जप,तप, स्नान दान आदि किया जाए तो इससे व्यक्ति को शुभ फल की प्राप्ति होती है। इसके अलावा अक्षय तृतीया के दिन यदि अपने पितरों को जल दान दिया जाए तो कहा जाता है कि, उनकी आत्मा अनंत काल के लिए तृप्त होती है
❇️अक्षय तृतीया पूजा मुहूर्त- सुबह 05 बजकर 40 मिनट से दोपहर 12 बजकर 17 मिनट तक रहेगा
अक्षय तृतीया के मौके पर गंगा स्नान का भी महत्व बताया गया है। हालांकि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यदि गंगा स्नान नहीं भी किया जा सकता तो घर में ही है स्नान के जल में गंगा जल मिलाकर उस से नहाने से व्यक्ति के सभी तरह के पाप और कष्ट दूर होते हैं। इसके अलावा स्नान करने के बाद दान का संकल्प लें और परिस्थितियां सामान्य होने के बाद दान अवश्य करें। ऐसा करने से व्यक्ति का जीवन हमेशा सुख पूर्वक व्यतीत होता है।




