May 21, 2026
26jan

श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स 18 जुलाई 2022। संसद का मानसून सत्र आज से आरम्भ हो रहा है। परंपरा के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष ने सत्र से पहले 36 दलों की सर्वदलीय बैठक बुलाई। हमेशा की तरह चर्चा, विधेयकों के आने, विपक्ष के बिंदु आदि पर विचार हुआ। सभी ने सत्र के अधिकतम उपयोग पर सहमति दिखाई। मगर क्या ये बातें फलीभूत होगी, अब तक का अनुभव तो दूसरा है।
मानसून सत्र में सरकार ने 24 विधेयक लाने की अपनी मंशा बताई तो विपक्ष कांग्रेस ने जनहित के 13 मुद्दे सामने रखे। जिनमें महंगाई, बेरोजगारी, अग्निवीर योजना, रुपये की गिरावट, हेट स्पीच, ईडी की भूमिका आदि के विषय शामिल है। बैठक के अनुसार काम होगा, इस पर अभी से सवालिया निशान है।
कांग्रेस के नेता राहुल गांधी, शिव सेना के संजय राउत ईडी का सामना कर चुके हैं और इस कारण देश मे राजनीतिक बवाल भी उठ चुका है। कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी को ईडी का नोटिस गया हुआ है। इसलिए इस मुद्दे पर हंगामा होना तय सा लगता है। वहीं कई दल अग्निवीर योजना का विरोध कर चुके हैं और सरकार इसको लागू कर प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। इस मुद्दे पर भी टकराहट तय है। रुपये की गिरावट पर विपक्ष हमलावर रहेगा, ये तय है। इस स्थिति में सुचारू रूप से संसद की कार्यवाही चलेगी, कहना मुश्किल है। बाकी तो समय बतायेगा।
मगर भविष्य की राजनीति के लिए मानसून सत्र खास है, क्योंकि आगे की राजनीतिक झलक इससे सामने आयेगी। इसी सत्र में देश को नया राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति मिलेगा। इन दोनों के चुनाव राजनीतिक दलों के नये समीकरण सामने लायेंगे। दलों के चुनाव को लेकर स्पष्ट होने वाले रुख से अगले आम चुनावों के नये समीकरण सामने आयेंगे। उद्धव ठाकरे पहले ही महाअगाडी गठबंधन से अलग जाकर राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार के समर्थन की घोषणा कर चुके हैं। जिसका असर न केवल आने वाले समय मे महाराष्ट्र की राजनीति पर पड़ेगा, अपितु अगले आम चुनाव पर भी होगा। इसी तरह झारखंड की गठबंधन सरकार का नेतृत्त्व कर रहे हेमंत सोरेन भी अपने सहयोगी दलों से अलग राह पकड़ एनडीए उम्मीदवार का समर्थन कर चुके हैं। जिसका असर झारखंड की सरकार पर पड़ना तय है और उसकी छाया अगले आम चुनाव तक पड़ेगी। उप राष्ट्रपति चुनाव में यूपीए ने अपना अलग उम्मीदवार घोषित कर दिया, मगर उस पर ममता बनर्जी और केजरीवाल से बात भी नहीं हुई। इन दोनों का उप राष्ट्रपति चुनाव में क्या रुख रहता है, उसका भी भविष्य की राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा। क्योंकि विपक्ष की अगले आम चुनाव में कैसी एकता रहती है, ये स्पष्ट हो जायेगा। कुल मिलाकर संसद का मानसून सत्र भविष्य की राजनीति को लेकर कई संकेत करेगा। असंशय के कई बादल छंटेंगे।
– मधु आचार्य ‘ आशावादी ‘
वरिष्ठ पत्रकार