May 20, 2026
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हाल के उप चुनावों में राजस्थान, हिमाचल और बंगाल में भाजपा को करारी शिकस्त मिली। मध्य प्रदेश और कर्नाटक में भी वो आशानुरूप नतीजे नहीं पा सकी। इससे पार्टी का चिंतित होने स्वाभाविक था। क्योंकि थोड़े समय में ही उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव है। एक तरफ महंगाई के कारण जनता में असंतोष है वहीं दूसरी तरफ गैर भाजपा दल कुछ ज्यादा सक्रिय है।
इस सूरते हालात को देखते हुए भाजपा ने कल राष्ट्रीय कार्यकारिणी की आनन फानन में बैठक आयोजित की और आने वाले चुनाव को लेकर रणनीति बनाई। इस बैठक में प्रधानमंत्री सहित पार्टी के सभी बड़े नेता शामिल हुए। मगर लक्ष्य महंगाई, बेरोजगारी, बिगड़ती अर्थ व्यवस्था पर कम विचार हुआ, चुनाव जीतने पर अधिक जोर रहा। भारतीय लोकतंत्र में यही तो कमी अब जनता को अखरने लगी है, राजनीतिक दलों का जोर जन समस्याओं के निराकरण पर कम और चुनाव जीतने पर अधिक रहता है। इस जीत को ही वो अपनी सफलता मानते हैं। राजनीतिक पंडितों के अनुसार ये सोच का बदलाव ही समस्याओं को बढ़ा रहा है।
पंजाब में भाजपा का साथ उसके पुराने साथी अकाली दल ने छोड़ दिया है, यहां पार्टी पहले से ही कमजोर है। डूबते तिनके को कैप्टन अमरिंदर की नई पार्टी से सहारा मिलने की उम्मीद है। इसी कारण कार्यकारिणी की बैठक में 1984 के नरसंहार को को मुद्दा बनाने का भाजपा ने सोचा है और माध्यम बनाया है दिल्ली में जगदीश टाइटलर को फिर से सक्रिय करने के कांग्रेस के निर्णय को। किसान आंदोलन की काट के लिए पार्टी इस निर्णय पर पहुंची है।
यूपी में जोर शोर से राम मंदिर को मुद्दा बनाने की कोशिश की गई मगर ये कार्ड अब भाजपा को चलता नहीं दिख रहा। वहीं दूसरी तरफ किसानों ने भी यहीं डेरा डाल भाजपा को परेशान कर रखा है। प्रदेश की बिगड़ी कानून व्यवस्था को अखिलेश मुद्दा बना रहे हैं वहीं वे छोटे दलों से तालमेल कर भाजपा विरोधी वोटों का बंटवारा रोक रहे हैं। कांग्रेस ने महिला और ब्राह्मण वोटों पर नजरें लगाई है, उससे भी भाजपा को ही नुकसान होगा। अब भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारणी में सेवा के जरिये चुनावी वैतरणी पार करने की नीति बनाई गई है।
उत्तराखंड में पार्टी के सामने परेशानी है। कांग्रेस की तरह मुख्यमंत्री बदलने की नीति ने वहां परेशानी पैदा की है। किसान यहां भी पहुंच गये हैं। भाजपा के लिए यहां मुश्किल कम नहीं है, कांग्रेस कड़ी चुनोती दे रही है। गोवा और मणिपुर में जो हालत है उसी से जीत लेने का भरोसा पार्टी कर रही है मगर महंगाई को वो भूल रही है।
राजस्थान में भाजपा गुटबाजी से तो हिमाचल में अभी हुई हार से चिंतित है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी में इन राज्यों पर खास फोकस नहीं किया गया, ये भी राजनीति के जानकार सही नहीं मान रहे। समस्या बढ़ गई तो इलाज भी सम्भव नहीं होगा।
महंगाई अब पूरे देश में मुद्दा है, ये बात तो हिमाचल के मुख्यमंत्री ने हार के बाद खुद कही है। उसके बाद भी इस पर ध्यान न देना सरकार को भारी पड़ेगा।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार