May 21, 2026
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श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 24 जून 2022। प्रवास के द्वितीय दिवस के प्रवचन में आचार्यश्री महाश्रमण जी ने आत्मा को नियंत्रित करने का संदेश दिया। आचार्यश्री ने कहा कि आत्मा संयम तथा तप की साधना से नियंत्रित की जा सकती है और जो व्यक्ति स्वयं पर नियंत्रण नहीं रखेगा उस पर दूसरे लोग नियंत्रण रखेंगे। गुरुजी ने आत्म नियंत्रण के दो साधन आत्मानुशासन और परांग अनुशासन बताया। आचार्यश्री ने अच्छे शिष्य के गुण बताते हुए लोकतंत्र के स्थायित्व पर भी चर्चा की। इस दौरान पांडाल में सैंकड़ो श्रावक व श्राविकाएं उपस्थित रहें।

तेरापंथ का छठा तीर्थ श्रीडूंगरगढ़- विश्रुत विभा

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। तेरापंथ धर्मसंघ की साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभा जी ने श्रीडूंगरगढ़ श्रावक श्राविकाओं की निष्ठा को देख कर कहा कि तेरापंथ में पांच तीर्थ प्रमुख है और छठा तीर्थ श्रीडूंगरगढ़ को जोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पाप के प्रक्षालन के लिए तीर्थ का होना आवश्यक है और यहां सुंदर सेवा केंद्र है। साध्वी प्रमुखा ने कहा कि आचार्यश्री समस्त समाजों को प्रकाश बांट रहें है। आचार्यश्री की अहिंसा यात्रा सभी धर्मों में उल्लेखनीय है। उन्होंने कहा कि जैन विश्वविद्यालय में वाइस चांसलर के रूप में सेवाए देने वाली साध्वी चरितार्थ प्रभा इन दिनों श्रीडूंगरगढ़ की वृद्ध साध्वियों की सेवा कर रही है, यह सेवा का श्रेष्ठ उदाहरण है। उन्होंने तुलसी सेवा संस्थान में लगी सीटी स्कैन मशीन का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में सेवा करने वाले के समक्ष जाति और पंथ की बातें गौण होती हैं।

छापर चातुर्मास के बाद एक वर्षीय विहार कार्यक्रम बताया।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। आज प्रवचन के दौरान आचार्यश्री महाश्रमण ने छापर चातुर्मास के बाद के एक वर्षीय विहार कार्यक्रम का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत भी किया।
चातुर्मास फरमाने का निवेदन।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। सेवा केंद्र व्यवस्थापिका साध्वी चरितार्थ प्रभा ने अपने विचार प्रकट करते हुए आचार्यश्री से भावभरा निवेदन श्रीडूंगरगढ़ में चातुर्मास फरमाने का किया। उन्होंने कहा कि इस गिरिगढ़ में 35 वर्षों से चातुर्मास् नहीं हुआ है, यह शहर गुरुदेव का कृपाकांक्षी है। इस दौरान ज्ञानशाला के विद्यार्थियों ने सुन्दर गीतिका प्रस्तुत की तथा कार्यक्रम का संयोजन दिनेश मुनि ने किया।

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। आचार्यश्री के अभिनंन्दन में शहर हुवा एकमत।
श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स। आचार्यश्री के अभिनंदन में श्रावको ने दी भावाभिव्यक्ति।